भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन में सन्नाटा, 2600 यात्रियों की क्षमता के बावजूद सफर कर रहे सिर्फ 80 लोग हरियाणा 5 घंटे पहले 2
हरियाणा के जींद-सोनीपत रूट पर शुरू की गई देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को यात्रियों का अपेक्षित रिस्पॉन्स नहीं मिल रहा है। ट्रेन की विशाल क्षमता के सामने रोजाना सफर करने वाले यात्रियों की संख्या बेहद कम है, जिसके चलते रेलवे अब इसके रूट को विस्तार देने पर विचार कर रहा है।

उम्मीदों के विपरीत फीकी रही शुरुआत

हरियाणा के जींद से शुरू हुई भारत की महत्वाकांक्षी हाइड्रोजन ट्रेन परियोजना वर्तमान में यात्रियों की भारी कमी का सामना कर रही है। 17 जुलाई को जींद के पांडु-पिंडारा स्टेशन से शुरू हुई इस ट्रेन को देश की सबसे आधुनिक और पर्यावरण के अनुकूल रेल सेवा के रूप में पेश किया गया था। यह न केवल भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन है, बल्कि इसे दुनिया की सबसे लंबी हाइड्रोजन ट्रेन का दर्जा भी दिया गया है। हालांकि, तकनीकी रूप से उन्नत होने के बावजूद, आम जनता के बीच इसकी लोकप्रियता उम्मीद के अनुरूप नहीं रही है।

क्षमता और वास्तविकता का अंतर

इस ट्रेन की यात्री वहन क्षमता बेहद प्रभावशाली है। यह 10-कार वाली हाइड्रोजन ईंधन सेल-आधारित ट्रेन एक बार में लगभग 2,600 यात्रियों को ले जाने में सक्षम है। लेकिन आंकड़े बताते हैं कि ट्रेन अपनी पूरी क्षमता के एक छोटे से हिस्से का भी उपयोग नहीं कर पा रही है। रेलवे के आंकड़ों के अनुसार, यह ट्रेन सप्ताह में 6 दिन अपनी सेवाएं देती है, लेकिन रोजाना औसतन सिर्फ 80 यात्री ही इसका लाभ उठा रहे हैं।

रेलवे द्वारा 20 जुलाई से 20 अगस्त के बीच जुटाए गए आंकड़ों पर नजर डालें तो स्थिति स्पष्ट हो जाती है। इस एक महीने के दौरान, केवल 26 दिन ही ट्रेन ने अपनी सेवाएं दीं। सोनीपत से गोहाना के लिए इस दौरान 507 लोगों ने और जींद के लिए 538 लोगों ने यात्रा की। इसी तरह, जींद से सोनीपत और गोहाना की दिशा में भी यात्री संख्या इसी के आसपास रही। एक महीने की कुल यात्री संख्या ट्रेन की एक बार की क्षमता (2,600) को भी पार नहीं कर सकी, जो रेलवे प्रशासन के लिए चिंता का विषय है।

रूट विस्तार की योजना

यात्रियों की इस कम संख्या के कारण रेलवे अब इसके मार्ग में बदलाव की संभावनाओं को तलाश रहा है। दिल्ली मंडल के डीआरएम, पुष्पेश रमण त्रिपाठी के अनुसार, रेलवे इस ट्रेन की गति और दूरी को बढ़ाने के लिए लगातार तकनीकी परीक्षण कर रहा है। उन्होंने बताया कि इन ट्रायल रिपोर्ट के आधार पर भविष्य के कदम उठाए जाएंगे और जल्द ही इस ट्रेन को जींद-गोहाना-सोनीपत रूट से बढ़ाकर दिल्ली तक ले जाने की योजना पर मंथन किया जा रहा है।

तकनीकी विशेषताएं

यह अत्याधुनिक ट्रेन 1,200 KW हाइड्रोजन ईंधन सेल प्रणोदन प्रणाली द्वारा संचालित होती है। इसकी डिजाइन गति 110 किलोमीटर प्रति घंटा है, जबकि परिचालन के दौरान इसे 75 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम गति पर चलाया जाता है। यह ट्रेन जींद जंक्शन, गोहाना जंक्शन और सोनीपत के बीच चलती है और रास्ते में कई प्रमुख स्टेशनों जैसे जींद सिटी, पांडु पिंडारा, ललित खेड़ा, भांभेवा, ईसापुर खीरी, ब्यूटेन, खंडराई, रबरा, लठ, मोहना और बड़वासनी पर रुकती है।

यात्री क्यों नहीं दिखा रहे रुचि

इस ट्रेन के खाली दौड़ने के पीछे कई व्यावहारिक कारण बताए जा रहे हैं। जींद-सोनीपत रूट पर पहले से ही तीन पैसेंजर ट्रेनें और एक एक्सप्रेस ट्रेन संचालित है, जिससे यात्रियों के पास विकल्प मौजूद हैं। हाइड्रोजन ट्रेन के समय के साथ भी कुछ चुनौतियां हैं, जैसे सुबह 7:40 बजे सोनीपत के लिए ट्रेन रवाना होती है, जबकि इससे पहले ही 6:15 बजे दूसरी पैसेंजर ट्रेन निकल जाती है। इसके अलावा, रूट पर पड़ने वाले कई हॉल्ट्स जैसे रभड़ा, लाठ और बड़वासनी पर बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। यहाँ टिकट काउंटर नहीं हैं और न ही कर्मचारी तैनात हैं, जिससे यात्रियों को परेशानी होती है। केवल मोहान स्टेशन पर ही टिकटिंग की व्यवस्था उपलब्ध है, जहां ट्रेन का ठहराव भी मात्र एक-दो मिनट का होता है। हालांकि, यात्रा को सुलभ बनाने के लिए इसमें किराया काफी कम रखा गया है, जो न्यूनतम पांच रुपये से अधिकतम 25 रुपये तक है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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