जम्मू-कश्मीर में आधी रात को महसूस किए गए भूकंप के झटके, जानें रिक्टर स्केल पर क्या रही तीव्रता जम्मू-कश्मीर एक महीने पहले 94
रविवार और सोमवार की दरमियानी रात जम्मू-कश्मीर के बारामूला जिले में भूकंप ने दस्तक दी है, वहीं मणिपुर में भी आज सुबह दो बार धरती डोलती हुई महसूस की गई।

बारामूला में महसूस हुई भूकंप की हलचल

रविवार और सोमवार की मध्यरात्रि के दौरान केंद्रशासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में भूकंप के झटके दर्ज किए गए हैं। नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी के अनुसार, यह भूकंपीय घटना बारामूला जिले के आसपास महसूस की गई। देश-दुनिया में इन दिनों भूकंप की वारदातों में इजाफा देखा जा रहा है, जिसने आम लोगों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। बीते कुछ वर्षों में कई देशों में विनाशकारी भूकंपों ने भारी तबाही मचाई है, जिसमें हजारों लोगों ने अपनी जान गंवाई है। भारत के भी विभिन्न हिस्सों से लगातार भूकंप की खबरें सामने आती रही हैं।

भूकंप की तीव्रता और केंद्र की गहराई

नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी से प्राप्त जानकारी के अनुसार, सोमवार तड़के बारामूला में आए इस भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 3.6 मापी गई है। यह झटका रात के करीब 2 बजे महसूस हुआ। विशेषज्ञों ने बताया कि भूकंप का केंद्र जमीन से 10 किलोमीटर की गहराई में स्थित था। गनीमत रही कि इस घटना के बाद अभी तक किसी भी प्रकार के जान-माल के नुकसान या किसी अन्य अनहोनी की जानकारी सामने नहीं आई है। इससे पहले 25 जून को भी जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में भूकंप के झटके आए थे, जिनकी तीव्रता 3.5 दर्ज की गई थी।

मणिपुर में भी कांपी धरती

सिर्फ जम्मू-कश्मीर ही नहीं, बल्कि सोमवार को पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर में भी भूकंप का असर देखने को मिला। नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी ने पुष्टि की है कि आज सुबह मणिपुर में दो बार भूकंप आया। पहला भूकंप सुबह 6 बजकर 32 मिनट पर आया, जिसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 3.9 मापी गई। इस झटके का केंद्र कामजोंग जिले में जमीन के भीतर 80 किलोमीटर की गहराई पर स्थित था। इसके कुछ ही समय बाद, सुबह 7 बजकर 23 मिनट पर दूसरा भूकंप महसूस किया गया। इसकी तीव्रता 3.4 दर्ज की गई और इसका केंद्र तेंगनौपाल जिले में धरती के नीचे 90 किलोमीटर की गहराई पर था।

आखिर क्यों आते हैं भूकंप?

वैज्ञानिक दृष्टि से देखें तो भूकंप आने के पीछे का मुख्य कारण पृथ्वी की सतह के नीचे मौजूद टेक्टोनिक प्लेटों में होने वाली गतिविधियां हैं। ये विशाल प्लेटें आपस में टकराती हैं, रगड़ खाती हैं या फिर अपनी जगह से खिसकती हैं। इस प्रक्रिया के दौरान जमीन के भीतर दबी हुई अत्यधिक ऊर्जा अचानक से बाहर की ओर निकलती है, जिसके कारण पृथ्वी की ऊपरी सतह पर कंपन पैदा होता है। यही वह ऊर्जा है जो धरती को हिला देती है और हम इसे भूकंप के झटकों के रूप में महसूस करते हैं। हालांकि, इन झटकों की तीव्रता इनके केंद्र की गहराई और ऊर्जा के स्तर पर निर्भर करती है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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