इंदौर के पूर्व पार्षद अनवर कादरी के शस्त्र लाइसेंस केस में पुलिस पहुंची जम्मू-कश्मीर, कठुआ में हो रही जांच मध्य प्रदेश 2 घंटे पहले 2
इंदौर के पूर्व कांग्रेस पार्षद अनवर कादरी से जुड़े कथित फर्जी शस्त्र लाइसेंस मामले में जांच अब मध्य प्रदेश की सीमाओं से बाहर जम्मू-कश्मीर के कठुआ तक जा पहुंची है। सदर बाजार पुलिस की एक टीम लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया और उसमें हुई अनियमितताओं की पड़ताल के लिए वहां मौजूद है।

कठुआ पहुंची इंदौर पुलिस की टीम

मध्य प्रदेश के इंदौर में चल रहे कांग्रेस के पूर्व पार्षद अनवर कादरी के शस्त्र लाइसेंस मामले की जांच में एक बड़ा मोड़ आ गया है। इस पूरे प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए इंदौर की सदर बाजार थाना पुलिस की एक विशेष टीम अब जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले में पहुंच गई है। मामला एक ऐसे शस्त्र लाइसेंस से जुड़ा है, जिसके बारे में आरोप है कि इसे नियमों को ताक पर रखकर जम्मू-कश्मीर से बनवाया गया था और बाद में इसका इस्तेमाल इंदौर में किया गया। पुलिस की टीम वहां पहुंचकर अब इस लाइसेंस से जुड़ी फाइलों और सरकारी रिकॉर्ड को खंगाल रही है ताकि मामले की सच्चाई सामने आ सके।

लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया पर सवाल

जांच का सबसे प्रमुख केंद्र यह बिंदु है कि आखिर यह लाइसेंस किस तरह की प्रक्रिया अपनाकर जारी किया गया था। पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि क्या उस दौरान सभी कानूनी औपचारिकताओं को पूरा किया गया था या नहीं। जांच टीम उन लोगों की भूमिका की भी पहचान करने में जुटी है, जिन्होंने इस लाइसेंस को बनवाने में मदद की या इसमें अपनी सक्रिय भागीदारी निभाई। पुलिस का मुख्य लक्ष्य यह पता लगाना है कि क्या लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर धांधली हुई थी।

दस्तावेजों और आवेदनों की गहन पड़ताल

कठुआ में मौजूद इंदौर पुलिस की टीम वहां के संबंधित विभागों के रिकॉर्ड की जांच कर रही है। पुलिस उन मूल आवेदनों की बारीकी से समीक्षा कर रही है जो अनवर कादरी के नाम पर जमा किए गए थे। इसके साथ ही, उन सभी दस्तावेजों की सत्यता की भी पुष्टि की जा रही है जो लाइसेंस हासिल करने के लिए आधार के रूप में प्रस्तुत किए गए थे। पुलिस यह भी देख रही है कि आवेदन के समय जो पता या अन्य जानकारी दी गई थी, क्या वह आधिकारिक रिकॉर्ड में सही पाई गई है या नहीं। लाइसेंस जारी होने से पहले जो अनिवार्य पुलिस वेरिफिकेशन या सत्यापन प्रक्रिया होती है, क्या उसे वास्तव में पूरा किया गया था, यह सवाल भी जांच का हिस्सा है।

इंदौर में उपयोग की भी जांच

केवल लाइसेंस जारी होने की प्रक्रिया ही नहीं, बल्कि इंदौर पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि इस लाइसेंस का स्थानीय स्तर पर किस तरह से दुरुपयोग हुआ। पुलिस टीम उन तमाम रिकॉर्ड को इकट्ठा कर रही है जिनसे यह पता चल सके कि जम्मू-कश्मीर से जारी होने के बाद इस लाइसेंस का इंदौर में किस हद तक इस्तेमाल किया गया। इस पड़ताल का मकसद उन कड़ियों को आपस में जोड़ना है जिनसे यह स्पष्ट हो सके कि मामले के तार कितने गहरे जुड़े हुए हैं।

आगे की कार्रवाई की तैयारी

कठुआ से मिलने वाली जानकारी और दस्तावेजों के आधार पर पुलिस इस मामले में अपनी अगली रणनीति तैयार करेगी। यदि जांच के दौरान किसी भी तरह की अनियमितता, नियमों का उल्लंघन या फर्जीवाड़े के सबूत मिलते हैं, तो पुलिस आगे की सख्त कानूनी कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र होगी। फिलहाल, सदर बाजार थाना पुलिस की टीम जम्मू-कश्मीर में ही रहकर तथ्यों की पुष्टि करने और साक्ष्य जुटाने के काम में पूरी तरह से केंद्रित है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, वहां की जांच प्रक्रिया पूरी होने और रिपोर्ट तैयार होने के बाद ही इस पूरे प्रकरण की वास्तविक स्थिति पर से पर्दा पूरी तरह उठ पाएगा। तब तक पुलिस हर छोटे-बड़े दस्तावेज की गहन जांच जारी रखेगी।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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