ईरान ने किया इनकार, कतर में अमेरिकी अधिकारियों से किसी बातचीत की योजना नहीं विश्व 2 महीने पहले 87
ईरान ने उन चर्चाओं को सिरे से खारिज कर दिया है जिनमें अमेरिका के साथ कतर में वार्ता की बात कही जा रही थी। तेहरान ने स्पष्ट किया है कि अंतिम समझौते की दिशा में आगे बढ़ने से पहले विश्वास बहाली के लिए कुछ शर्तों का पूरा होना आवश्यक है।

तेहरान ने दावों को किया खारिज

ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उन दावों को पूरी तरह से गलत बताया है जिनमें कतर की राजधानी दोहा में दोनों देशों के बीच किसी प्रस्तावित बातचीत का जिक्र किया गया था। ईरान के विदेश मंत्रालय ने साफ शब्दों में कहा है कि निकट भविष्य में अमेरिकी पक्ष के साथ किसी भी स्तर पर बातचीत करने का कोई कार्यक्रम तय नहीं है। ईरान की समाचार एजेंसी फार्स न्यूज के अनुसार, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगई ने एक प्रेस वार्ता के दौरान इन अटकलों पर विराम लगाते हुए कहा कि अमेरिकी अधिकारियों से मुलाकात की खबरें आधारहीन हैं।

समझौते के लिए शर्तों का पालन जरूरी

प्रवक्ता इस्माइल बगई ने स्पष्ट किया कि कतर में ईरानी प्रतिनिधिमंडल की मौजूदगी का उद्देश्य अमेरिकी अधिकारियों से मिलना बिल्कुल नहीं है। उन्होंने बताया कि ईरान का प्रतिनिधिमंडल केवल MoU के प्रावधानों पर चर्चा करने के लिए वहां जा रहा है, विशेष रूप से अनुच्छेद-11 के क्रियान्वयन की समीक्षा करना उनकी प्राथमिकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अभी तक व्यापक और अंतिम समझौते को लेकर औपचारिक बातचीत शुरू करने का चरण नहीं आया है। उन्होंने स्पष्ट किया,

हम अभी अंतिम समझौते के लिए औपचारिक वार्ता के चरण में प्रवेश करने की स्थिति में नहीं हैं।

समझौता वार्ता की शर्तें क्या हैं?

ईरानी प्रवक्ता ने बताया कि 14 सूत्रीय MoU के अनुच्छेद-13 के तहत अंतिम समझौते पर चर्चा तभी संभव है, जब अनुच्छेद 1, 4, 5, 10 और 11 में निर्धारित उपायों को सफलतापूर्वक लागू किया जाए। उनका कहना है कि इन प्रावधानों का क्रियान्वयन दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली के लिए अनिवार्य है। जब तक ये शर्तें पूरी तरह से लागू नहीं हो जातीं और उन पर अमल जारी नहीं रहता, तब तक अंतिम समझौते की दिशा में औपचारिक कदम नहीं उठाए जा सकते।

फ्रीज संपत्तियों पर अटकी है बात

इस्माइल बगई ने बताया कि अनुच्छेद-11 के तहत अमेरिका की जिम्मेदारी है कि वह ईरान की फ्रीज की गई या प्रतिबंधित संपत्तियों और फंड को आपसी सहमति से बनी प्रक्रिया के अनुसार जारी करे। इसके लिए आवश्यक लाइसेंस और आधिकारिक अनुमतियां प्रदान करना अमेरिका के लिए जरूरी है ताकि ईरान अपनी संपत्तियों का इस्तेमाल कर सके। प्रवक्ता ने दोहराया कि अनुच्छेद-13 के अनुसार, इन 5 महत्वपूर्ण प्रावधानों का कार्यान्वयन ही आगे की वार्ता का आधार बनेगा।

व्हाइट हाउस का अपना दावा

दूसरी तरफ, व्हाइट हाउस ने एक अलग रुख अपनाते हुए दावा किया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और वरिष्ठ सलाहकार जारेड कुशनर मंगलवार को दोहा की यात्रा करेंगे, जहां ईरान के साथ बातचीत प्रस्तावित है। यह कदम हाल के दिनों में हॉर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़े तनाव और सैन्य गतिविधियों के बाद उठाया गया बताया जा रहा है। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने एक मीडिया इंटरव्यू में दावा किया था कि यह बैठक ईरान के विशेष अनुरोध पर आयोजित की गई है, जिसका अब ईरान ने कड़ा खंडन किया है।

साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

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