बिहार में दिखा अनोखा चमत्कार: थाईलैंड का 4 किलो वजनी आम, एक फल से भर जाएगा पूरे परिवार का पेट बिहार एक घंटा पहले 4
जहानाबाद के एक किसान ने थाईलैंड की खास '4KG मैंगो' प्रजाति का पौधा लाकर सबको हैरान कर दिया है। इस किस्म के एक आम का वजन करीब 4 किलोग्राम तक होता है, जो आकार में कटहल जैसा दिखता है।

आम की दुनिया का नया आकर्षण

भारत का राष्ट्रीय फल आम है और इसका स्वाद हर किसी को पसंद आता है। हालांकि आम का सीजन बीत चुका है, लेकिन बागवानी के शौकीन लोग जानते हैं कि मानसून का समय पौधों को रोपने के लिए सबसे उपयुक्त होता है। विशेषज्ञ भी मानते हैं कि बारिश के दौरान लगाए गए पौधों के जीवित रहने की संभावना काफी बढ़ जाती है। आमतौर पर लोग जर्दालु या दीघा मालदा जैसे आमों की मिठास के दीवाने होते हैं, लेकिन अब बाजार में एक ऐसी वैरायटी की चर्चा है जिसे जानकर आप हैरान रह जाएंगे। यह है थाईलैंड का 4 किलो वजनी आम।

जहानाबाद में अनोखी दस्तक

बिहार के जहानाबाद जिले में कनौदी के पास स्थित एक निजी नर्सरी ने इस अनोखे आम के जरिए लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। इस नर्सरी के मालिक सत्येंद्र नारायण सिंह हैं, जो समय-समय पर बागवानी जगत में कुछ नया करने के लिए जाने जाते हैं। इस बार वे थाईलैंड से '4KG मैंगो' नामक प्रजाति का पौधा लेकर आए हैं। इस आम का नाम सुनकर ही मन में सवाल आता है कि क्या सच में एक आम 4 किलो का हो सकता है।

4 किलो के आम की खासियत

सत्येंद्र नारायण सिंह ने पुष्टि की है कि यह वास्तव में 4 किलो वजन वाला आम ही है। इसे विशेष रूप से बाहर से मंगवाया गया है। इस प्रजाति की सबसे बड़ी विशेषता इसका वजन है। इस आम के एक फल का वजन सामान्यतः 3.5 से 4 किलोग्राम तक पहुंच जाता है। आकार में यह आम किसी छोटे कटहल जैसा नजर आता है। यही कारण है कि यह दुर्लभ और विदेशी किस्म अब स्थानीय लोगों के बीच भी काफी लोकप्रिय हो रही है। जहानाबाद की इस नर्सरी से कई ग्राहक इस पौधे को अपने घर ले जा चुके हैं और उन्हें इस विदेशी प्रजाति के प्रति काफी उत्साह देखने को मिल रहा है।

10 साल का अनुभव और पर्यावरण के प्रति प्रेम

सत्येंद्र नारायण सिंह पिछले 10 वर्षों से नर्सरी के व्यवसाय से जुड़े हुए हैं। उनके पास फलों और फूलों की तमाम ऐसी प्रजातियां मौजूद हैं जो आमतौर पर हर जगह देखने को नहीं मिलतीं। उनका मानना है कि कुछ अलग करने की चाहत ने ही उन्हें इस व्यवसाय की ओर प्रेरित किया। पौधों के व्यापार के साथ-साथ उनका मुख्य उद्देश्य पर्यावरण को हरा-भरा बनाना भी है। वह चाहते हैं कि बिहार का वातावरण स्वच्छ और हरियाली से पूर्ण रहे।

दुर्लभ पौधों के शौकीनों के लिए मौका

अपनी नर्सरी को खास बनाने के लिए सत्येंद्र अक्सर बाहर से ऐसे पौधे मंगवाते हैं जो बहुत कम लोगों के पास उपलब्ध होते हैं। इसी कड़ी में थाई 4KG मैंगो किस्म को शामिल करना उनके लिए एक बड़ी उपलब्धि की तरह है। जो लोग बागवानी के प्रति गंभीर हैं और अपने बगीचे में दुर्लभ प्रजातियां लगाना पसंद करते हैं, उनके लिए यह किस्म एक बेहतरीन विकल्प साबित हो रही है। सत्येंद्र का यह प्रयास न केवल कृषि के क्षेत्र में नई संभावनाओं को जन्म दे रहा है, बल्कि आम लोगों के बीच फलों की नई वैरायटी को लेकर जागरूकता भी पैदा कर रहा है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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