राष्ट्रीय राजनीति
एक घंटा पहले
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देशभर में मानसून की सक्रियता एक बार फिर अपने चरम पर पहुंचने लगी है, जिसके कारण मौसम के मिजाज में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा जारी किए गए ताजा और विस्तृत पूर्वानुमान के अनुसार, सितंबर के दूसरे सप्ताह की शुरुआत के साथ ही देश के एक बहुत बड़े हिस्से पर मानसूनी बादलों ने अपना डेरा जमा लिया है। विभाग ने अगले 20 घंटों के भीतर देश के कुल 21 राज्यों में भारी से लेकर बहुत भारी बारिश होने की गंभीर चेतावनी जारी की है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत के राज्यों में इस मानसूनी बारिश का सबसे ज्यादा असर देखने को मिल सकता है।
इस मौसमी उथल-पुथल के पीछे उत्तर प्रदेश और बिहार के वायुमंडल में सक्रिय चक्रवाती परिसंचरण को मुख्य कारण माना जा रहा है। इसके साथ ही, बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से उठने वाली तूफानी हवाओं की रफ्तार भी लगातार बढ़ रही है, जिससे तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए सुरक्षा संबंधी चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। समुद्र में हवा की गति काफी तेज रहने की आशंका जताई गई है, जिसके चलते मछुआरों को भी विशेष सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए हैं।
उत्तर प्रदेश और बिहार के ऊपर सक्रिय मौसमी चक्रवात
मौसम विज्ञानियों के विश्लेषण के अनुसार, मध्य उत्तर प्रदेश के आसमान के ऊपर जो कम दबाव का क्षेत्र (लो प्रेशर एरिया) बना हुआ था, वह अब धीरे-धीरे कमजोर पड़ गया है। हालांकि, भले ही यह लो प्रेशर सिस्टम कमजोर हो चुका है, लेकिन इससे जुड़ा चक्रवाती परिसंचरण (साइक्लोनिक सर्कुलेशन) अभी भी पूरी तरह से सक्रिय और शक्तिशाली बना हुआ है। वर्तमान समय में यह चक्रवाती परिसंचरण पूर्वी उत्तर प्रदेश और उससे सटे बिहार के वायुमंडल के ऊपर अपनी स्थिति मजबूत किए हुए है।
इसके अतिरिक्त, पश्चिमी विक्षोभ और देश के अन्य हिस्सों में सक्रिय दूसरे चक्रवाती प्रणालियां भी मौसम के मिजाज को प्रभावित कर रही हैं। इन सभी जटिल मौसमी प्रणालियों के आपस में जुड़ने के कारण देश के अलग-अलग हिस्सों में अगले कुछ दिनों तक रुक-रुक कर और कुछ स्थानों पर लगातार मूसलाधार बारिश का सिलसिला जारी रहने का अनुमान है। यही कारण है कि मौसम विभाग ने उत्तर और पूर्वी भारत के कई संवेदनशील इलाकों के लिए हाई अलर्ट घोषित किया है।
दिल्ली-NCR के मौसम में धूप और छांव की आंख-मिचौली
देश की राजधानी दिल्ली और उससे सटे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के इलाकों के लिए 9 सितंबर का दिन उमस और गर्मी से कुछ हद तक राहत दिलाने वाला साबित हो सकता है। IMD के ताजा बुलेटिन के अनुसार, दिल्ली-NCR के आसमान में आंशिक रूप से बादलों की आवाजाही बनी रहेगी। इसका सीधा अर्थ यह है कि दिन के समय आसमान में घने बादलों और चमकीली धूप के बीच आंख-मिचौली का खेल देखने को मिल सकता है, जिससे तापमान में बहुत अधिक बढ़ोतरी दर्ज नहीं की जाएगी।
हालांकि, मौसम विभाग ने दिल्ली के लिए कल किसी भी तरह की भारी बारिश की प्रमुख या बड़ी चेतावनी जारी नहीं की है। इसके बावजूद, राजधानी के आस-पास सक्रिय मौसमी प्रणालियों के प्रभाव के कारण यहां के स्थानीय मौसम में हल्के बदलाव देखने को मिल सकते हैं। दिन के विभिन्न समयों पर बादलों का घनत्व बढ़ सकता है और धूप की तीव्रता कम रहने से हवा में हल्की ठंडक महसूस की जा सकती है।
उत्तर प्रदेश में कम दबाव के क्षेत्र के बाद की स्थिति
उत्तर प्रदेश के आसमान पर बना कम दबाव का क्षेत्र कमजोर पड़ने के बाद भी राज्य में बारिश की गतिविधियों को पूरी तरह शांत नहीं कर पाया है। इससे जुड़ी चक्रवाती परिसंचरण प्रणाली पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार की सीमाओं पर बहुत अधिक सक्रिय बनी हुई है। इस वजह से राज्य के पूर्वी जिलों में मानसून की सक्रियता काफी अधिक देखने को मिलेगी, जहां गरज-चमक के साथ बारिश की पूरी संभावना बनी हुई है।
वहीं दूसरी तरफ, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के वायुमंडल में पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से एक अन्य साइक्लोनिक सर्कुलेशन भी अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहा है। इन दोनों प्रणालियों के संयुक्त प्रभाव के कारण उत्तर प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में मौसम का मिजाज लगातार अस्थिर बना हुआ है। प्रशासन ने भी राज्य के पूर्वी हिस्सों में बाढ़ और जलभराव की स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक कदम उठाने शुरू कर दिए हैं ताकि जान-माल के नुकसान को न्यूनतम किया जा सके।
उत्तराखंड में भारी बारिश और भूस्खलन का बड़ा संकट
देवभूमि उत्तराखंड में 9 सितंबर को कुछ सीमित स्थानों पर गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना जताई गई है। लेकिन राज्य के पहाड़ी क्षेत्रों के लिए असली और बड़ी चुनौती इसके ठीक अगले दिन से शुरू होने वाली है। मौसम विज्ञान विभाग ने आशंका जताई है कि 10 से 14 सितंबर के बीच उत्तराखंड में बारिश की गतिविधियों में अप्रत्याशित रूप से बड़ी वृद्धि दर्ज की जा सकती है।
इस समय सीमा के भीतर राज्य के विभिन्न पहाड़ी और तराई क्षेत्रों में लगातार भारी वर्षा होने का अनुमान है। पर्वतीय क्षेत्रों में लगातार होने वाली इस मूसलाधार बारिश के चलते भूस्खलन होने, पहाड़ी चट्टानें खिसकने, मुख्य सड़कें अवरुद्ध होने और नदी-नालों का जलस्तर अचानक बढ़ने जैसी भयानक प्राकृतिक आपदाएं आ सकती हैं। ऐसे में चारधाम के यात्रियों, पर्यटकों और पर्वतीय क्षेत्रों के निवासियों को अत्यधिक सावधानी बरतने की हिदायत दी गई है। यात्रा पर निकलने से पहले प्रशासनिक निर्देशों और स्थानीय मौसम चेतावनियों पर पैनी नजर रखना जीवन सुरक्षा के लिए अनिवार्य होगा।
बिहार में आंधी-तूफान और वज्रपात की गंभीर चेतावनी
बिहार राज्य के लिए 9 सितंबर का दिन मौसम के लिहाज से सबसे अधिक सक्रिय और खतरनाक साबित हो सकता है। पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार की सीमाओं पर केंद्रित साइक्लोनिक सर्कुलेशन के कारण राज्य के अधिकांश जिलों में भारी बारिश होने की प्रबल आशंका है। IMD ने राज्य के कई हिस्सों में मूसलाधार बारिश का अलर्ट जारी करने के साथ-साथ तेज गर्जना और आकाशीय बिजली गिरने (वज्रपात) की भी चेतावनी दी है।
इस दौरान कुछ क्षेत्रों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज और तूफानी हवाएं चलने की भी संभावना जताई गई है। ऐसे में खुले स्थानों पर रहने वाले लोगों और ग्रामीण इलाकों में खेतों में काम करने वाले किसानों को विशेष रूप से सचेत रहने की आवश्यकता है। मौसम विभाग ने सलाह दी है कि बिजली चमकने या बादलों की गड़गड़ाहट सुनाई देने पर लोग खुले पेड़ों के नीचे खड़े होने के बजाय तुरंत सुरक्षित और पक्के ढांचों के भीतर शरण लें।
झारखंड में अगले पांच दिनों तक मानसून की भारी सक्रियता
झारखंड में भी 9 सितंबर को मानसून का असर बेहद शक्तिशाली रहने वाला है। मौसम विभाग ने राज्य के विभिन्न जिलों में मूसलाधार बारिश होने की आशंका व्यक्त की है। इसके साथ ही आकाशीय बिजली गिरने और बादलों के गरजने का भी यलो अलर्ट जारी किया गया है। खराब मौसम के दौरान लोगों को खुले मैदानों में न जाने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी गई है।
IMD के विस्तृत पूर्वानुमान के मुताबिक, झारखंड में 9 से 11 सितंबर के बीच भारी बारिश की गतिविधियां अपने चरम पर रहेंगी। इसके बाद भी मौसम पूरी तरह साफ नहीं होगा, क्योंकि 12 से 14 सितंबर के दौरान भी राज्य के कई इलाकों में रुक-रुक कर बारिश और गरज-चमक का सिलसिला लगातार बने रहने की उम्मीद है।
ओडिशा में नए कम दबाव के क्षेत्र से बढ़ेगा खतरा
पूर्वी भारत के तटीय राज्य ओडिशा के लिए आने वाले कुछ दिन अत्यंत महत्वपूर्ण और चिंताजनक होने वाले हैं। 9 सितंबर को राज्य के विभिन्न हिस्सों में भारी बारिश होने का अनुमान है, लेकिन असली खतरा 10 सितंबर को सामने आएगा जब बारिश की तीव्रता और अधिक बढ़ जाएगी। IMD ने 10 सितंबर को ओडिशा के कई जिलों में बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है।
इसके साथ ही, मौसम विभाग ने जानकारी दी है कि 11 सितंबर के आस-पास पश्चिम-मध्य और उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी के ऊपर, तथा उत्तर आंध्र प्रदेश और दक्षिण ओडिशा तट के समीप एक नया निम्न दबाव का क्षेत्र (लो प्रेसर एरिया) आकार ले सकता है। यह नया मौसमी सिस्टम आने वाले दिनों में बारिश की गतिविधियों को और अधिक तीव्र कर देगा। इसी कारण से 10 से 12 सितंबर के बीच ओडिशा में मौसम का मिजाज काफी बिगड़ा हुआ रहने की आशंका जताई गई है।
पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर के राज्यों में मानसून का रौद्र रूप
गंगीय पश्चिम बंगाल के मैदानी इलाकों में 9 सितंबर को भारी बारिश के साथ-साथ तेज हवाएं चलने, बिजली कड़कने और वज्रपात होने की गंभीर चेतावनी दी गई है। उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम के पर्वतीय इलाकों में भी लगातार बारिश की गतिविधियां जारी रहने का अनुमान है, जिससे भूस्खलन का खतरा बना रहेगा और यातायात प्रभावित हो सकता है।
पूर्वोत्तर भारत की बात करें तो अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय के सुदूर क्षेत्रों में कई जगहों पर भारी से बहुत भारी वर्षा होने की आशंका है। इसके अलावा नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा जैसे राज्यों में भी मानसून पूरी तरह सक्रिय रहेगा। मौसम विभाग का मानना है कि आने वाले दिनों में पूर्वोत्तर भारत के इन पर्वतीय क्षेत्रों में बारिश का दायरा और अधिक व्यापक हो जाएगा, जिससे स्थानीय नदी-नालों में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
पश्चिमी और मध्य भारत में वर्षा का नया चरण
देश के पश्चिमी हिस्सों में स्थित कोंकण और गोवा के तटीय इलाकों में मानसूनी बारिश का सिलसिला बिना किसी रुकावट के लगातार जारी रहने वाला है। 9 सितंबर को भी इन क्षेत्रों में मध्यम से भारी बारिश होने की संभावना है। इसके साथ ही, मध्य महाराष्ट्र और मराठवाड़ा के क्षेत्रों में भी कुछ स्थानों पर गरज-चमक के साथ हल्की बौछारें पड़ने की उम्मीद है।
गुजरात, सौराष्ट्र और कच्छ के शुष्क क्षेत्रों में भी छिटपुट मानसूनी बारिश दर्ज की जा सकती है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, पश्चिमी भारत में बारिश का असली दौर 12 और 13 सितंबर के आस-पास अधिक प्रभावी होगा। इन दिनों में गुजरात और कोंकण-गोवा के इलाकों के लिए मौसम विभाग ने विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है।
दक्षिण भारत में तेज हवाओं और उमस का प्रकोप
दक्षिण भारत के राज्यों में भी 9 सितंबर को मौसम काफी सक्रिय रहने वाला है। आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल के तटीय क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चलने की आशंका व्यक्त की गई है। इस दौरान तटीय क्षेत्रों में हवा की गति 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है, जो सामान्य जनजीवन को प्रभावित कर सकती है।
तेलंगाना राज्य में भी गरज-चमक, आकाशीय बिजली और तेज हवाओं का मिलाजुला असर देखने को मिलेगा। इसके विपरीत, केरल और माहे के निवासियों को फिलहाल गर्म और उमस भरे मौसम का सामना करना पड़ सकता है, हालांकि जल्द ही वहां भी मानसूनी बारिश की वापसी होने की उम्मीद है। तटीय आंध्र प्रदेश के क्षेत्रों में उमस का स्तर काफी ऊंचा रहेगा, जिससे लोगों को परेशानी होगी।
समुद्र में चलने वाली विनाशकारी हवाओं को लेकर विशेष चेतावनी
मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने समुद्र में उठने वाले तूफान को लेकर भी अत्यंत गंभीर चेतावनी जारी की है। अरब सागर के सोमालिया और ओमान तटवर्ती क्षेत्रों में हवा की गति सामान्य से बहुत अधिक रहने की आशंका जताई गई है। इन क्षेत्रों में तूफानी हवाओं की रफ्तार 45 से 55 किलोमीटर प्रति घंटे रहने का अनुमान है, जो झोंकों के रूप में बढ़कर 65 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है।
इसके साथ ही, बंगाल की खाड़ी और अंडमान सागर में भी आने वाले दिनों में समुद्री परिस्थितियां अत्यंत प्रतिकूल और अशांत रहने की संभावना है। मौसम विभाग ने गहरे समुद्र में जाने वाले मछुआरों और नौवहन गतिविधियों से जुड़े सभी लोगों को सख्त हिदायत दी है कि वे इन दिनों समुद्र में न जाएं और मौसम की चेतावनियों का पूरी तरह से पालन करें ताकि किसी भी प्रकार की दुर्घटना से बचा जा सके।
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