राजस्थान
एक घंटा पहले
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झुंझुनूं जिले के मंड्रेला क्षेत्र के कुछ युवाओं ने निराश्रित गौवंश की सेवा को अपना ध्येय बनाकर एक प्रेरक मुहिम छेड़ दी है। इसी संकल्प के साथ उन्होंने 2 फरवरी 2024 को पिलानी रोड पर किराए की जमीन लेकर गौ चिकित्सालय की नींव रखी, जहां घायल, बीमार और बेसहारा गायों का उपचार और देखरेख की जाती है। आगे चलकर समूह के ही एक युवा ने अपनी निजी भूमि दान कर दी, जिससे यह सेवा कार्य स्थायी रूप ले सका।
जेब खर्च से शुरू हुआ सेवा का सिलसिला
शुरुआती दिनों में इन युवाओं ने सड़क और आसपास के इलाकों से लाई गई बीमार और घायल गायों के इलाज तथा दवाओं का पूरा खर्च अपनी जेब से उठाया। उनके इस निस्वार्थ समर्पण को देखकर क्षेत्र के अनेक दानदाता भी सहयोग के लिए आगे आए और धीरे-धीरे यह छोटी पहल एक बड़े सेवा अभियान में बदल गई। बीते दो वर्षों में इस टीम ने 700 से अधिक बीमार और घायल निराश्रित गौवंश का सफल उपचार किया है, जो पशु सेवा और सामाजिक दायित्व का अनुकरणीय उदाहरण बन गया है।
सोशल मीडिया से मिली नई ताकत
गौ रक्षा दल से जुड़े इन युवाओं ने अपनी पहल का सोशल मीडिया पर सक्रिय प्रचार किया, जिससे क्षेत्र के लोगों तक गौ चिकित्सालय की जानकारी पहुंचने लगी। अब हालत यह है कि कहीं भी कोई निराश्रित, बीमार या घायल गौवंश नजर आते ही स्थानीय लोग तुरंत इन युवाओं को सूचित करते हैं। सूचना मिलते ही टीम बिना देर किए मौके पर पहुंचकर प्राथमिक उपचार शुरू कर देती है। इस तत्परता से कई गौवंश की जान बचाई जा चुकी है और लोगों का भरोसा लगातार बढ़ रहा है।
विशेष देखभाल और पोषण की व्यवस्था
गंभीर रूप से घायल या बीमार गौवंश को जरूरत पड़ने पर चिकित्सालय लाकर उपचार दिया जाता है। सेवा का दायरा बढ़ने के साथ यहां उपचाराधीन गायों की संख्या भी बढ़ रही है और वर्तमान में दो दर्जन से अधिक गौवंश उपचार के अधीन हैं। सर्दी के मौसम में बीमार गायों की देखभाल में अतिरिक्त कठिनाइयां आती हैं, फिर भी युवा पूरी निष्ठा से जुटे रहते हैं। यहां केवल इलाज ही नहीं, बल्कि गौवंश को पोषणयुक्त आहार और जरूरी सभी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाती हैं।
दान की जमीन पर मिला स्थायी ठिकाना
नि:शुल्क गौ चिकित्सालय की शुरुआत किराए की जमीन पर हुई थी। कुछ समय तक सेवा सुचारू चलती रही, लेकिन जब जमीन मालिक ने किराए की अवधि बढ़ाने से इनकार कर दिया तो संचालन पर संकट खड़ा हो गया। ऐसे कठिन समय में लोकेश निर्माण ने आगे बढ़कर अपनी निजी भूमि गौ चिकित्सालय के लिए दान कर दी। इससे सेवा कार्य को नई दिशा मिली और अब चिकित्सालय स्थायी रूप से उसी भूमि पर चल रहा है, जिससे निराश्रित गौवंश के उपचार और देखभाल में निरंतरता बनी हुई है।
20 किलोमीटर तक पहुंचती है टीम
गौ रक्षा दल के लोकेश सिंह निर्माण ने बताया कि दल के सदस्य करीब 20 किलोमीटर के दायरे में पहुंचकर घायल और बीमार गौवंश का इलाज करते हैं। उन्होंने बताया कि अब तक 700 से ज्यादा गायों और नंदियों को विभिन्न बीमारियों में उचित उपचार देकर स्वस्थ किया जा चुका है, और इस समय दर्जनों गौवंश चिकित्सालय में उपचाराधीन हैं। बीमार गोवंश के लिए चारा, दवाएं और अन्य जरूरी सामान दल के सदस्य अपने जेब खर्च और आपसी सहयोग से जुटाते हैं।
जन्मदिन भी गौसेवा के नाम
लोकेश सिंह निर्माण के अनुसार नि:शुल्क गौ चिकित्सालय में सेवा के अलावा दल के सदस्य गौशालाओं में जाकर भी गायों की सेवा करते हैं। दल के सदस्य अपना जन्मदिन केक काटकर मनाने के बजाय गौशालाओं में गायों की सेवा करते हुए बिताते हैं। इस शुभ अवसर पर गायों को हरा चारा और गुड़ खिलाया जाता है और सदस्य स्वेच्छा से कुछ राशि भी गौ चिकित्सालय में दान करते हैं।
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