राष्ट्रीय राजनीति
एक घंटा पहले
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1 नवंबर को सुरक्षा का अभेद्य घेरा
दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में 1 नवंबर को आयोजित होने वाली इंडिया ब्लॉक की रैली के मद्देनजर दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा का एक व्यापक और हाईटेक खाका तैयार कर लिया है। इस रैली में भीड़ के प्रबंधन और सुरक्षा को लेकर पुलिस कोई भी ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के खिलाफ विपक्ष द्वारा आयोजित इस विरोध प्रदर्शन में बड़ी संख्या में लोगों के जुटने की संभावना है। पुलिस का आकलन है कि रैली स्थल पर करीब 50 हजार लोग पहुंच सकते हैं, जिसके चलते सुरक्षा की कई परतें तैयार की गई हैं।
एआई तकनीक से लैस निगरानी
इस बार की सुरक्षा व्यवस्था में तकनीक का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर किया जा रहा है। रामलीला मैदान और उसके आसपास के पूरे क्षेत्र में लगभग 200 से 250 हाई-डेफिनिशन सीसीटीवी कैमरे स्थापित किए जा रहे हैं। ये कैमरे न केवल प्रवेश और निकास द्वारों पर नज़र रखेंगे, बल्कि मैदान के भीतर लोगों की हर गतिविधि को ट्रैक करेंगे। सबसे महत्वपूर्ण पहलू एआई यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक का उपयोग है, जिसके माध्यम से भीड़ में संदिग्ध चेहरों की स्कैनिंग की जाएगी। इसके अलावा, ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी विशेष बॉडी कैमरों से लैस होंगे ताकि मैदान की हर हलचल रिकॉर्ड हो सके। इन कैमरों की लाइव फीड देखने के लिए एक समर्पित कंट्रोल रूम बनाया गया है, जहां वरिष्ठ अधिकारी हर स्थिति पर निरंतर नजर रखेंगे।
मैदान का विभाजन और पुलिस बल की तैनाती
करीब 12 एकड़ में फैले रामलीला मैदान को सुरक्षा के दृष्टिकोण से 14 अलग-अलग जोन में विभाजित किया गया है। हर जोन की जिम्मेदारी सहायक पुलिस आयुक्त यानी एसीपी रैंक के अधिकारी के कंधों पर होगी। इन 14 जोन को आगे आठ सेक्टरों में बांटा गया है, जिसकी निगरानी वरिष्ठ पुलिस अधिकारी करेंगे। सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए दिल्ली पुलिस के 3,000 से 3,500 पुलिसकर्मियों के साथ-साथ केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के जवान भी तैनात रहेंगे। इस भारी सुरक्षा बल की तैनाती का उद्देश्य न केवल भीड़ को नियंत्रित करना है, बल्कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना और किसी भी अप्रिय स्थिति को टालना है।
प्रवेश और निकास के कड़े नियम
रामलीला मैदान के कुल आठ गेटों में से केवल तीन गेट आम लोगों के प्रवेश के लिए खोले जाएंगे। वीआईपी लोगों के लिए अलग से प्रवेश द्वार निर्धारित किया गया है, जबकि वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की आवाजाही के लिए भी एक विशेष रास्ता तय किया गया है। मैदान में प्रवेश करने वाले हर व्यक्ति को सुरक्षा के दो स्तरीय जांच से गुजरना होगा। इसके लिए बैगेज स्क्रीनिंग मशीनों और मेटल डिटेक्टरों का उपयोग किया जा रहा है। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बैरिकेडिंग की गई है। किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए एक विशेष निकास द्वार अलग रखा गया है ताकि जरूरत पड़ने पर भीड़ को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।
आयोजकों के लिए कड़े निर्देश
पुलिस ने रैली के आयोजकों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि कार्यक्रम निर्धारित समय सीमा, यानी सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक ही संपन्न होना चाहिए। कार्यक्रम के बाद मैदान में रात भर रुकने की अनुमति नहीं दी गई है। आयोजकों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि रैली में आने वाले लोग किसी भी स्थिति में अनुमति के बिना जुलूस के रूप में शहर के अन्य इलाकों में न जाएं। भीड़ के सुगम प्रबंधन के लिए पुलिस ने आयोजकों से वॉलंटियर की पर्याप्त संख्या तैनात करने को कहा है। इसके साथ ही, पीने के पानी की व्यवस्था और महिलाओं के लिए अलग शौचालयों का इंतजाम करना भी आयोजकों की जिम्मेदारी होगी।
यातायात और लॉजिस्टिक्स का समन्वय
रैली के दौरान ट्रैफिक व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए आयोजकों को दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के साथ मिलकर काम करना होगा। बसों और निजी वाहनों की पार्किंग के लिए भी पुलिस ने दिशा-निर्देश जारी किए हैं। आयोजकों से कहा गया है कि वे आमंत्रित लोगों, आने वाले वॉलंटियरों की संख्या और बसों का पूरा विवरण पहले से ही पुलिस को उपलब्ध कराएं। इससे भीड़ के आगमन और प्रस्थान के समय होने वाली संभावित अफरा-तफरी को नियंत्रित किया जा सकेगा। पुलिस की यह रणनीति तकनीक और जमीनी सुरक्षा बल का एक ऐसा मिश्रण है, जो किसी भी आपात स्थिति के लिए पूरी तरह तैयार है।
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