हूती विद्रोहियों का मयून द्वीप पर कब्जा, दुनिया के 12 फीसदी व्यापार पर मंडराया बड़ा खतरा विश्व एक घंटा पहले 3
यमन के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मयून द्वीप पर हूती विद्रोहियों ने नियंत्रण कर लिया है। इस घटनाक्रम से दुनिया के समुद्री व्यापारिक मार्ग पर सुरक्षा का गंभीर संकट पैदा हो गया है।

मयून द्वीप पर हूती विद्रोहियों का नियंत्रण

सऊदी अरब समर्थित गठबंधन और हूती विद्रोहियों के बीच लंबे समय से चल रहे संघर्ष के दौरान एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने अब बाब अल-मंदेब स्ट्रेट में स्थित बेहद अहम मयून द्वीप पर अपना अधिकार जमा लिया है। इस बात की पुष्टि केवल हूती विद्रोहियों ने ही नहीं की, बल्कि यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के अधिकारियों ने भी इसे स्वीकार किया है। यह क्षेत्र रणनीतिक दृष्टि से समुद्री व्यापार के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है।

यमन की सेना पीछे हटी

यमन सरकार के एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी के अनुसार, हूती विद्रोहियों के बढ़ते प्रभाव के बीच सरकारी बलों को गुरुवार के दिन मयून द्वीप से पीछे हटना पड़ा। दूसरी ओर, हूती गुट के एक प्रवक्ता ने भी इसकी पुष्टि की है कि उनके लड़ाके अब इस द्वीप पर मौजूद हैं। भौगोलिक रूप से इस द्वीप को पेरिम के नाम से भी जाना जाता है और यह यमन के पश्चिमी तट से लगभग 3.5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। सुरक्षा कारणों और मीडिया से बात करने की अनुमति न होने के कारण इन अधिकारियों ने अपना नाम उजागर नहीं करने की शर्त पर यह जानकारी दी है।

वैश्विक व्यापार पर बढ़ता संकट

बाब अल-मंदेब स्ट्रेट को होर्मुज स्ट्रेट का एक अत्यंत महत्वपूर्ण विकल्प माना जाता है, विशेष रूप से तब जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के चलते होर्मुज मार्ग से व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित हुई हैं। उल्लेखनीय है कि होर्मुज मार्ग से दुनिया की करीब 20 प्रतिशत ईंधन आपूर्ति होती थी। अब हूती विद्रोहियों द्वारा इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग के रणनीतिक बिंदु पर कब्जा कर लेने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। विद्रोहियों का दावा है कि उनकी इस कार्रवाई का उद्देश्य सऊदी अरब के समुद्री बेड़ों को निशाना बनाना है।

क्यों अहम है मयून द्वीप की स्थिति?

नक्शे पर गौर करें तो मयून द्वीप बाब अल-मंदेब स्ट्रेट के बीचोबीच स्थित है, जो यमन के पश्चिमी तट से महज साढ़े तीन किलोमीटर पश्चिम में है। यह स्थिति इसे बेहद संवेदनशील बनाती है। अब यहां से गुजरने वाला कोई भी व्यापारिक जहाज हूती विद्रोहियों की सीधी पकड़ और हमले की जद में होगा, जिससे आने वाले दिनों में समुद्री सुरक्षा का जोखिम कई गुना बढ़ गया है।

बाब अल-मंदेब का रणनीतिक महत्व

बाब अल-मंदेब स्ट्रेट अरब प्रायद्वीप के दक्षिणी छोर पर स्थित है। यह जलमार्ग अरब की खाड़ी को लाल सागर से जोड़ने वाला एक प्रमुख चोकपॉइंट है। वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए इसका महत्व इसी बात से समझा जा सकता है कि दुनिया का लगभग 12 प्रतिशत व्यापार इसी संकरे रास्ते से होता है। इसके अतिरिक्त, वैश्विक कंटेनर ट्रैफिक का 25 प्रतिशत हिस्सा भी इसी समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है।

तेजी से बदली सुरक्षा स्थिति

जुलाई के महीने तक स्थिति पूरी तरह अलग थी, जब हूती विद्रोही बाब अल-मंदेब स्ट्रेट से लगभग 100 किलोमीटर की दूरी पर थे और यमन का तटीय इलाका उनके कब्जे से बाहर था। लेकिन अब मयून द्वीप पर काबिज होने के बाद, विद्रोही इस महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग से गुजरने वाले हर छोटे-बड़े जहाज पर अपनी पैनी नजर रखने में सक्षम हो गए हैं।

साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

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