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एक घंटा पहले
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नेतन्याहू के लिए ट्रंप का समर्थन बना टर्निंग पॉइंट
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को एक बड़ा राजनीतिक दावा पेश किया है। उन्होंने कहा कि इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की राजनीतिक तकदीर बदलने में उनका समर्थन निर्णायक साबित हुआ है। ट्रंप के अनुसार, नेतन्याहू की जिस संभावित हार को लगभग तय माना जा रहा था, उनके समर्थन के बाद स्थिति पूरी तरह से बदल गई है और अब नेतन्याहू मुकाबले में बराबरी पर आ गए हैं या फिर उनकी जीत की प्रबल संभावना बन गई है।
ट्रंप ने अपने नाम से जारी एक आधिकारिक पोस्ट में स्पष्ट किया कि जब उन्होंने 'बीबी' यानी बेंजामिन नेतन्याहू का समर्थन किया, तो पूरे चुनावी परिदृश्य में बदलाव आ गया। ट्रंप ने इस दावे के साथ कहा कि एक शानदार प्रधानमंत्री की हार की ओर बढ़ती स्थिति अब वापसी की ओर मुड़ गई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनका एकमात्र उद्देश्य मध्य पूर्व, इजराइल और संयुक्त राज्य अमेरिका का कल्याण सुनिश्चित करना है।
एग्जिट पोल में कड़ी टक्कर के संकेत
ट्रंप का यह बयान ऐसे नाजुक समय में आया है जब मंगलवार को हुए मतदान के बाद सामने आए एग्जिट पोल इजराइल में किसी भी दल के लिए स्पष्ट बहुमत की राह कठिन दिखा रहे हैं। नेतन्याहू के नेतृत्व वाले 'लिकुड' गठबंधन और उनके विरोधी गादी आइसेनकोट के गठबंधन के बीच कांटे की टक्कर देखी जा रही है। इजराइल की 120 सीटों वाली संसद, जिसे 'नेसेट' कहा जाता है, उसमें सरकार बनाने के लिए न्यूनतम 61 सीटों का जादुई आंकड़ा जरूरी है, जिसे हासिल करना फिलहाल किसी भी पक्ष के लिए मुश्किल दिखाई दे रहा है। ऐसे में गठबंधन सरकार के गठन के लिए लंबी राजनीतिक चर्चाओं का दौर शुरू होना लगभग तय माना जा रहा है।
सीटों का गणित और अनिश्चित भविष्य
विभिन्न मीडिया संस्थानों के एग्जिट पोल के आंकड़ों ने नेतन्याहू के लिए मिली-जुली स्थिति पैदा कर दी है। 'कान 11' और 'चैनल 13' के एग्जिट पोल में दोनों ही मुख्य गठबंधनों को 51-51 सीटों पर सिमटते हुए दिखाया गया है। वहीं, 'चैनल 12' के आंकड़ों के मुताबिक नेतन्याहू का गठबंधन 52 सीटों के साथ विपक्षी गठबंधन की 49 सीटों के मुकाबले मामूली बढ़त बनाता दिख रहा है। हालांकि, अंतिम परिणामों के लिए अभी वोटों की गिनती के पूरे होने का इंतजार करना होगा।
अगला कदम क्या होगा
वर्तमान स्थिति के बीच नेतन्याहू ने दक्षिणपंथी विचारधारा वाली पार्टियों से आह्वान किया है कि वे एक नई सरकार के गठन के लिए एकजुट हों। दूसरी ओर, आइसेनकोट का कहना है कि मतदाताओं ने मौजूदा प्रधानमंत्री के नेतृत्व को अस्वीकार कर दिया है। फिलहाल इजराइल की राजनीति में अनिश्चितता का माहौल है और किसी भी नेता के पास सत्ता का स्पष्ट रास्ता मौजूद नहीं है।
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