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2 घंटे पहले
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सुप्रीम कोर्ट के आदेश से शहबाज सरकार की बढ़ी परेशानी
पाकिस्तान में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की गिरती सेहत और उनके जेल से बाहर इलाज कराने का मुद्दा देश की राजनीति का केंद्र बन गया है। इस मामले ने शहबाज शरीफ की सरकार और पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट के बीच एक बड़ा टकराव पैदा कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने इमरान खान को निजी अस्पताल में अपना इलाज कराने की अनुमति दी थी, लेकिन सरकार ने इस निर्देश को मानने के बजाय उसे चुनौती देने का रास्ता चुना। इस कदम के चलते शहबाज शरीफ सरकार को भारी आलोचना का सामना करना पड़ा है।
सरकार की रिव्यू पिटीशन हुई खारिज
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया था कि इमरान खान को 48 घंटे के भीतर शिफा हॉस्पिटल में भर्ती कराया जाए। इस समय सीमा के खत्म होने से ठीक पहले, इस्लामाबाद के चीफ कमिश्नर की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में एक रिव्यू पिटीशन दायर की गई। सरकार का आग्रह था कि कोर्ट अपने पिछले फैसले पर दोबारा विचार करे और इमरान खान को निजी अस्पताल भेजने के आदेश को वापस ले। सरकार का यह तर्क था कि इमरान का इलाज या तो जेल के भीतर होना चाहिए या फिर किसी सरकारी अस्पताल में। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को स्वीकार नहीं किया। अदालत की रजिस्ट्री ने याचिका में मौजूद तकनीकी खामियों का हवाला देते हुए उसे वापस कर दिया।
सरकार की अगली रणनीति और अंतिम फैसले का इंतजार
अब सरकार का कहना है कि वे याचिका की कमियों को दूर करके इसे फिर से सुप्रीम कोर्ट में पेश करेंगे। शहबाज शरीफ सरकार के अनुसार, आज दायर की गई अर्जी में कुछ तकनीकी दिक्कतें थीं, जिन्हें सुधारना जरूरी है। सरकार का रुख यह है कि जब तक सुप्रीम कोर्ट इस मामले में कोई अंतिम फैसला नहीं सुना देता, तब तक इमरान खान को अस्पताल शिफ्ट करने पर कोई निर्णय नहीं लिया जाएगा। सरकार का तर्क है कि सुप्रीम कोर्ट का अंतरिम आदेश जेल मैनुअल के नियमों के खिलाफ है।
सरकार का पक्ष है कि यदि इमरान खान को निजी अस्पताल में इलाज की छूट दी जाती है, तो अन्य कैदी भी समान अधिकारों की मांग कर सकते हैं। इससे जेल प्रशासन में असमानता बढ़ेगी और एक गलत नजीर कायम होगी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की इस दलील को सिरे से नकार दिया है और इमरान खान के इलाज के लिए 16 सितंबर तक निजी अस्पताल में व्यवस्था करने का आदेश बरकरार रखा है।
48 घंटे की मियाद पूरी, आदेश का पालन अभी भी बाकी
सबसे बड़ा सवाल यह बना हुआ है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय की गई 48 घंटे की समय सीमा समाप्त हो चुकी है, फिर भी इमरान खान को जेल से अस्पताल नहीं भेजा गया है। इमरान खान के वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश की प्रमाणित प्रति अदियाला जेल के सुपरिंटेंडेंट को सौंप दी है, लेकिन इसके बावजूद सरकार ने अब तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं की है। इस स्थिति के चलते अब पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ यानी PTI सरकार के खिलाफ अदालत की अवमानना का मामला दर्ज कराने की तैयारी कर रही है।
PTI करेगी 'कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट' का केस
PTI के वरिष्ठ नेता जुनैद अकबर ने स्पष्ट किया है कि उनकी पार्टी शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में शहबाज शरीफ सरकार के विरुद्ध अदालत की अवमानना का केस दायर करेगी। जुनैद अकबर का आरोप है कि सरकार को इमरान खान का डर सता रहा है। उनका कहना है कि अगर इमरान खान जेल से बाहर आते हैं, तो यह शहबाज शरीफ की सत्ता के लिए एक बड़ा राजनीतिक खतरा बन सकता है। उन्होंने जोर दिया कि जनता के बीच इमरान खान की लोकप्रियता अभी भी बहुत ज्यादा है, और इसी लोकप्रियता से डरकर सरकार उन्हें जेल से बाहर आने से रोक रही है। उनके मुताबिक, सरकार अदालत के आदेशों की अनदेखी करने के लिए अलग-अलग तरह के बहाने गढ़ रही है।
क्या इलाज से ज्यादा सियासत पर है सरकार का ध्यान?
इमरान खान का स्वास्थ्य अब आम जनता के लिए भी एक संवेदनशील मुद्दा बन चुका है। इस पूरे घटनाक्रम में PTI लगातार यह आरोप लगा रही है कि सरकार इमरान खान की सेहत को लेकर चिंतित होने के बजाय, उनकी राजनीतिक शक्ति को खत्म करने में लगी है। PTI का सीधा आरोप है कि शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर किसी भी हालत में इमरान खान को जेल की चाहरदीवारी से बाहर नहीं आने देना चाहते। पार्टी का दावा है कि इमरान की बढ़ती लोकप्रियता सरकारी तंत्र के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो रही है, इसीलिए वे सुप्रीम कोर्ट के आदेश को टालने की कोशिश कर रहे हैं।
आगे क्या होगा?
इस मामले में गेंद एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट के पाले में दिखाई दे रही है। एक तरफ शहबाज शरीफ सरकार अपनी गलतियों को सुधारकर नई रिव्यू पिटीशन दायर करने की योजना बना रही है, तो दूसरी तरफ PTI सरकार पर दबाव बनाने के लिए कानूनी रास्ता अपना रही है। अब यह केवल चिकित्सा का विषय नहीं रह गया है, बल्कि यह पाकिस्तान की न्यायपालिका और सरकार के बीच अधिकारों के टकराव का एक बड़ा मुद्दा बन गया है। अब सबकी निगाहें सुप्रीम कोर्ट के अगले रुख पर टिकी हैं। यदि सुप्रीम कोर्ट अपने पूर्व आदेश पर अडिग रहता है, तो शहबाज शरीफ सरकार पर इमरान खान को निजी अस्पताल भेजने का दबाव और अधिक बढ़ जाएगा।
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