गन्ने की खेती में रेड रॉट का खतरा: मानसून में इन बातों का रखें ध्यान वरना बर्बाद हो जाएगी पूरी फसल उत्तर प्रदेश 8 घंटे पहले 6
मानसून का मौसम गन्ने की फसल के लिए काफी संवेदनशील होता है, जहाँ नमी और जलभराव के कारण फसलों में गंभीर बीमारियाँ पनप सकती हैं।

मानसून और गन्ने की फसल की सुरक्षा

गन्ने की खेती के लिए बारिश का मौसम वरदान साबित हो सकता है, लेकिन यह दौर फसल के लिए काफी नाजुक भी होता है। शाहजहांपुर के किसान रनजोद सिंह का कहना है कि जरा सी चूक किसानों की पूरी मेहनत को मिट्टी में मिला सकती है। मानसून के दौरान सबसे बड़ी चुनौती खेतों में जलभराव की समस्या है। जब पानी लंबे समय तक जड़ों के पास जमा रहता है, तो गन्ने के पौधे पीले पड़ने लगते हैं और उनका विकास पूरी तरह से रुक जाता है।

फसल को बचाने के लिए जरूरी उपाय

बारिश के मौसम में तेज हवाएं चलने के कारण गन्ने के गिरने का खतरा काफी बढ़ जाता है। इस समस्या से निपटने के लिए किसानों को समय रहते गन्ने की बंधाई कर लेनी चाहिए ताकि फसल को आवश्यक सहारा मिल सके। इसके अतिरिक्त, इस मौसम में नमी और उमस का स्तर काफी बढ़ जाता है, जो कीड़ों और बीमारियों के पनपने के लिए बिल्कुल सही वातावरण है।

गन्ने का कैंसर और कीटों का प्रकोप

मानसून में पायरिला और टॉप बोरर जैसे कीट फसल को बुरी तरह प्रभावित करते हैं। इन सबके बीच रेड रॉट यानी गन्ने का कैंसर एक गंभीर फंगस जनित बीमारी है, जो बहुत तेजी से पूरे खेत में फैलती है। इस बीमारी के फैलने से पूरी फसल तबाह हो सकती है, इसलिए किसानों को अपने खेतों की नियमित निगरानी करते रहना चाहिए।

चेतन तिवारी पाबना के उत्तर प्रदेश संवाददाता हैं और राज्य की राजनीति, प्रशासन तथा जमीनी मुद्दों को कवर करते हैं। लखनऊ में रहते हुए वे जिलों से लेकर विधानसभा तक की खबरें संतुलित रिपोर्टिंग के साथ पाठकों तक पहुंचाते हैं। आम लोगों के मुद्दों और स्थानीय घटनाओं पर उनका खास फोकस रहता है।

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