मध्य प्रदेश
6 दिन पहले
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भीषण गर्मी और चिपचिपी उमस से जूझ रहे मध्य प्रदेश के लोगों के लिए अच्छी खबर है। दक्षिण-पश्चिम मानसून अब प्रदेश की सीमा तक पहुंचने की तैयारी में जुट गया है। मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार मानसून ने केरल, गोवा और महाराष्ट्र में तेज रफ्तार से प्रगति की है और अब उसका अगला पड़ाव मध्य प्रदेश ही है।
पहले अनुमान लगाया जा रहा था कि मानसून करीब 20 जून के आसपास प्रदेश में दाखिल होगा, लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए अब उसके अपने तय समय यानी 15 जून के आसपास ही मध्य प्रदेश पहुंचने की संभावना मजबूत हो गई है। यदि मौसमी परिस्थितियां अनुकूल बनी रहीं तो आने वाले कुछ दिनों में प्रदेश के दक्षिणी और पूर्वी जिलों में मानसूनी हलचल शुरू हो सकती है।
चरणबद्ध तरीके से होगा प्रवेश
मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक इस बार मानसून का आगमन चरणों में होगा। सबसे पहले बालाघाट, मंडला, सिवनी, दिंडोरी, अनूपपुर, बुरहानपुर और बैतूल जैसे दक्षिणी एवं पूर्वी जिले पहली मानसूनी बौछार महसूस करेंगे। इसके बाद मानसून भोपाल, इंदौर, नर्मदापुरम और आसपास के मध्य क्षेत्रों की ओर बढ़ेगा। ग्वालियर-चंबल अंचल तक इसकी पहुंच अपेक्षाकृत देर से होने का अनुमान है।
विशेषज्ञों का कहना है कि प्रदेश में दाखिल होने के बाद मानसून कुछ दिनों तक सक्रिय बना रह सकता है, जिससे कई जिलों में अच्छी बारिश दर्ज होने की उम्मीद है।
महाराष्ट्र पहुंच चुका है मानसून
भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मानसून 4 जून को केरल पहुंचा और इसके बाद तेजी से आगे बढ़ते हुए 6 जून को महाराष्ट्र में प्रवेश कर गया। फिलहाल मानसून की उत्तरी सीमा महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु के हिस्सों से होकर गुजर रही है। अगले दो से तीन दिनों में इसके और आगे बढ़ने के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनी हुई हैं।
प्रदेश में सबसे पहले कहां बरसेंगे बादल
मौसम विभाग का अनुमान है कि मानसून सबसे पहले प्रदेश के दक्षिणी और पूर्वी हिस्सों में दस्तक देगा। बालाघाट, मंडला, सिवनी, दिंडोरी, अनूपपुर, बुरहानपुर और बैतूल में शुरुआती मानसूनी बारिश देखने को मिल सकती है। इसके बाद जबलपुर संभाग के जिलों में बादलों की सक्रियता बढ़ेगी।
भोपाल और इंदौर को कब मिलेगी राहत
दक्षिणी जिलों के बाद मानसून भोपाल, इंदौर, सीहोर, रायसेन, राजगढ़, देवास और उज्जैन क्षेत्र की ओर बढ़ेगा। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि 15 जून के बाद इन इलाकों में लगातार बारिश का सिलसिला शुरू हो सकता है। इससे तापमान में गिरावट आएगी और लोगों को गर्मी से राहत मिलेगी।
ग्वालियर-चंबल में थोड़ा इंतजार
ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया और शिवपुरी जैसे जिलों में मानसून की एंट्री तुलनात्मक रूप से देर से होने की संभावना है। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक प्रदेश के उत्तरी हिस्सों तक पहुंचने में मानसून को कुछ अतिरिक्त दिन लग सकते हैं।
किसानों के लिए राहत भरी खबर
मानसून के समय पर पहुंचने से खरीफ फसलों की बुवाई को रफ्तार मिलेगी। सोयाबीन, मक्का, धान और कपास की खेती करने वाले किसानों को इसका सीधा फायदा होगा। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि अगर शुरुआती बारिश अच्छी रही तो इस बार उत्पादन बेहतर रहने की संभावना है।
मौसम विभाग के अनुसार 12 से 18 जून के बीच मध्य भारत में वर्षा गतिविधियां बढ़ सकती हैं, वहीं 19 से 25 जून के दौरान कई इलाकों में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज होने के आसार हैं। यही अवधि प्रदेश के जलाशयों और कृषि क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
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