राष्ट्रीय राजनीति
2 महीने पहले
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पाकिस्तान पर फिर मंडराया संकट
पाकिस्तान के लिए आने वाले दिन बेहद चुनौतीपूर्ण साबित होने वाले हैं। वैश्विक मंच पर भारत एक बार फिर पाकिस्तान की पोल खोलने की पूरी तैयारी कर चुका है। भारत ने पड़ोसी देश की नापाक हरकतों के खिलाफ ठोस सबूत जुटा लिए हैं और इन्हें फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) के सामने पेश किया जाएगा। भारत का स्पष्ट लक्ष्य पाकिस्तान को एक बार फिर ‘ग्रे लिस्ट’ में धकेलना है। यदि भारत की यह कूटनीतिक कोशिश सफल होती है, तो पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर जैसे शीर्ष नेतृत्व के लिए बड़ी मुसीबत खड़ी हो जाएगी।
पेरिस में भारत की अगली चाल
आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय लड़ाई में भारत लंबे समय से पाकिस्तान को घेरता आया है। आगामी अक्टूबर महीने में पेरिस में FATF की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित होने वाली है। सूत्रों की मानें तो इस बैठक में भारत पाकिस्तान को दोबारा निगरानी सूची यानी ग्रे लिस्ट में शामिल करने का पुरजोर आग्रह करेगा। भारत के पास इसके लिए पाकिस्तान के सरकारी तंत्र और वहां सक्रिय आतंकी संगठनों के बीच गहरे गठजोड़ के नए वीडियो और डिजिटल साक्ष्य मौजूद हैं। नई दिल्ली का मानना है कि पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियां आज भी आतंकवादियों को संरक्षण दे रही हैं, जिससे वैश्विक सुरक्षा को खतरा बना हुआ है।
ऑपरेशन सिंदूर और सबूतों का जखीरा
ऑपरेशन सिंदूर के बाद मिले साक्ष्य भारत की दलीलों को और अधिक मजबूत बना रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत उन वीडियो क्लिप्स को FATF के समक्ष रखने की योजना बना रहा है, जिनमें पाकिस्तान सेना और खुफिया एजेंसी के आला अधिकारी खुलेआम आतंकवादियों के अंतिम संस्कार में शामिल होते दिखाई दिए हैं। भारत का तर्क है कि ये वीडियो इस बात का ठोस प्रमाण हैं कि पाकिस्तान का सरकारी ढांचा और आतंकवादी नेटवर्क अलग नहीं हैं। इसके अलावा, भारत ने ऐसे कई अन्य साक्ष्यों का संग्रह किया है, जो दर्शाते हैं कि सरकारी अधिकारी सार्वजनिक कार्यक्रमों में आतंकवादियों के साथ न केवल मिल रहे हैं, बल्कि उनके साथ सक्रिय रूप से संपर्क में भी हैं।
2022 का इतिहास और वर्तमान स्थिति
गौरतलब है कि अक्टूबर 2022 में ही पाकिस्तान को FATF की ग्रे लिस्ट से बाहर किया गया था। तब पाकिस्तान ने दावा किया था कि उसने आतंकवाद के वित्तपोषण और मनी लॉन्ड्रिंग पर रोक लगाने के लिए सभी आवश्यक कदम उठा लिए हैं। उस समय FATF ने 34 बिंदुओं वाले एक विस्तृत एक्शन प्लान को पूरा करने की शर्त रखी थी। इसमें वित्तीय कानूनों में व्यापक सुधार, संदिग्ध लेनदेन की निगरानी और आतंकी नेटवर्कों पर सख्त कार्रवाई शामिल थी। हालांकि, अब भारत का आरोप है कि ये सुधार केवल कागजों तक ही सीमित रहे हैं और जमीन पर स्थिति जस की तस बनी हुई है।
ग्रे लिस्ट का असर और भारत की सक्रियता
FATF की ग्रे लिस्ट में शामिल होने का मतलब है कि उस देश पर अंतरराष्ट्रीय निगरानी बढ़ जाती है। ग्रे लिस्ट में रहने वाले देशों को वैश्विक वित्तीय संस्थानों जैसे कि विश्व बैंक या अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से ऋण और निवेश हासिल करने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इससे उस देश की अर्थव्यवस्था, विदेशी निवेश और व्यापारिक गतिविधियों पर गहरा नकारात्मक असर पड़ता है। भारत का यह कड़ा रुख इसलिए भी जरूरी है क्योंकि पाकिस्तान अपनी धरती का उपयोग आतंकवाद को बढ़ावा देने और उसे वित्तीय मदद पहुंचाने के लिए जारी रखे हुए है।
बदली हुई कूटनीतिक परिस्थितियां
इस बार की FATF बैठक में भारत की भूमिका अधिक महत्वपूर्ण नजर आ रही है। हाल ही में भारत के संस्कृति मंत्रालय के सचिव विवेक अग्रवाल को FATF का उपाध्यक्ष (Vice President) नियुक्त किया गया है। इसे वैश्विक वित्तीय अपराधों पर लगाम लगाने में भारत के बढ़ते कद और प्रभाव के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, यह भी ध्यान रखना होगा कि FATF में लिए जाने वाले फैसले सभी सदस्य देशों की सहमति और सामूहिक प्रक्रिया पर आधारित होते हैं, इसलिए भारत की राह इतनी आसान भी नहीं होगी।
इस्लामाबाद की कूटनीतिक जुगत
दूसरी तरफ, पाकिस्तान भी चुपचाप हाथ पर हाथ धरे नहीं बैठा है। हाल के महीनों में इस्लामाबाद ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी सक्रियता को काफी बढ़ाया है। पाकिस्तान अमेरिका समेत दुनिया के कई बड़े देशों के साथ अपने कूटनीतिक संबंध मजबूत करने की कोशिश कर रहा है ताकि वह FATF की अगली कार्रवाई से बच सके। अब पूरी दुनिया की निगाहें अक्टूबर में होने वाली इस बैठक पर टिकी हैं कि क्या भारत द्वारा पेश किए गए ऑपरेशन सिंदूर जैसे सबूतों के आधार पर पाकिस्तान के खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई की जाती है या नहीं।
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