इंडिया गठबंधन को धार देने की तैयारी में ममता बनर्जी, राहुल गांधी को भेजा 30 सितंबर की बैठक का न्योता भारत 6 घंटे पहले 4
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने विपक्षी इंडिया गठबंधन को सक्रिय करने की कवायद शुरू कर दी है और 30 सितंबर को दिल्ली में बैठक का प्रस्ताव रखा है।

इंडिया गठबंधन को मजबूत करने की कोशिश में ममता बनर्जी

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी अब विपक्षी इंडिया गठबंधन को फिर से सक्रिय और मजबूत करने के मिशन में जुट गई हैं। हालिया विधानसभा चुनावों में मिली हार और पार्टी के भीतर हुई टूट की घटनाओं के बाद, ममता बनर्जी ने अब विपक्षी खेमे की रणनीति को नई दिशा देने का मन बनाया है। चुनाव आयोग के कामकाज पर उठ रहे सवालों और विपक्ष की भावी कार्ययोजना पर चर्चा के लिए उन्होंने इंडिया गठबंधन की एक अहम बैठक दिल्ली में बुलाने का प्रस्ताव रखा है। इस संबंध में ममता बनर्जी ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को एक संदेश भी भेजा है। प्रस्तावित योजना के अनुसार, यह बैठक 30 सितंबर को दिल्ली के कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में आयोजित की जा सकती है।

राहुल गांधी से संवाद और बैठक की रूपरेखा

तृणमूल कांग्रेस की मुखिया ममता बनर्जी ने हुगली जिले के श्रीरामपुर में आयोजित एक सार्वजनिक रैली के दौरान इस बात की पुष्टि की कि उन्होंने विपक्षी दलों के बीच बेहतर तालमेल बिठाने के लिए राहुल गांधी से संपर्क साधा है। उन्होंने कहा कि उन्होंने संदेश के जरिए राहुल गांधी को यह सुझाव दिया है कि सभी विपक्षी दलों के नेताओं को एक साथ बैठकर विचार-विमर्श करना चाहिए। गौरतलब है कि यह कदम मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के विरुद्ध चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच उठाया गया है। ममता ने स्पष्ट किया कि 30 सितंबर की तारीख पर सहमति बनने की संभावना है और बैठक का स्थान कॉन्स्टीट्यूशन क्लब हो सकता है। सूत्रों के मुताबिक, ममता ने इस विषय पर राहुल गांधी के साथ फोन पर भी विस्तृत चर्चा की है और जल्द से जल्द बैठक के आयोजन पर जोर दिया है। इसके अलावा उन्होंने माकपा महासचिव एमए बेबी के साथ भी इस मुद्दे पर बातचीत की है।

चुनाव में हार और आंतरिक संकट से जूझती टीएमसी

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ममता बनर्जी के लिए यह समय काफी चुनौतीपूर्ण है। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में पार्टी की करारी हार के बाद से ममता की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। सत्ता से बेदखल होने के बाद से ही तृणमूल कांग्रेस पर उनकी पकड़ ढीली पड़ती नजर आई है। पार्टी में फूट का दौर तब शुरू हुआ जब उनके कई विधायकों ने साथ छोड़ दिया। विधानसभा के भीतर ही पार्टी दो फाड़ हो गई और विधायकों के जाने का सिलसिला शुरू हो गया। ममता बनर्जी अभी इस झटके से पूरी तरह संभल भी नहीं पाई थीं कि उनके कई सांसदों ने भी पार्टी का दामन छोड़ दिया। स्थिति तब और गंभीर हो गई जब चुनाव आयोग ने पार्टी के आधिकारिक चुनाव चिह्न को भी बदल दिया।

चुनाव आयोग पर लगाए गंभीर आरोप

रैली के दौरान ममता बनर्जी ने शनिवार को चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सीधा प्रहार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के नाम पर वैध मतदाताओं के नाम हटा दिए गए, जिससे राज्य विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को जीत हासिल करने में मदद मिली। उन्होंने एक हालिया रिपोर्ट का जिक्र करते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने किस प्रकार से चुनाव आयोग का अपने हित में इस्तेमाल किया, इसका सच अब जनता के सामने आ चुका है। उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफा देने तक पूरे देश में उनका विरोध-प्रदर्शन जारी रहेगा। मुर्शिदाबाद के रेजीनगर उपचुनाव का उल्लेख करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस सत्तारूढ़ दल के इशारे पर काम कर रही है और अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों से उनके मतदाता पहचान पत्र छीने जा रहे हैं। इससे पहले ममता बनर्जी ने नंदीग्राम उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान का समर्थन करके सभी को हैरान कर दिया था। उस समय उनकी अपनी उम्मीदवार संचिता प्रधान डे द्वारा चुनाव से नाम वापस लेने के बाद ममता ने कांग्रेस का साथ दिया था, जिसे उन्होंने इंडिया गठबंधन की मजबूती के लिए उठाया गया कदम बताया था।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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