जयपुर में वीआईपी मूवमेंट के दौरान पुलिस की संवेदनहीनता, खौलते पानी से झुलसी मासूम राजस्थान 2 महीने पहले 75
जयपुर के जगतपुरा इलाके में वीआईपी काफिले के लिए रास्ता साफ करवाने की जल्दबाजी में पुलिस ने एक मोमोज के ठेले को धक्का दे दिया, जिससे उबलता पानी एक युवती पर गिर गया और वह गंभीर रूप से घायल हो गई।

जयपुर के जगतपुरा में पुलिस की संवेदनहीनता

जयपुर के जगतपुरा क्षेत्र में पुलिस की एक ऐसी लापरवाही सामने आई है जिसने पूरे प्रशासन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां वीआईपी मूवमेंट के नाम पर पुलिस ने एक गरीब परिवार की रोजी रोटी के साधन को ही तहस नहस कर दिया। पीड़ित परिवार की बड़ी बहन खुशबू गुप्ता ने अपनी आपबीती साझा करते हुए बताया कि किस तरह पुलिस के एक असंवेदनशील फैसले ने उनकी छोटी बहन रेशु की जिंदगी को खतरे में डाल दिया। इस घटना के बाद परिवार गहरे सदमे में है।

घटना वाली शाम का आंखों देखा हाल

खुशबू ने बताया कि वह घटना वाले दिन, यानी 27 जून 2026 को शाम करीब पौने सात बजे जगतपुरा महल रोड पर अक्षय पात्र के पास अपने मोमोज के ठेले पर काम कर रही थी। उस समय काफी ग्राहक वहां मौजूद थे। तभी अचानक हूटर बजाती हुई पुलिस की गाड़ियां वहां पहुंचीं। पुलिसकर्मियों ने शोर मचाते हुए रास्ता खाली करने का फरमान सुना दिया, क्योंकि वहां से मुख्यमंत्री का काफिला गुजरने वाला था।

खुशबू ने पुलिस से गिड़गिड़ाते हुए कहा कि मोमोज पकाने वाले बर्तन में पानी खौल रहा है, इसे उतारने के लिए थोड़ा समय दिया जाए ताकि कोई दुर्घटना न हो। लेकिन पुलिस ने उनकी एक न सुनी। खुशबू के अनुसार, खाकी के रौब के आगे उन्होंने किसी की परवाह नहीं की और ठेले को जबरन धक्का दे दिया।

रेशु कैसे झुलसी खौलते पानी से

पुलिस के धक्का देते ही ठेला पूरी तरह असंतुलित हो गया और उस पर रखा खौलता हुआ पानी सीधे रेशु के ऊपर जा गिरा। अपनी बहन को तड़पते हुए देखकर खुशबू पूरी तरह टूट गई। रेशु के शरीर का ऊपरी हिस्सा, जिसमें हाथ, छाती, पेट और जांघ का हिस्सा शामिल है, पूरी तरह बुरी तरह से झुलस गया है। रेशु की चीखें वहां मौजूद हर किसी को दहलाने वाली थीं, लेकिन हैरान करने वाली बात यह थी कि वीआईपी सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों के चेहरे पर कोई पछतावा या मदद की भावना नहीं थी। वे अपनी ड्यूटी में ही मग्न रहे।

परिवार के संघर्ष की कहानी

खुशबू ने आगे बताया कि उनका परिवार बेहद कठिन दौर से गुजर रहा है। वर्ष 2020 में कोरोना महामारी के दौरान उन्होंने अपने पिता को खो दिया था, जिससे परिवार की आर्थिक स्थिति पूरी तरह चरमरा गई थी। साल 2022 में जब खुशबू का चयन जयपुर के एक कॉलेज में फिजियोथैरेपी कोर्स के लिए हुआ, तो उन्होंने अपनी मां और छोटी बहन रेशु के साथ शहर में शिफ्ट होने का फैसला किया। प्रताप नगर में एक कमरा किराए पर लेकर वे रहने लगीं, लेकिन पढ़ाई का खर्च उठाना मुश्किल था। अपनी पढ़ाई और घर के गुजारे के लिए ही दोनों बहनों ने यह मोमोज का ठेला शुरू किया था। रात 10 बजे तक मेहनत करके जो कमाई होती थी, उसी से वे अपना जीवन चला रही थीं।

पुलिस कार्रवाई और सवाल

इस दिल दहला देने वाली घटना के बाद खुशबू ने रामनगरिया थाने में पुलिस की इस बर्बरता के खिलाफ आधिकारिक रिपोर्ट दर्ज कराई है। अब पुलिस मामले की जांच करने और सीसीटीवी फुटेज खंगालने की बात कह रही है। पीड़ित परिवार का सवाल सीधा है कि क्या वीआईपी सुरक्षा का मतलब आम नागरिक की जान से खेलना है। जिस मेहनत से वे अपना भविष्य बनाने की कोशिश कर रही थीं, उस सपने को पुलिस ने एक पल की जल्दबाजी में चकनाचूर कर दिया है। अब परिवार न्याय की राह देख रहा है और रेशु के इलाज के लिए संघर्ष कर रहा है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

आपकी प्रतिक्रिया?

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!

फेसबुक वार्तालाप