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एक घंटा पहले
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रेट्रो युग की यादें
दशहरे की खुशियों के बाद और दिवाली की जगमगाहट शुरू होने से पहले, हैदराबाद का मशहूर एबिड्स इलाका इन दिनों एक ऐतिहासिक और रेट्रो अंदाज में नजर आ रहा है। सुजाता स्कूल के पास सजी हुई 1920 से 1950 के दशक की दुर्लभ विंटेज कारें लोगों के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र बन गई हैं। खरीदारी के लिए उमड़ने वाली भीड़ के बीच जब लोग अचानक इन शानदार क्लासिक गाड़ियों को देखते हैं, तो वे एक सदी पुराने दौर की यादों में खो जाते हैं। यह प्रदर्शनी इंजीनियरिंग के उस स्वर्णिम युग को जीवंत कर रही है, जब ऑटोमोबाइल की बनावट में कला और मजबूती का अद्भुत मेल हुआ करता था।
आयुध पूजा और ऐतिहासिक वैभव
हैदराबाद के चैपल रोड का पूरा वातावरण इन दिनों बदला हुआ महसूस हो रहा है। दशहरे के पावन अवसर पर यहाँ की परंपरा के अनुसार आयुध पूजा का आयोजन किया गया था। इस खास अनुष्ठान के दौरान सभी ऐतिहासिक वाहनों की बेहद बारीकी से साफ-सफाई और आवश्यक मरम्मत की गई। पीले और नारंगी रंग के ताजे गेंदे के फूलों की सुंदर मालाओं से सजी ये गाड़ियां अपनी पूरी भव्यता के साथ सड़क के किनारे खड़ी हैं। स्थानीय लोगों और राहगीरों के लिए इन गाड़ियों का दीदार करना एक यादगार अनुभव बन गया है, और यह विशेष प्रदर्शन दिवाली के त्योहार तक जारी रहने वाला है।
संग्रह में शामिल दुर्लभ मॉडल
इस अनूठे प्रदर्शनी में ऑटोमोबाइल इतिहास के कई ऐसे मॉडल मौजूद हैं, जिन्हें देखना आज के समय में मुश्किल है। इन खास मॉडल्स में मुख्य रूप से 1929 का क्लासिक ओपन-टॉप रोडस्टर, 1934 की ऑस्टिन-7, 1936 की ब्यूइक कन्वर्टिबल और 1954 की शानदार अमेरिकन क्लासिक गाड़ियां शामिल हैं। केवल कारें ही नहीं, बल्कि पास की लेन में विंटेज बाइक्स और पुराने स्कूटर्स का एक बड़ा और दुर्लभ संग्रह भी करीने से कतारबद्ध खड़ा है, जो दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देता है।
कैप्टन पेस्टनजी का जुनून
यह अद्भुत और दुर्लभ संग्रह किसी म्यूजियम का नहीं, बल्कि हैदराबाद के प्रसिद्ध ब्रांड चेरमास के संस्थापक और पूर्व नेशनल रेसर कैप्टन के. एफ. पेस्टनजी का निजी संग्रह है। वर्षों की कड़ी मेहनत और गाड़ियों के प्रति गहरे समर्पण के कारण यह संभव हो पाया है कि ये गाड़ियां आज भी पूरी तरह से चालू हालत में हैं। कैप्टन पेस्टनजी की गाड़ियों के प्रति दीवानगी ही है कि आज दशकों बाद भी ये मशीनें सड़क पर पूरी शान के साथ दिखाई देती हैं। उनका यह शौक केवल एक संग्रह मात्र नहीं, बल्कि ऑटोमोबाइल इतिहास के प्रति उनके लगाव का प्रमाण है।
रखरखाव का बारीकी से ध्यान
भारत की मशीनों और औजारों की पूजा करने की संस्कृति के तहत इन ऐतिहासिक वाहनों का विशेष ध्यान रखा जाता है। पूजा की प्रक्रिया के दौरान इनके इंजन की सर्विसिंग से लेकर बॉडीवर्क को चमकाने तक का काम बेहद बारीकी से किया गया है। हर साल दशहरे के अवसर पर यह सुनिश्चित किया जाता है कि ये गाड़ियां भविष्य के लिए भी सुरक्षित और चालू रहें। पूजा संपन्न होने के पश्चात, जनता को इन दुर्लभ कारों को करीब से देखने का अवसर मिलता है ताकि वे इस सांस्कृतिक और इंजीनियरिंग विरासत को समझ सकें।
सेल्फी और सोशल मीडिया का केंद्र
दिवाली की खरीदारी के लिए एबिड्स आने वाले लोग इन चमचमाती विंटेज कारों को देखकर अपनी गति धीमी कर लेते हैं। फिल्मों में दिखाई देने वाली ये गाड़ियां आज के युवाओं और सोशल मीडिया क्रिएटर्स के लिए एक बेहतरीन सेल्फी स्पॉट बन चुकी हैं। लोग इन विंटेज मॉडल्स के साथ अपनी तस्वीरें खिंचवा रहे हैं और इंस्टाग्राम रील्स बनाकर इस अनुभव को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा कर रहे हैं। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और व्यस्त ट्रैफिक के बीच, ये क्लासिक गाड़ियां एक सुकून और विरासत का संगम प्रस्तुत करती हैं। यह प्रदर्शनी नई पीढ़ी को इतिहास से जोड़ने और पुरानी कारीगरी की सराहना करने का एक शानदार अवसर प्रदान कर रही है।
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