इस्लामपुर बनाम श्रीरामपुर : नाम बदलने पर क्यों गहराया विवाद, 16वीं सदी में बसा था यह गांव राजस्थान एक महीने पहले 20
इस्लामपुर का नाम बदलने का मामला अब प्रशासनिक जांच के अहम पड़ाव पर पहुंच गया है। जिला कलेक्टर की रिपोर्ट के आधार पर राज्य सरकार अंतिम फैसला ले सकती है, जबकि दोनों पक्ष अपने-अपने तर्कों के साथ दबाव बना रहे हैं।

इस्लामपुर गांव का नाम बदलने को लेकर चल रहा विवाद अब केवल स्थानीय बहस तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह प्रशासनिक जांच के एक निर्णायक चरण में प्रवेश कर चुका है। एक ओर जहां गांव का नाम बदले जाने का समर्थन करने वाला पक्ष लगातार सक्रिय है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण और संघर्ष समिति इसका कड़ा विरोध कर रहे हैं।

प्रशासनिक जांच किस मोड़ पर

फिलहाल पूरा मामला जिला कलेक्टर के पास है। पुराने राजस्व रिकॉर्ड, सरकारी दस्तावेजों और ग्रामीणों की ओर से पेश किए गए दावों की बारीकी से पड़ताल की जा रही है। इस जांच के पूरा होने के बाद एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर राज्य सरकार को सौंपी जाएगी।

माना जा रहा है कि सरकार इसी रिपोर्ट को आधार बनाकर अंतिम निर्णय लेगी। यही वजह है कि दोनों पक्षों की नजरें अब इस रिपोर्ट और उसमें दर्ज तथ्यों पर टिकी हुई हैं।

विरोध करने वालों का रुख

ग्रामीणों और संघर्ष समिति ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आंदोलन को और बड़ा रूप दिया जाएगा। उनका कहना है कि यह सिर्फ एक नाम का सवाल नहीं, बल्कि गांव की पहचान और इतिहास से जुड़ा मुद्दा है।

आंदोलन को तेज करने के लिए कई विकल्पों पर विचार किया जा रहा है, जिनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:

  • बेमियादी धरना
  • महापंचायत का आयोजन
  • जिला स्तर पर बड़े पैमाने पर प्रदर्शन

नाम परिवर्तन के समर्थक भी सक्रिय

दूसरी तरफ, नाम बदले जाने के पक्ष में खड़े लोग भी पीछे नहीं हैं। यह पक्ष अपने तर्कों के साथ सरकार पर लगातार दबाव बनाए हुए है और चाहता है कि उसकी मांग को प्राथमिकता दी जाए। इस तरह मामले में दोनों ओर से रस्साकशी जारी है।

16वीं सदी से जुड़ा इतिहास

इस पूरे विवाद का एक अहम पहलू इस्लामपुर गांव का इतिहास भी है। बताया जाता है कि इस गांव की स्थापना 16वीं सदी में हुई थी। यही ऐतिहासिक पृष्ठभूमि अब नाम बदलने की मांग और उसके विरोध, दोनों के लिए तर्कों का आधार बन रही है।

अब सबकी निगाहें प्रशासनिक रिपोर्ट और उसके बाद राज्य सरकार के संभावित फैसले पर लगी हैं, जो इस विवाद की दिशा तय करेगा।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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