राजस्थान
6 घंटे पहले
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विचारों
चुनावी रण में डैमेज कंट्रोल की चुनौती
राजस्थान निकाय चुनावों के लिए आज नाम वापसी का आखिरी दिन है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और कांग्रेस दोनों ही प्रमुख दलों के लिए आज का दिन बेहद महत्वपूर्ण और चुनौतीपूर्ण साबित होने वाला है। टिकट न मिलने से नाराज होकर जिन कार्यकर्ताओं ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में पर्चा दाखिल कर दिया था, उन्हें मनाने के लिए दोनों पार्टियों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है।
नाराज कार्यकर्ताओं को मनाने की कोशिशें तेज
पार्टियों को डर है कि अगर ये बागी उम्मीदवार चुनावी मैदान में डटे रहे, तो वे पार्टी के अधिकृत उम्मीदवारों के वोट बैंक में सेंध लगा सकते हैं। इससे कई वार्डों में जीत-हार का समीकरण पूरी तरह बिगड़ सकता है। इसी चुनावी नुकसान को रोकने के लिए दोनों दलों ने रणनीति बनाई है:
- स्थानीय स्तर के नेताओं और संगठन के पदाधिकारियों को सक्रिय किया गया है।
- नाराज दावेदारों से सीधे बातचीत कर उन्हें मनाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
- पार्टी आलाकमान की कोशिश है कि नाम वापसी की समयसीमा खत्म होने से पहले अधिक से अधिक बागियों को नामांकन वापस लेने के लिए राजी कर लिया जाए।
नाम वापसी के बाद साफ होगी चुनावी तस्वीर
आज नाम वापसी की अवधि समाप्त होने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि किस वार्ड में सीधा मुकाबला होने जा रहा है और कहां मुकाबला त्रिकोणीय या बहुकोणीय होने वाला है। इसके तुरंत बाद प्रत्याशियों को चुनाव चिन्ह आवंटित किए जाएंगे, जिसके साथ ही प्रचार अभियान भी अपनी पूरी रफ्तार पकड़ लेगा।
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