जशपुर की नई पहचान बनेगी हर्बल ब्लैक टी, स्वाद के साथ सेहत को भी मिलेंगे अनोखे फायदे छत्तीसगढ़ 2 महीने पहले 108
छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के सारुडीह चाय बागान में हर्बल ब्लैक टी ऑर्थोडॉक्स का नया प्रयोग किया जा रहा है, जो वजन घटाने और कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित करने में बेहद लाभकारी है।

छत्तीसगढ़ का प्राकृतिक खूबसूरती से भरपूर जशपुर जिला अब केवल अपनी वादियों के लिए ही नहीं, बल्कि चाय के अपने अनोखे स्वाद और बेहतरीन गुणवत्ता के लिए भी एक नई पहचान बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। जिले के सारुडीह में स्थित चाय बागान में इन दिनों चाय की एक नई और बेहद खास किस्म तैयार की जा रही है। इस नई वैरायटी का नाम हर्बल ब्लैक टी ऑर्थोडॉक्स है। यह चाय अपने लाजवाब स्वाद के साथ-साथ कई तरह के स्वास्थ्यवर्धक गुणों से भरपूर है, जिसके कारण यह लोगों का ध्यान अपनी ओर तेजी से आकर्षित कर रही है।

स्वाद के साथ सेहत का बेहतरीन मेल

सारुडीह चाय बागान में तैयार की जा रही इस विशेष हर्बल ब्लैक टी ऑर्थोडॉक्स को फिलहाल शुरुआती तौर पर एक प्रयोग या परीक्षण के रूप में बनाया जा रहा है। शुरुआती अध्ययनों और विशेषज्ञों के अनुसार, इस चाय का नियमित सेवन सेहत के लिए बहुत ही गुणकारी साबित हो सकता है। इसे मुख्य रूप से निम्नलिखित स्वास्थ्य लाभों के लिए बेहद उपयोगी माना जा रहा है:

  • वजन नियंत्रित करने में सहायक: यह विशेष हर्बल ब्लैक टी शरीर के बढ़ते वजन को नियंत्रित करने और अतिरिक्त चर्बी को कम करने में मददगार साबित हो सकती है।
  • कोलेस्ट्रॉल पर नियंत्रण: हृदय को स्वस्थ रखने और शरीर में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को संतुलित बनाए रखने में यह काफी लाभकारी मानी जा रही है।
  • त्वचा की चमक बढ़ाना: इसमें मौजूद प्राकृतिक तत्व और एंटी ऑक्सीडेंट त्वचा की चमक को बढ़ाने और उसे स्वस्थ रखने में मदद करते हैं।

इन तमाम औषधीय गुणों के कारण ही इस चाय की लोकप्रियता शुरुआती परीक्षण के दौरान ही काफी बढ़ने लगी है और चाय प्रेमी इसके प्रति अपनी गहरी रुचि दिखा रहे हैं।

पारंपरिक मेहनत और आधुनिक प्रोसेसिंग का संगम

इस अनूठी हर्बल चाय को तैयार करने के पीछे स्थानीय कामगारों की कड़ी मेहनत और आधुनिक वैज्ञानिक तकनीक का एक शानदार संयोजन है। चाय तैयार करने की इस प्रक्रिया की शुरुआत चाय बागान से कोमल और ताजी पत्तियों को बेहद सावधानी से चुनने और तोड़ने के साथ होती है। पत्तियों की तोड़ाई के बाद का काम पूरी तरह से पारंपरिक और मानवीय कौशल पर निर्भर करता है।

इन तोड़ी गई कोमल पत्तियों को पहले स्थानीय श्रमिकों द्वारा अपने हाथों से अच्छी तरह से मसला जाता है, जिसे स्थानीय स्तर पर मिसाई की प्रक्रिया कहा जाता है। इसके बाद, आधुनिक मशीनों की सहायता से वैज्ञानिक और सुरक्षित तरीके से इसकी प्रोसेसिंग पूरी की जाती है। इस पूरी प्रक्रिया को विशेषज्ञों की देखरेख में संपन्न किया जाता है ताकि चाय की पत्तियों के प्राकृतिक गुण, स्वाद और उनकी खुशबू पूरी तरह से सुरक्षित रहें और उपभोक्ताओं तक सर्वोत्तम उत्पाद पहुंच सके।

पर्यटन के नए हॉटस्पॉट के रूप में उभर रहा सारुडीह

जशपुर का सारुडीह चाय बागान अब केवल चाय की खेती या उत्पादन तक ही सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह धीरे-धीरे छत्तीसगढ़ के एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में अपनी धाक जमा रहा है। छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों के अलावा पड़ोसी राज्यों जैसे झारखंड और ओडिशा से भी बहुत बड़ी संख्या में पर्यटक हर दिन इस खूबसूरत चाय बागान का दीदार करने के लिए यहां पहुंच रहे हैं।

बागान घूमने आने वाले सैलानियों का कहना है कि पहले चाय के बागानों की हरियाली और उनके खूबसूरत दृश्यों का आनंद लेने के लिए उन्हें असम या दार्जिलिंग जैसे सुदूर पहाड़ी राज्यों का रुख करना पड़ता था। लेकिन अब उनके बेहद करीब, जशपुर की हसीन वादियों में चाय की इतनी सुंदर खेती देखना उनके लिए बेहद सुखद अनुभव है। इस वजह से जशपुर की खूबसूरती को अब एक नया आयाम मिल रहा है।

चार पुरानी किस्मों के बाद अब नई वैरायटी का बड़ा धमाका

चाय बागान के कामकाज और इसके इतिहास से जुड़ी स्थानीय कर्मी मधु तिर्की ने इस संबंध में विस्तार से जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि इस बागान में पिछले कई वर्षों से चाय की खेती का काम पूरी लगन के साथ किया जा रहा है। वर्तमान समय में इस बागान से मुख्य रूप से चार अलग-अलग श्रेणियों और स्वाद की चाय तैयार की जाती है, जिनकी बाजार में अच्छी मांग है।

मधु तिर्की ने आगे बताया कि बागान के इतिहास में यह पहला अवसर है जब हर्बल ब्लैक टी ऑर्थोडॉक्स जैसी प्रीमियम वैरायटी पर प्रयोग शुरू किया गया है। अभी इसे केवल प्रायोगिक स्तर पर तैयार किया जा रहा है ताकि इसकी गुणवत्ता और लोगों की पसंद को परखा जा सके। यदि यह प्रयोग पूरी तरह से सफल साबित होता है, तो भविष्य में बहुत जल्द इसका बड़े पैमाने पर व्यावसायिक उत्पादन शुरू कर दिया जाएगा, जिससे जशपुर की चाय को देश के कोने-कोने में एक बड़ी और नई पहचान मिल सकेगी।

स्थानीय रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी ताकत

इस नई चाय की पहल को केवल एक नए उत्पाद के लॉन्च के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि यह जशपुर जिले के विकास की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है। हर्बल ब्लैक टी ऑर्थोडॉक्स का व्यावसायिक उत्पादन शुरू होने से न केवल स्थानीय स्तर पर किसानों और मजदूरों को रोजगार के नए और बेहतर अवसर मिलेंगे, बल्कि इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी एक नई मजबूती मिलेगी।

पर्यटन में हो रहे इस इजाफे से स्थानीय परिवहन, छोटे दुकानदारों और होटल व्यवसाय को भी सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। इस तरह यह अनूठा प्रयास जशपुर का नाम देश के प्रमुख चाय उत्पादक क्षेत्रों की सूची में सम्मानजनक ढंग से स्थापित करने की ओर अग्रसर है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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