राजस्थान
2 घंटे पहले
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विचारों
जयपुर का चौड़ा रास्ता और चारदीवारी बाजार यूं ही बाजारों का बादशाह नहीं कहलाता। यहां हुनर, खानदानी परंपरा और पुश्तैनी विरासत को लोग पीढ़ी दर पीढ़ी आज भी सहेजकर रखे हुए हैं। यह इलाका सिर्फ हस्तनिर्मित उत्पादों के लिए ही नहीं, बल्कि बदलते वक्त में पुरानी यादों को जिंदा रखने के लिए भी अपनी अलग पहचान रखता है।
डिजिटल दौर में जब महज एक क्लिक पर दुनिया भर का संगीत मोबाइल फोन पर हाजिर है, तब भी गणगौरी बाजार की एक छोटी-सी दुकान पुराने जमाने के संगीत प्रेमियों के बीच खास मुकाम बनाए हुए है। यहां पिछले करीब 60 वर्षों से मोहम्मद अज़ीज़ संगीत की धुनों को ऑडियो कैसेट्स में संजोने का काम कर रहे हैं। टेप रिकॉर्डर और वॉकमैन के दौर की याद दिलाती इस दुकान में आज भी सैकड़ों ऑडियो कैसेट्स का संग्रह मौजूद है।
सत्तर से नब्बे का सुनहरा दौर
इस पुरानी स्टीरियो कैसेट रिकॉर्डिंग दुकान पर पहुंचकर मोहम्मद अज़ीज़ के भांजे से बातचीत हुई। उन्होंने बताया कि 70 से 90 के दशक तक ऑडियो कैसेट्स का जबरदस्त चलन था। लोग अपनी पसंद के गीत रिकॉर्ड करवाने और अपना संगीत संग्रह तैयार कराने के लिए दूर-दूर से यहां आते थे। इसी लोकप्रियता को देखते हुए उनके मामा ने इस काम को अपनाया।
रिकॉर्डिंग और कैसेट्स की विरासत आज भी जिंदा
मोहम्मद अब्दुल ने बताया कि एक समय ऐसा भी था जब लोग अपने पसंदीदा गीतों की रिकॉर्डिंग करवाने के लिए बड़े उत्साह के साथ दुकान पर आते थे। अलग-अलग मशीनों के जरिए विभिन्न प्रकार की कैसेट्स में गीत रिकॉर्ड किए जाते थे। वक्त के साथ डिजिटल तकनीक ने कैसेट्स की जगह ले ली, लेकिन आज भी कुछ लोग ऐसे हैं जो टेप रिकॉर्डर और वॉकमैन पर संगीत सुनना पसंद करते हैं।
50 साल पुराने गीतों की सैकड़ों कैसेट्स
अब्दुल बताते हैं कि उनकी दुकान में आज भी 50 साल पुराने बॉलीवुड गीतों, गजलों और भजनों की सैकड़ों कैसेट्स सुरक्षित रखी हुई हैं। इन्हीं के आधार पर आज भी रिकॉर्डिंग का काम होता है। उनका कहना है कि जयपुर में शायद ही कोई दूसरी ऐसी दुकान बची हो, जहां पुराने दौर के संगीत का इतना बड़ा संग्रह और रिकॉर्डिंग की सुविधा एक साथ मिलती हो। यही वजह है कि लोग आज भी अपनी पसंद का संगीत तलाशते हुए यहां तक पहुंच जाते हैं।
हर वर्ग के लिए संगीत का खजाना
अब्दुल के अनुसार उनकी दुकान पर हर वर्ग के लोगों के लिए पुराने और लोकप्रिय गीतों का बड़ा संग्रह मौजूद है। लोग यहां आकर गीतों की सूची देखते हैं और अपनी पसंद के गानों की रिकॉर्डिंग करवाते हैं। रिकॉर्डिंग के अलावा नई और पुरानी कैसेट्स भी यहां उपलब्ध रहती हैं। पुराने संगीत के शौकीन आज भी मोहम्मद रफी, किशोर कुमार, लता मंगेशकर और कुमार सानू जैसे दिग्गज गायकों के गीतों वाली कैसेट्स खरीदने के लिए यहां आते हैं। उनका मानना है कि जयपुर में संभवतः यह अपनी तरह की इकलौती दुकान है, जहां पुराने संगीत की यह परंपरा अब भी सांस ले रही है।
जब दो रुपये में होती थी रिकॉर्डिंग
अब्दुल याद करते हैं कि 70 के दशक में जब लोग गीत रिकॉर्ड करवाने आते थे, तब एक या दो रुपये में रिकॉर्डिंग हो जाया करती थी। समय के साथ तकनीक और दौर दोनों बदल गए, लेकिन उनका यह सफर अब भी जारी है। अब एक कैसेट की रिकॉर्डिंग के लिए करीब 100 रुपये लिए जाते हैं, फिर भी पुराने संगीत के प्रति लोगों का प्रेम आज भी पहले जैसा ही बना हुआ है।
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