भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर पीयूष गोयल का बड़ा बयान, डील फाइनल होने की राह में यह है सबसे बड़ी चुनौती व्यापार एक घंटा पहले 3
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भारत और अमेरिका के बीच चल रही ट्रेड डील पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते हुए बताया कि अंतिम समझौता कब हो सकता है।

अमेरिका से प्रतिस्पर्धी टैरिफ दरों की उम्मीद

भारत और अमेरिका के बीच काफी समय से विचाराधीन द्विपक्षीय व्यापार समझौते यानी BTA को लेकर केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा है कि इस समझौते को अंतिम स्वरूप देने की दिशा में भारत एक महत्वपूर्ण पड़ाव पर है, लेकिन इसके लिए अमेरिका की ओर से एक विशेष शर्त पूरी होने का इंतजार किया जा रहा है। गोयल के मुताबिक, जैसे ही अमेरिका भारतीय उत्पादों पर उन टैरिफ दरों की पेशकश करेगा जो हमारे प्रतिस्पर्धी देशों के बराबर या उनसे बेहतर होंगी, इस व्यापार समझौते को तुरंत अंतिम रूप दे दिया जाएगा और इसके विवरण सार्वजनिक कर दिए जाएंगे।

टैरिफ दरों पर अटकी है बात

गुरुवार को वाणिज्य मंत्रालय द्वारा आयोजित एक कार्यशाला के दौरान पीयूष गोयल ने स्पष्ट किया कि समझौते की कामयाबी के लिए प्रिफरेंशियल रेट यानी तरजीही दरें मिलना अनिवार्य है। भारत की स्पष्ट मांग है कि अमेरिकी बाजार में भारतीय निर्यातकों को वे सुविधाएं मिलें, जो उनके मुख्य प्रतिद्वंद्वी देशों को प्राप्त हैं। उल्लेखनीय है कि 24 जुलाई से अमेरिका ने भारत सहित कई देशों के विभिन्न उत्पादों पर 10 फीसदी अतिरिक्त शुल्क लागू कर दिया है। इस बदलते वैश्विक टैरिफ परिदृश्य के कारण दोनों देशों के बीच आधिकारिक स्तर पर बातचीत का दौर लगातार जारी है।

अमेरिका यात्रा और द्विपक्षीय वार्ता का कार्यक्रम

इस व्यापार समझौते को गति देने के लिए पीयूष गोयल इस साल के सितंबर महीने के अंत में अमेरिका की यात्रा पर जाएंगे। इस दौरे के दौरान वे G20 व्यापार मंत्रिस्तरीय बैठक में शामिल होंगे। यात्रा का मुख्य आकर्षण अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमीसन ग्रीर के साथ होने वाली उनकी द्विपक्षीय बैठक होगी। विश्लेषकों का मानना है कि इस उच्च-स्तरीय मुलाकात में भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का मुद्दा सबसे अहम रहने वाला है। भारत के लिए यह डील इसलिए भी मायने रखती है क्योंकि वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने अमेरिका को लगभग 87 अरब डॉलर के माल का निर्यात किया है, जो भारत के कुल विदेशी व्यापार का एक बड़ा हिस्सा है।

प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले लाभ की रणनीति

अमेरिकी बाजार में भारतीय कंपनियों को मुख्य रूप से वियतनाम, बांग्लादेश, मलेशिया, इंडोनेशिया और थाईलैंड जैसे देशों से कड़ी टक्कर मिलती है। पीयूष गोयल ने जोर दिया कि केवल टैरिफ की संख्या को देखना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह देखना महत्वपूर्ण है कि भारतीय उत्पादों पर उन देशों के मुकाबले कितना शुल्क लगाया जा रहा है। यदि भारतीय उत्पादों पर इन प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में कम शुल्क निर्धारित होता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय माल अधिक सस्ता और आकर्षक होगा, जिससे घरेलू कंपनियों को भारी लाभ होगा।

FTA का जाल और निर्यात लक्ष्य

वाणिज्य मंत्री ने जानकारी दी कि भारत का फ्री ट्रेड एग्रीमेंट यानी FTA नेटवर्क तेजी से विस्तार कर रहा है। ऑस्ट्रेलिया, यूएई, ओमान, मॉरीशस और ब्रिटेन जैसे देशों के साथ समझौते पहले ही लागू किए जा चुके हैं। वहीं, न्यूजीलैंड के साथ समझौते पर अमल जल्द शुरू होने की उम्मीद है और यूरोपीय संघ के साथ भी बातचीत का सिलसिला चल रहा है। सरकार का लक्ष्य चालू वित्त वर्ष में 1 ट्रिलियन डॉलर का निर्यात हासिल करना है। आंकड़ों पर गौर करें तो इस वित्त वर्ष के पहले चार महीनों में कुल निर्यात 317 अरब डॉलर दर्ज किया गया है, जो कि पिछले साल की इसी अवधि में रहे 280 अरब डॉलर के मुकाबले काफी अधिक है। सरकार ने वर्ष 2030 तक कुल निर्यात को 2 ट्रिलियन डॉलर तक ले जाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है।

राजीव खन्ना पाबना के व्यापार संवाददाता हैं और कंपनियों, बाजार तथा अर्थव्यवस्था की खबरों को सरल भाषा में समझाते हैं। कारोबार जगत के बड़े फैसलों, नीतिगत बदलावों और उनके आम आदमी पर असर को वे गहराई से कवर करते हैं। उनका मकसद जटिल आर्थिक खबरों को हर पाठक के लिए आसान बनाना है।

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