चीन में मिला चार पंखों वाला 12 करोड़ साल पुराना अनोखा डायनासोर, उड़ती गिलहरी की तरह झपट्टा मारकर करता था शिकार चीन एक घंटा पहले 3
चीन के चांग्मा बेसिन में वैज्ञानिकों ने करीब 120 मिलियन साल पुराने एक शिकारी डायनासोर का जीवाश्म खोजा है, जिसे जियान चांग्माएंसिस नाम दिया गया है। चार पंखों वाला यह जीव बाज की तरह उड़ने के बजाय उड़ती गिलहरी की तरह ग्लाइड करते हुए प्राचीन पक्षियों का शिकार करता था।

चीन के चांग्मा बेसिन में वैज्ञानिकों के हाथ एक बेहद दुर्लभ जीवाश्म लगा है, जो करीब 120 मिलियन साल पुराने एक शिकारी डायनासोर का बताया जा रहा है। इस नई प्रजाति को जियान चांग्माएंसिस नाम दिया गया है। शोधकर्ताओं का कहना है कि यह खतरनाक जीव दुनिया के सबसे डरावने माने जाने वाले विलोसिरेप्टर डायनासोर का कजिन था। इसकी सबसे बड़ी पहचान इसके चार पंख और लंबी पूंछ थी।

यह जीव आसमान में बाज की तरह ताकतवर उड़ान नहीं भर सकता था। इसके बजाय यह एक पेड़ से दूसरे पेड़ की ओर ठीक उसी तरह ग्लाइड करता था जैसे आज की उड़ती गिलहरी करती है। चांग्मा बेसिन के इलाके में वर्षों से प्राचीन पक्षियों के विचित्र जीवाश्म मिलते आ रहे थे और वैज्ञानिक लंबे समय से यह समझने की कोशिश कर रहे थे कि आखिर इन पक्षियों का शिकार कौन-सा जीव करता था। इस नए मांसाहारी डायनासोर की खोज ने सदियों पुरानी इस गुत्थी को पूरी तरह सुलझा दिया है।

चांग्मा बेसिन में वैज्ञानिकों को क्या मिला

चीन का चांग्मा बेसिन प्राचीन पक्षियों के जीवाश्मों के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है। यहां अब तक वैज्ञानिकों को 100 से ज्यादा पुराने पक्षियों के अवशेष मिल चुके हैं। ये अवशेष देखने में उल्लू के उगले हुए भोजन के टुकड़ों जैसे लगते हैं। यही वजह थी कि वैज्ञानिकों को कई वर्षों से शक था कि कोई बड़ा शिकारी इन पक्षियों को अपना निवाला बनाता रहा होगा।

एनेल्स ऑफ कार्नेगी म्यूजियम में प्रकाशित एक अध्ययन ने अब इस रहस्य से पर्दा उठाया है। शोध के मुताबिक उस इलाके में एक ऐसा मांसाहारी डायनासोर मौजूद था जो वहां के बाकी सभी जीवों से कहीं बड़ा था। फील्ड म्यूजियम की एसोसिएट क्यूरेटर जिंगमाई ओ कॉनर ने कहा, ‘यह उस साइट पर मिला इकलौता मांसाहारी जीव है जो पक्षी नहीं था।’

जियान चांग्माएंसिस की खास बातें

इस नए डायनासोर का नाम चीनी लोककथाओं के एक पंख वाले पौराणिक जीव के नाम पर रखा गया है। यह डायनासोर माइक्रोरेप्टर समूह से ताल्लुक रखता था। आमतौर पर इस समूह के शिकारी जीव कौवे के आकार जैसे बेहद छोटे और फुर्तीले होते थे, लेकिन जियान चांग्माएंसिस अपने समूह के बाकी सदस्यों की तुलना में आकार में काफी बड़ा था।

अब तक वैज्ञानिकों को इसके ऊपरी हाथ का सिर्फ एक हिस्सा ही मिल पाया है। इसी हिस्से के आधार पर उन्होंने अनुमान लगाया है कि इस डायनासोर के पंखों का फैलाव करीब चार फीट रहा होगा। यह आकार आज के एक बड़े बारन उल्लू के बराबर बैठता है। बड़े आकार के बावजूद यह दिखने में अपने बाकी रिश्तेदारों जैसा ही था।

हवा में कैसे ग्लाइड करता था यह शिकारी

शोधकर्ताओं के अनुसार जियान के शरीर की बनावट बेहद अनोखी थी। इसके आगे के दोनों हाथों पर बड़े पंख थे, जबकि पीछे के दोनों पैरों पर भी छोटे पंख विकसित हो चुके थे। इन चार पंखों के बावजूद यह आसमान में सही मायने में उड़ान भरने की क्षमता नहीं रखता था।

जिंगमाई ओ कॉनर ने कहा, ‘जियान असली उड़ान भरने में सक्षम नहीं था, बल्कि यह सिर्फ उड़ती गिलहरी की तरह ग्लाइड करता था।’ यह अपने शिकार पर अचानक ऊपर से झपट्टा मारता था और इसके पंख हवा में संतुलन बनाने तथा दूरी तय करने के काम आते थे।

क्रेटेशियस काल की अहम कड़ी

कार्नेगी म्यूजियम के क्यूरेटर मैट लैमन्ना ने कहा, ‘दशकों से चांग्मा साइट पक्षियों के फॉसिल्स के लिए मशहूर रही है।’ उनका मानना है कि इस नए डायनासोर की खोज से इस पूरे इलाके के इतिहास को समझने में बड़ी मदद मिलेगी और आज के पक्षियों के विकास क्रम को जानना भी आसान हो जाएगा।

वैज्ञानिकों को दशकों बाद आखिरकार यह पता चल पाया है कि इन प्राचीन पक्षियों का असली शिकारी कौन था। लैमन्ना ने आगे कहा, ‘अब जियान की खोज से हमें आखिरकार पता चल गया है कि उन्हें कौन खा रहा था।’ इस तरह जियान चांग्माएंसिस की खोज ने क्रेटेशियस काल के इकोसिस्टम की एक बेहद महत्वपूर्ण कड़ी को जोड़ दिया है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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