राष्ट्रीय राजनीति
एक घंटा पहले
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भारतीय वायुसेना (आईएएफ) के प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह का तीन दिवसीय फ्रांस दौरा ऐसे वक्त में हुआ, जब भारत और फ्रांस के बीच रक्षा सहयोग लगातार नई ऊंचाइयां छू रहा है। राफेल लड़ाकू विमान सौदे के बाद दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी और मजबूत हुई है, और वायुसेना प्रमुख का यह दौरा इसी रिश्ते को और आगे ले जाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
फ्रांसीसी सैन्य नेतृत्व से व्यापक बातचीत
फ्रांस प्रवास के दौरान एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने फ्रांसीसी वायु एवं अंतरिक्ष सेना के प्रमुख जनरल जेरोम बेलांजे के साथ विस्तृत चर्चा की। दोनों सैन्य नेताओं ने रक्षा सहयोग, संयुक्त सैन्य अभ्यास, तकनीकी साझेदारी और भविष्य की रणनीतिक जरूरतों जैसे विषयों पर बात की। इस दौरान उन्हें फ्रांसीसी सेना की ओर से औपचारिक सैन्य सम्मान भी दिया गया।
दौरे में वायुसेना प्रमुख ने फ्रांस के राष्ट्रपति के सैन्य प्रमुख जनरल विन्सेंट गिराउड से भी मुलाकात की। इसके अलावा उन्होंने फ्रांस के प्रतिष्ठित वॉर कॉलेज में अधिकारियों और भारतीय कैडेटों को संबोधित किया।
ए-400एम विमान में भरी उड़ान
एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने मॉन्ट-डी-मार्सां एयर कॉम्बैट सेंटर का दौरा किया। यहां उन्होंने ए-400एम सैन्य परिवहन विमान में उड़ान भरकर उसकी क्षमताओं का करीब से अवलोकन किया।
राफेल निर्माता डसॉल्ट समेत प्रमुख कंपनियों से मुलाकात
इस पूरे दौरे का सबसे अहम पहलू फ्रांस की प्रमुख रक्षा कंपनियों डसॉल्ट एविएशन, थेल्स, सफरान और एमबीडीए के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हुई बैठकें रहीं। डसॉल्ट वही कंपनी है जिसने भारतीय वायुसेना के लिए राफेल लड़ाकू विमान तैयार किए हैं।
माना जा रहा है कि इन बैठकों में रक्षा उत्पादन, तकनीकी हस्तांतरण, रखरखाव में सहयोग और 'मेक इन इंडिया' पहल के तहत भारत में रक्षा निर्माण बढ़ाने से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।
हथियार खरीदार से निर्माता बनने की ओर भारत
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत अब सिर्फ हथियार खरीदने वाला देश बनकर नहीं रहना चाहता, बल्कि अत्याधुनिक रक्षा तकनीक के निर्माण और विकास में भी अपनी भागीदारी बढ़ाने पर जोर दे रहा है। ऐसे में वायुसेना प्रमुख का यह दौरा राफेल सौदे के बाद भारत-फ्रांस रक्षा संबंधों के अगले चरण की नींव रखने वाला कदम माना जा रहा है।
जानकारों के अनुसार, भारत और फ्रांस के बीच बढ़ता रक्षा सहयोग हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सामरिक संतुलन बनाए रखने और दोनों देशों की सैन्य क्षमताओं को और सशक्त बनाने में अहम भूमिका निभा सकता है।
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