दिल्ली
एक घंटा पहले
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विचारों
त्योहारी सीजन में व्यापारियों की बढ़ी धड़कनें
राजधानी दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर 2026 को कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' ब्लॉक द्वारा आयोजित होने वाली विशाल जनसभा ने शहर के व्यापारियों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। दिवाली का त्यौहार सिर पर है और ऐसे में बाजारों में खरीदारी अपने चरम पर रहती है। कारोबारियों का कहना है कि इस रैली के कारण न केवल स्थानीय व्यापार पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा, बल्कि ग्राहकों और माल की आवाजाही भी बुरी तरह बाधित होगी। दिल्ली के व्यापारिक संगठन 'चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री' (CTI) ने अब मोर्चा संभालते हुए सीधे विपक्षी दिग्गजों को पत्र लिखा है।
विपक्ष को की गई खास अपील
व्यापारी संगठन ने समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के प्रमुख उद्धव ठाकरे और बिहार के प्रमुख नेता तेजस्वी यादव समेत गठबंधन के तमाम बड़े नेताओं को पत्र लिखकर विनम्र आग्रह किया है। सीटीआई ने इन नेताओं से गुजारिश की है कि वे इस रैली को 1 नवंबर के बजाय दिवाली के बाद 10 या 11 नवंबर को आयोजित करने पर विचार करें। पत्र में कहा गया है कि राजनीति के इस बाजार में व्यापारियों की रोजी-रोटी की 'मोहब्बत की दुकानों' को बंद न किया जाए। सीटीआई के चेयरमैन बृजेश गोयल ने स्पष्ट किया कि व्यापारी किसी भी राजनीतिक दल की रैली के विरोधी नहीं हैं, लेकिन त्यौहारों के इस व्यस्त समय में वे अपने अस्तित्व को बचाने की गुहार लगा रहे हैं।
कारोबार पर कितना बड़ा होगा असर
व्यापारी संगठन का अनुमान है कि यदि यह रैली तय तारीख पर होती है, तो मध्य दिल्ली और पुरानी दिल्ली के 20 प्रमुख बाजारों को रोजाना 10 से 12 हजार करोड़ रुपये का बड़ा नुकसान हो सकता है। रैली में 10 लाख लोगों के जुटने की उम्मीद है, जिसके लिए करीब 15 से 20 हजार वाहनों के दिल्ली की सड़कों पर उतरने की संभावना है। 6 नवंबर को धनतेरस और 8 नवंबर को दिवाली है, ऐसे में 1 नवंबर का दिन तैयारी और माल की सप्लाई के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि सड़कों पर बैरिकेडिंग लगी और यातायात बाधित हुआ, तो माल की सप्लाई चेन पूरी तरह चरमरा जाएगी।
रामलीला मैदान में पार्किंग की गंभीर समस्या
CTI ने अपनी चिंता जताते हुए कहा है कि रामलीला मैदान में 10 लाख लोगों के आने से उत्पन्न होने वाली पार्किंग की चुनौती को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। संगठन के अनुसार, मैदान के पास 200 बड़ी बसों के लिए भी समुचित जगह नहीं है, तो हजारों की संख्या में आने वाले वाहनों को कहां खड़ा किया जाएगा, यह बड़ा सवाल है। जवाहरलाल नेहरू मार्ग, बहादुर शाह जफर मार्ग, नेताजी सुभाष मार्ग, अजमेरी गेट और चांदनी चौक रोड जैसे मुख्य रास्तों पर भारी दबाव के कारण ऐसी स्थिति पैदा हो सकती है जिसे नियंत्रित करना मुश्किल होगा। संगठन का दावा है कि इससे शहर में लॉकडाउन जैसे हालात बन सकते हैं और मुख्य बाजारों तक लोगों का पहुंचना लगभग असंभव हो जाएगा।
प्रभावित होने वाले प्रमुख बाजार
रैली के प्रभाव से दिल्ली के ऐतिहासिक व्यापारिक केंद्रों पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है। रामलीला मैदान के 5 किलोमीटर के दायरे में आने वाले लगभग 20 प्रमुख थोक और खुदरा बाजार सीधे तौर पर प्रभावित होंगे। इन बाजारों में शामिल हैं:
- चांदनी चौक, सदर बाजार, कनॉट प्लेस और पालिका बाजार।
- जनपथ, भागीरथ पैलेस और खारी बावली।
- कश्मीरी गेट, नया बाजार, लाजपत राय मार्केट और चावड़ी बाजार।
- किनारी बाजार, दरीबा कलां, बल्लीमारान और फतेहपुरी।
- तिलक बाजार, करोल बाग, जामा मस्जिद और नबी करीम।
- गफ्फार मार्केट और अजमेरी गेट-पहाड़गंज का इलाका।
ये बाजार न केवल दिल्ली, बल्कि पूरे देश को सामान की आपूर्ति करते हैं। यहां रोजाना दिल्ली के 56 औद्योगिक क्षेत्रों जैसे नरेला, बवाना, ओखला, मायापुरी, मुंडका, उद्योग नगर और मंगोलपुरी से लगभग 5 हजार ट्रक और टेम्पो माल लेकर आते हैं। साथ ही, हर दिन करीब 3 हजार ट्रक यहां से माल लेकर नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत और पानीपत समेत एनसीआर के 25 शहरों और देश के अन्य राज्यों के लिए निकलते हैं। इन आवाजाही के रुकने से दूसरे राज्यों का व्यापार भी बुरी तरह प्रभावित होगा।
समय से पहले ही संकट की आशंका
व्यापारियों का डर सिर्फ 1 नवंबर तक सीमित नहीं है। सीटीआई ने अंदेशा जताया है कि 31 अक्टूबर की दोपहर से ही दिल्ली की सीमाओं पर भीड़ जमा होना शुरू हो सकती है। सिंघु, टिकरी, गाजीपुर और बदरपुर बॉर्डर पर भारी संख्या में बसों और वाहनों के आने से शाम तक शहर के प्रमुख रास्तों पर प्रतिबंध और बैरिकेडिंग लगाई जा सकती है। ट्रांसपोर्टरों ने पहले ही आशंका जताई है कि 31 अक्टूबर से ही दिल्ली में माल भेजना जोखिम भरा हो सकता है। अगर उस दिन से माल की सप्लाई प्रभावित हुई, तो दिवाली तक दुकानदारों के पास पर्याप्त स्टॉक नहीं पहुंच पाएगा, जिससे ग्राहकों की बढ़ती मांग को पूरा करना मुश्किल हो जाएगा।
पुराने अनुभवों से सीख और भविष्य का डर
संगठन ने अपनी बात को पुख्ता करने के लिए 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर हुए एक छोटे प्रदर्शन का उदाहरण दिया है। उस दिन केवल 5 से 7 हजार लोग ही एकत्रित हुए थे, लेकिन फिर भी मध्य दिल्ली में करीब 8 घंटे तक यातायात पूरी तरह जाम रहा था। जब इतने कम लोगों के आने से ट्रैफिक व्यवस्था ढह गई थी, तो 10 लाख लोगों की प्रस्तावित रैली से उत्पन्न होने वाली स्थिति कितनी भयावह हो सकती है, इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। व्यापारियों का कहना है कि यदि ग्राहक यातायात प्रतिबंधों के कारण बाजारों तक नहीं पहुंच पाए, तो वे ऑनलाइन शॉपिंग या अन्य जगहों का रुख करेंगे, जिससे स्थानीय दुकानदारों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।
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