कुलगाम आतंकी हमला: सक्ती के दीपक रात्रे की मौत से बुंदेली गांव में मातम, परिवार का इकलौता सहारा छीना
छत्तीसगढ़
एक घंटा पहले
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कुलगाम में आतंकवाद का क्रूर चेहरा
जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले में हुए एक वीभत्स आतंकी हमले ने छत्तीसगढ़ के दो परिवारों की खुशियां छीन ली हैं। दक्षिण कश्मीर के केलम इलाके में स्थित एक ईंट-भट्ठे पर काम करने वाले दो मजदूरों को आतंकवादियों ने अपना निशाना बनाया। इस घटना में सक्ती जिले के रहने वाले 24 साल के दीपक रात्रे की दर्दनाक मौत हो गई। उनकी मृत्यु की खबर सुनते ही उनके पैतृक गांव बुंदेली में सन्नाटा पसर गया है और पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है।
रोजगार की तलाश में गए थे दूर
छत्तीसगढ़ के गांवों से गरीबी और बेहतर भविष्य की उम्मीद लेकर दीपक रात्रे और भूपेंद्र भैना जम्मू-कश्मीर पहुंचे थे। दोनों युवक ईंट-भट्ठे पर मेहनत-मजदूरी करके अपने परिवार का पेट पालने की कोशिश कर रहे थे। उन्हें क्या पता था कि जिस जगह वे काम की तलाश में गए हैं, वहां उन्हें मौत का सामना करना पड़ेगा। शुक्रवार की देर शाम जब दोनों अपने काम में व्यस्त थे, तब आतंकवादियों ने वहां पहुंचकर कहर बरपाया।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
बुंदेली गांव के रहने वाले दीपक रात्रे अपने घर के इकलौते सहारा थे। उनके चाचा हलधर रात्रे ने बताया कि दीपक करीब सात से आठ महीने पहले ही जम्मू-कश्मीर गए थे। उनके परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद नाजुक है। दीपक की शादी कुछ समय पहले ही हुई थी और उनके परिवार में अब उनकी पत्नी और चार महीने का एक मासूम बेटा है। उनके पिता का निधन पहले ही हो चुका है। अब घर में दीपक की बूढ़ी मां और एक छोटा दिव्यांग भाई है। परिवार के इकलौते कमाने वाले सदस्य के चले जाने से अब ये लोग दाने-दाने को मोहताज हो गए हैं और उनका भविष्य अंधकारमय नजर आ रहा है।
किस तरह दिया गया वारदात को अंजाम
मिली जानकारी के अनुसार, आतंकियों ने बहुत ही बेरहमी से इस हमले को अंजाम दिया। वे ईंट-भट्ठे पर पहुंचे और वहां मौजूद मजदूरों से उनकी पहचान पूछी। इसके तुरंत बाद आतंकियों ने अंधाधुंध गोलियां बरसाना शुरू कर दिया। दीपक रात्रे को बहुत ही करीब से गोली मारी गई, जिससे उनकी मौके पर ही मृत्यु हो गई। इस बर्बर हमले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है।
प्रशासन की ओर से क्या है प्रयास
दीपक रात्रे के चाचा हलधर रात्रे ने बताया कि उन्होंने जिला प्रशासन के अधिकारियों से बातचीत की है। प्रशासन अब दीपक के पार्थिव शरीर को उनके पैतृक गांव बुंदेली वापस लाने के लिए प्रयास कर रहा है, ताकि परिजन अपने रीति-रिवाजों के अनुसार उनका अंतिम संस्कार कर सकें। फिलहाल पूरा गांव और आसपास के लोग दीपक के परिवार के साथ खड़े हैं और इस घटना के प्रति भारी आक्रोश है। मालखरौदा पुलिस थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले इस गांव में हर आंख नम है।
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