राष्ट्रीय राजनीति
एक घंटा पहले
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विचारों
बदलता वैश्विक परिदृश्य और अमेरिका का रुख
अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत से ही वैश्विक राजनीति में हलचल तेज हो गई थी। राष्ट्रपति पद संभालने के बाद से ही ट्रंप ने विभिन्न देशों पर टैरिफ का दबाव बनाना शुरू कर दिया था। हालांकि, 28 फरवरी के बाद ईरान के साथ जारी सैन्य संघर्ष ने अमेरिकी सरकार की प्राथमिकताओं को पूरी तरह से बदल दिया। व्यापारिक विवादों में उलझे रहने के बजाय, अमेरिका अब पश्चिम एशिया की सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति जैसे मुद्दों पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रहा है।
भारत की कूटनीतिक जीत
अमेरिकी दबाव के बावजूद भारत ने अपने राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि बनाए रखा। भारत ने न केवल रूस से तेल की खरीद जारी रखी, बल्कि अमेरिका की कठोर व्यापारिक शर्तों को मानने से भी इनकार कर दिया। अब वाशिंगटन यह बखूबी समझ चुका है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए भारत का सहयोग अनिवार्य है। इसी समझ के चलते ट्रंप के बयानों में बदलाव आया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना
हाल ही में फ्रांस में जी7 बैठक के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खुलकर प्रशंसा की। ट्रंप ने कहा कि मोदी ने भारत को वैश्विक युद्धों और अनावश्यक टकरावों से दूर रखकर अत्यंत परिपक्वता और रणनीतिक समझ का परिचय दिया है। उन्होंने मोदी को एक मजबूत और प्रभावशाली वैश्विक नेता बताया है, जो दर्शाता है कि अमेरिका अब भारत की रणनीतिक स्वायत्तता का सम्मान करने लगा है।
चीन और भविष्य की चुनौतियां
जहां एक ओर अमेरिका और भारत के बीच रणनीतिक साझेदारी गहरी हो रही है, वहीं दूसरी ओर डोनाल्ड ट्रंप का चीन के प्रति रुख भी नरम पड़ता नजर आ रहा है। ट्रंप की हालिया चीन यात्रा और शी जिनपिंग की तारीफ इस बात का संकेत है कि अमेरिका एक साथ कई मोर्चों पर टकराव से बचने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, ईरान के साथ स्थिति सामान्य होने के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या ट्रंप का पुराना रुख वापस लौटता है और क्या वे फिर से भारत को टैरिफ संबंधी मुद्दों पर घेरने की कोशिश करते हैं।
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