निर्मला सप्रे की सदस्यता पर कांग्रेस को हाईकोर्ट से झटका, अब विधानसभा अध्यक्ष के पाले में गेंद मध्य प्रदेश 2 महीने पहले 81
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बीना विधायक निर्मला सप्रे की विधानसभा सदस्यता समाप्त करने संबंधी कांग्रेस की याचिका को खारिज कर दिया है, जिसके बाद अब फैसला विधानसभा अध्यक्ष के स्तर पर ही लिया जाएगा।

हाईकोर्ट से कांग्रेस को बड़ा झटका

मध्य प्रदेश में कांग्रेस को उस समय बड़ा झटका लगा जब हाईकोर्ट ने बीना से विधायक निर्मला सप्रे की सदस्यता रद्द करने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार की ओर से दायर इस याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने साफ कर दिया कि फिलहाल इस मामले में अदालत का हस्तक्षेप उचित नहीं है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि मामला विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष विचाराधीन है और कार्यवाही नियमानुसार चल रही है।

क्या है पूरा मामला

साल 2023 के विधानसभा चुनाव में निर्मला सप्रे ने कांग्रेस के टिकट पर जीत दर्ज की थी। हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले मई के महीने में वे मुख्यमंत्री मोहन यादव के मंच पर दिखाई दीं, जिससे उनके भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने की अटकलें शुरू हो गईं। इन घटनाक्रमों के बाद उमंग सिंघार ने संविधान की दसवीं अनुसूची का हवाला देते हुए उनकी सदस्यता समाप्त करने की मांग को लेकर विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष याचिका लगाई थी। जब वहां से त्वरित निर्णय नहीं आया, तो कांग्रेस ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

कोर्ट ने क्यों खारिज की याचिका

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर गौर किया:

  • सबूतों का अभाव: अदालत ने माना कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई पुख्ता दस्तावेज मौजूद नहीं है, जो यह साबित कर सके कि निर्मला सप्रे को कांग्रेस से निष्कासित किया गया है या उन्हें औपचारिक रूप से भाजपा की सदस्यता दी गई है।
  • अध्यक्ष के अधिकार: कोर्ट ने कहा कि अयोग्यता याचिका पर कार्यवाही जारी है और कोर्ट अध्यक्ष को कोई निश्चित समय सीमा के भीतर निर्णय लेने का आदेश देने की स्थिति में नहीं है।
  • हस्तक्षेप से इनकार: राज्य सरकार और विधानसभा अध्यक्ष के पक्ष ने तर्क दिया कि पूरी प्रक्रिया नियमों के तहत चल रही है, जिसे कोर्ट ने स्वीकार करते हुए मामले में दखल देने से इनकार कर दिया।

विधायक का रुख

सुनवाई के दौरान निर्मला सप्रे की तरफ से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता संजय अग्रवाल ने दोहराया कि विधायक ने न तो कांग्रेस का साथ छोड़ा है और न ही उन्होंने भाजपा की सदस्यता ग्रहण की है। अब इस पूरे विवाद पर अंतिम निर्णय का अधिकार पूरी तरह से विधानसभा अध्यक्ष के पास सुरक्षित है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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