बिहार
एक महीने पहले
54
विचारों
खेती का बदलता स्वरूप
कृषि क्षेत्र में लगातार बदलाव आ रहे हैं और अब किसान पारंपरिक धान-गेहूं की खेती से आगे बढ़कर नकदी फसलों की ओर रुख कर रहे हैं। कम लागत और सीमित समय में ज्यादा मुनाफा देने वाली फसलों का चयन अब किसानों की प्राथमिकता बन गया है। इसी दिशा में कदम बढ़ाते हुए बिहार के किसान अंजनी सिन्हा ने एक अनूठी पहल की है। पटना जिले के पुनपुन प्रखंड में वे लगभग डेढ़ एकड़ जमीन पर विभिन्न प्रकार के फलों की बागवानी कर रहे हैं, जिसमें कटहल की खेती उनके लिए आय का एक बड़ा जरिया बनकर उभरी है।
कम मेहनत और अधिक लाभ का गणित
अंजनी सिन्हा ने अपने बाग में 60 कटहल के पेड़ लगाए थे, जिनमें से वर्तमान में 55 पेड़ पूरी तरह सुरक्षित हैं और फल दे रहे हैं। इन पेड़ों की आयु अभी लगभग डेढ़ साल है और इनसे फल प्राप्त करना भी शुरू हो गया है। किसान का मानना है कि कटहल की खेती में अन्य फसलों की तुलना में बहुत कम मेहनत और देखरेख की आवश्यकता होती है। धान या गेहूं की तरह इसमें बार-बार निराई-गुड़ाई, खाद और पानी देने का झंझट नहीं रहता। केवल शुरुआती दौर में पेड़ों की देखभाल करना जरूरी होता है, उसके बाद यह फसल लंबे समय तक बिना किसी विशेष खर्च के अच्छा रिटर्न देती है।
सर्दियों में बढ़ती है मांग
इन पेड़ों की विशेषता बताते हुए अंजनी सिन्हा कहते हैं कि वे वियतनामी अर्ली सुपर प्रजाति के कटहल उगाते हैं, जो अपने बेहतरीन स्वाद के लिए जाने जाते हैं। आम तौर पर कटहल का उपयोग सब्जी बनाने में किया जाता है। इन पेड़ों में साल में दो बार फल लगते हैं, एक गर्मी के मौसम में और दूसरा सर्दियों के दौरान। हालांकि, अंजनी गर्मी के सीजन में फसल नहीं तोड़ते। इसके पीछे का मुख्य कारण बाजार भाव है। गर्मियों में कटहल की पर्याप्त आवक होने के कारण इसकी कीमत बहुत कम रहती है। इसके विपरीत, सर्दियों के समय बाजार में कटहल की भारी कमी रहती है, जिसके चलते इसका भाव 150 रुपये प्रति किलो तक पहुंच जाता है। यही कारण है कि वे केवल एक सीजन में कटहल बेचकर अपना मुनाफा कई गुना बढ़ा लेते हैं।
परंपरागत खेती से अलग हटकर
अंजनी सिन्हा पिछले 5 वर्षों से सक्रिय रूप से कृषि कार्यों से जुड़े हुए हैं। केवल कटहल ही नहीं, बल्कि वे सीजन के अनुसार अमरूद और केले जैसी अन्य फलों की खेती भी करते हैं। उन्होंने खेती की शुरुआत ही इस उद्देश्य से की थी कि पारंपरिक फसलों के बजाय ऐसी प्रजातियों को लगाया जाए जो कम समय में ज्यादा आमदनी दे सकें। उनका मानना है कि अभी बागवानी का यह कार्य अपने शुरुआती चरण में है, इसलिए लाभ का पूरा असर दिखने में समय लगेगा। हालांकि, उन्हें पूरा विश्वास है कि आने वाले समय में उनकी यह मेहनत और तकनीक उन्हें बेहतर आर्थिक स्थिति में ले जाएगी। अन्य किसान भी यदि कम लागत में अपनी आय बढ़ाना चाहते हैं, तो वे फल आधारित बागवानी को अपनाकर बेहतर भविष्य बना सकते हैं।
Comments
0 comment