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एक घंटा पहले
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आबिड्स के नाम के पीछे की अनसुनी कहानी
हैदराबाद को नवाबों और निज़ामों का शहर कहा जाता है, जहाँ की हर गली और चौराहे का अपना एक इतिहास है। इसी शहर में एक ऐसा बाजार है जिसे आज लोग आबिड्स के नाम से जानते हैं। आमतौर पर माना जाता है कि ऐतिहासिक शहरों में प्रमुख स्थानों के नाम राजाओं या महान हस्तियों के नाम पर रखे जाते हैं, लेकिन आबिड्स का मामला बिल्कुल अलग है। इस इलाके का नाम किसी निज़ाम ने नहीं, बल्कि छठे निज़ाम के एक आर्मेनियाई सहायक अल्बर्ट आबिद के नाम पर पड़ा था।
अल्बर्ट आबिद का आलीशान स्टोर
19वीं सदी के दौर में अल्बर्ट आबिद ने इस क्षेत्र में एक आलीशान स्टोर की शुरुआत की थी, जिसका नाम आबिद एंड कंपनी रखा गया था। उस समय यह स्टोर अपनी तरह का अनूठा था और इसकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि तत्कालीन निज़ाम खुद यहाँ खरीदारी करने के लिए आते थे। अपनी बेहतरीन सेवाओं और उत्पादों के कारण यह दुकान पूरे शहर में आकर्षण का केंद्र बन गई थी।
समय के साथ आया बड़ा बदलाव
समय के चक्र ने इस ऐतिहासिक जगह की पहचान को कई बार बदला है। 1939 में उस मूल इमारत को ढहा दिया गया, जहाँ कभी अल्बर्ट आबिद का स्टोर हुआ करता था। उस स्थान पर पैलेस टॉकीज़ का निर्माण किया गया, जो अपने दौर का मशहूर सिनेमाघर रहा। आगे चलकर 1980 के दशक में एक बार फिर बदलाव हुआ और पैलेस टॉकीज़ की जगह एक आधुनिक शॉपिंग कॉम्प्लेक्स खड़ा कर दिया गया।
आज भी बरकरार है पहचान
इमारतों के बार-बार बदलने और नई संरचनाओं के आने के बावजूद, इस इलाके का नाम नहीं बदला। आज भी आबिड्स हैदराबाद के मुख्य व्यावसायिक केंद्रों में से एक है। अल्बर्ट आबिद का नाम शहर के नक्शे पर एक अमिट छाप की तरह दर्ज हो चुका है, जो यह याद दिलाता है कि इतिहास केवल राजमहलों की कहानी नहीं है, बल्कि आम लोगों और उनके योगदान से भी बनता है।
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