3.2 अरब साल पुराना इतिहास: जब पूरी दुनिया डूबी थी, तब झारखंड की यह ज़मीन पानी से बाहर थी झारखंड 2 महीने पहले 89
वैज्ञानिकों के हालिया शोध में झारखंड के सिंहभूम क्षेत्र को पृथ्वी के सबसे पुराने भू-भागों में से एक बताया गया है। माना जाता है कि अरबों साल पहले जब पूरी धरती समुद्र में समाई थी, तब सिंहभूम का हिस्सा पानी से ऊपर उभर चुका था।

पृथ्वी का सबसे प्राचीन हिस्सा

झारखंड का सिंहभूम क्षेत्र केवल खनिज संपदा के लिए ही नहीं, बल्कि अपने गौरवशाली भूवैज्ञानिक इतिहास के लिए भी पूरी दुनिया में जाना जाता है। शोधकर्ताओं के अनुसार, सिंहभूम क्रेटन का इतिहास लगभग 3.2 अरब वर्ष पुराना है। जब पृथ्वी का अधिकांश धरातल विशाल महासागरों के नीचे दबा हुआ था, तब सिंहभूम का भू-भाग समुद्र की सतह से ऊपर उठकर एक ठोस ज़मीन के रूप में अस्तित्व में आ चुका था। यह खोज पृथ्वी की उत्पत्ति और विकास को समझने में वैज्ञानिकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

कैसे हुआ इस ज़मीन का निर्माण

भूवैज्ञानिकों का मानना है कि अरबों वर्ष पहले पृथ्वी के अंदर चल रही निरंतर हलचल और भीषण ज्वालामुखीय गतिविधियों के कारण भारी मात्रा में मैग्मा जमा हुआ था। इसी प्रक्रिया के दौरान यह भू-भाग धीरे-धीरे ऊपर उठता गया और समुद्र से बाहर आ गया। आज सिंहभूम का यह इलाका पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां जिलों में फैला हुआ है। यहां मौजूद प्राचीन चट्टानें, जिनमें ग्रेनाइट, क्वार्ट्जाइट और ग्रीनस्टोन जैसी चट्टानें प्रमुख हैं, पृथ्वी के शुरुआती वातावरण और महाद्वीपों के निर्माण का जीवित प्रमाण हैं।

खनिज संपदा का हब

ऐतिहासिक महत्व के साथ ही सिंहभूम क्षेत्र अपनी बेमिसाल खनिज संपदा के लिए भी प्रसिद्ध है। यहां की जमीन के नीचे लौह अयस्क, तांबा, यूरेनियम, निकल, क्रोमाइट और मैंगनीज जैसे महत्वपूर्ण खनिज प्रचुर मात्रा में मौजूद हैं। नोआमुंडी, गुआ, किरीबुरू और चिरिया जैसी खदानें न केवल झारखंड की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, बल्कि ये देश के प्रमुख औद्योगिक केंद्रों की आपूर्ति भी सुनिश्चित करती हैं। यही कारण है कि जमशेदपुर और इसके आसपास का पूरा इलाका देश के सबसे बड़े औद्योगिक क्षेत्रों में से एक माना जाता है।

शोधकर्ताओं के लिए किसी खजाने से कम नहीं

जानकारों का कहना है कि सिंहभूम की चट्टानें उस समय की गवाह हैं जब पृथ्वी पर जीवन की शुरुआत ही हो रही थी। दुनिया भर के वैज्ञानिक और भू-गर्भ शास्त्री यहाँ की चट्टानों का सूक्ष्म अध्ययन कर रहे हैं ताकि पृथ्वी के शुरुआती विकास के रहस्यों को सुलझाया जा सके। यह क्षेत्र आज न केवल झारखंड के लिए बल्कि पूरी मानव सभ्यता के लिए एक अमूल्य प्राकृतिक धरोहर बन चुका है, जो हमें हमारी धरती के अरबों साल पुराने सफर की कहानी सुनाता है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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