राष्ट्रीय राजनीति
एक घंटा पहले
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विचारों
भारत की बढ़ती साख और आर्थिक आंकड़े
वर्तमान में जब पूरी दुनिया गंभीर आर्थिक चुनौतियों और मंदी के दौर से गुजर रही है, तब भारत ने 7.8% की जीडीपी वृद्धि दर दर्ज करके अपनी अलग पहचान बनाई है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी IMF ने हाल ही में जारी अपने आंकड़ों में यह स्वीकार किया है कि भारत की विकास दर न केवल प्रभावशाली है, बल्कि इसने उनके अपने विशेषज्ञों और बाहरी जानकारों के सभी अनुमानों को पीछे छोड़ दिया है। भारत ने वह कीर्तिमान स्थापित किया है जिसकी उम्मीद शायद वैश्विक बाजारों को भी नहीं थी।
विपक्ष के सवाल और जमीनी हकीकत
एक तरफ जहां भारत की वैश्विक हैसियत तेजी से बढ़ रही है, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस के पी. चिदंबरम जैसे नेता BRICS और भारत की आर्थिक नीतियों पर सवाल खड़े कर रहे हैं। उनका यह तर्क है कि इन उपलब्धियों से देश को आखिर क्या मिला? हालांकि, राजनीति से परे हटकर देखें तो अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मिल रही सराहना और मजबूत आर्थिक संकेत भारत की प्रगति की कहानी खुद बयां कर रहे हैं।
नजरिए का फेर
यह कहना गलत नहीं होगा कि अगर तमाम अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसियों और आर्थिक आंकड़ों के बावजूद किसी को भारत की चमकती अर्थव्यवस्था नजर नहीं आ रही है, तो शायद समस्या आंकड़ों में नहीं बल्कि देखने वाले के नजरिए में है। सवाल पूछना लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन विकास की रफ्तार को नकारना ठीक वैसा ही है जैसे परिवार के किसी नाराज फूफा को मनाने की कोशिश करना। क्या हम अपनी तरक्की पर गर्व करने के बजाय केवल कमियां निकालने में ही उलझे रहेंगे?
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