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2 महीने पहले
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सेना को मिला नया नेतृत्व
भारतीय सेना को अपना नया वाइस चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ यानी VCOAS मिल गया है। लेफ्टिनेंट जनरल संदीप जैन ने इस अत्यंत प्रतिष्ठित और महत्वपूर्ण पद का कार्यभार ग्रहण कर लिया है। उनके पास भारतीय सेना में लगभग 38 साल का लंबा और अनुभवी करियर है। उन्होंने देश के सबसे चुनौतीपूर्ण और दुर्गम इलाकों में अपनी सेवाएं दी हैं। उनके अनुभव का दायरा जम्मू-कश्मीर की घाटियों से लेकर पूर्वोत्तर भारत के घने जंगलों, संयुक्त राष्ट्र के वैश्विक शांति मिशनों और ऊंचे पहाड़ी इलाकों तक फैला हुआ है। सेना के आधुनिकीकरण और कई बड़े ऑपरेशंस में उनकी भूमिका अत्यंत सराहनीय रही है।
पदभार ग्रहण और सैन्य बदलाव
लेफ्टिनेंट जनरल संदीप जैन ने वाइस चीफ के पद पर जनरल धीरज सेठ की जगह ली है। जनरल धीरज सेठ ने उनसे ठीक एक दिन पहले ही भारतीय सेना के नए चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ यानी COAS के रूप में कमान संभाली थी। इन बदलावों के साथ ही सेना मुख्यालय में शीर्ष स्तर का नेतृत्व परिवर्तन पूर्ण हो गया है। संदीप जैन की नियुक्ति को सेना की ऑपरेशनल तैयारी को और अधिक मजबूती देने के रूप में देखा जा रहा है।
महार रेजिमेंट से जुड़ाव और करियर की शुरुआत
लेफ्टिनेंट जनरल संदीप जैन खड़कवासला स्थित प्रतिष्ठित नेशनल डिफेंस अकादमी यानी NDA के पूर्व छात्र हैं। अपनी ट्रेनिंग पूरी करने के बाद उन्हें भारतीय सेना की प्रसिद्ध महार रेजिमेंट में कमीशन मिला था। अपने लगभग चार दशक के लंबे करियर में उन्होंने न केवल देश की रक्षा की, बल्कि विदेश में भी अपनी रणनीतिक सूझबूझ का लोहा मनवाया है। वर्तमान समय में वे महार रेजिमेंट के कर्नल ऑफ द रेजिमेंट के रूप में भी सेवा दे रहे हैं।
विभिन्न मोर्चों पर संभाली कमान
लेफ्टिनेंट जनरल संदीप जैन का सैन्य अनुभव बेहद विविध रहा है। उन्होंने अपने करियर के दौरान सेना की अलग-अलग इकाइयों का कुशल नेतृत्व किया है। उन्होंने अर्ध-रेगिस्तानी इलाकों में इन्फैंट्री बटालियन की कमान संभालने से लेकर स्ट्राइक कोर में इन्फैंट्री ब्रिगेड का नेतृत्व करने तक की जिम्मेदारी बखूबी निभाई है। इसके अलावा, उन्होंने काउंटर इंसर्जेंसी फोर्स, उत्तरी कमान की पिवट कोर और कई अन्य महत्वपूर्ण सैन्य इकाइयों का भी नेतृत्व किया है। लेफ्टिनेंट जनरल बनने के बाद उन्होंने नगरोटा स्थित 16 कोर यानी XVI Corps की कमान संभाली थी। इसके अलावा, उन्होंने भविष्य के सैन्य अधिकारियों को तैयार करने वाली संस्था इंडियन मिलिट्री अकादमी यानी IMA देहरादून के कमांडेंट के रूप में भी कार्य किया है।
ऑपरेशंस और अंतरराष्ट्रीय मिशन
संदीप जैन के नाम कई प्रमुख सैन्य ऑपरेशंस का अनुभव है। उन्होंने श्रीलंका में चले भारतीय सेना के ऐतिहासिक ऑपरेशन पवन में सक्रिय रूप से भाग लिया था। इसके अतिरिक्त, लाइन ऑफ कंट्रोल यानी LoC, जम्मू-कश्मीर के काउंटर इंसर्जेंसी ऑपरेशन और उत्तर-पूर्व के उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में भी उन्होंने कई बार सेवाएं दी हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उनकी पहचान एक दक्ष सैन्य अधिकारी की रही है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र मिशन इन साउथ सूडान यानी UNMISS में इन्फैंट्री बटालियन और सेक्टर की कमान संभाली थी। साथ ही, वे संयुक्त राष्ट्र मिशन इन इथियोपिया में मिलिट्री ऑब्जर्वर के रूप में भी कार्य कर चुके हैं, जिसने उन्हें वैश्विक सैन्य रणनीतियों की गहरी समझ दी है।
दक्षिणी कमान में निभाई महत्वपूर्ण भूमिका
वाइस चीफ बनने से ठीक पहले संदीप जैन दक्षिणी कमान यानी Southern Command के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ यानी GOC-in-C के पद पर कार्यरत थे। यह जिम्मेदारी उन्होंने 1 अप्रैल 2026 को संभाली थी। इस भूमिका से पहले वे दक्षिणी कमान मुख्यालय में चीफ ऑफ स्टाफ भी रह चुके हैं। इस दौरान उन्होंने सेना की कार्यक्षमता बढ़ाने, फोर्स स्ट्रक्चर में महत्वपूर्ण बदलाव लाने और ऑपरेशंस की तैयारियों को और अधिक दुरुस्त करने में अहम योगदान दिया था।
सैन्य शिक्षा और प्राप्त सम्मान
लेफ्टिनेंट जनरल संदीप जैन ने अपनी सैन्य शिक्षा के दौरान कई कठिन और प्रतिष्ठित कोर्स पूरे किए हैं। उन्होंने आर्मी वॉर कॉलेज महू से हायर कमांड कोर्स किया है, वहीं केन्या के नेशनल डिफेंस कॉलेज से उच्च स्तरीय सैन्य प्रशिक्षण भी प्राप्त किया है। उनकी उत्कृष्ट सेवाओं और असाधारण नेतृत्व के लिए उन्हें कई बार सम्मानित किया गया है। उन्हें अति विशिष्ट सेवा मेडल यानी AVSM और सेना मेडल यानी SM से नवाजा जा चुका है। ये सम्मान उनकी बहादुरी और देश के प्रति उनके अटूट समर्पण के प्रतीक हैं।
सेना के भविष्य का रोडमैप
भारतीय सेना में हुए इस बड़े बदलाव के बाद अब जनरल धीरज सेठ सेना प्रमुख हैं और लेफ्टिनेंट जनरल संदीप जैन उनके सबसे वरिष्ठ सहयोगी के रूप में वाइस चीफ की जिम्मेदारी निभाएंगे। आने वाले समय में सेना के आधुनिकीकरण, ऑपरेशनल कमांड के पुनर्गठन और वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी LAC सहित संवेदनशील सीमाओं की सुरक्षा को और मजबूत करने जैसे बड़े फैसलों में उनकी भूमिका सबसे अहम होगी। उन्होंने पदभार संभालने के समय सदर्न कमांड वॉर मेमोरियल पहुंचकर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की थी और सेना मुख्यालय में उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया था। संदीप जैन का मानना है कि सेना को नई तकनीक, स्वदेशी रक्षा क्षमताओं और संयुक्त सैन्य संचालन यानी Jointness पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।
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