सऊदी अरब पर हूती हमले से पाकिस्तान की बढ़ी चिंता, ईरान को दी सख्त चेतावनी विश्व 2 घंटे पहले 2
सऊदी अरब पर हूती विद्रोहियों द्वारा किए गए ताजा हमले के बाद पाकिस्तान ने ईरान को चेताया है। पाकिस्तान ने अपने रक्षा समझौते का हवाला देते हुए ईरान से हूतियों पर लगाम कसने की मांग की है।

सऊदी अरब पर हूतियों का हमला और पाकिस्तान की प्रतिक्रिया

मध्य पूर्व में हूती विद्रोहियों की आक्रामकता ने अब वैश्विक स्तर पर हलचल पैदा कर दी है। सऊदी अरब पर हूतियों द्वारा किए गए हालिया हमले ने पाकिस्तान की नींद उड़ा दी है। इस स्थिति को देखते हुए पाकिस्तान ने ईरान को एक कड़ा संदेश भेजा है। पाकिस्तान ने सऊदी अरब के साथ मौजूद अपने द्विपक्षीय रक्षा समझौते का जिक्र करते हुए ईरान से स्पष्ट रूप से कहा है कि वह हूती विद्रोहियों की गतिविधियों को नियंत्रित करे। इस बीच यमन के मोचा शहर पर हूतियों का नियंत्रण स्थापित हो जाने के बाद लाल सागर और बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य के इलाकों में सुरक्षा को लेकर नए संकट खड़े हो गए हैं।

हमले में 73 लोग जख्मी

हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के क्षेत्रों को निशाना बनाया है। इस हमले के कारण 73 लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई है। इस हिंसा के जवाब में सऊदी अरब ने भी यमन के भीतर जवाबी हवाई हमले किए हैं। सऊदी अरब पर हुए इस हमले के प्रति पाकिस्तान ने अपना कड़ा रुख स्पष्ट कर दिया है। इस्लामाबाद ने अपने और रियाद के बीच मौजूद रक्षा समझौते को याद दिलाते हुए तेहरान से मांग की है कि वह अपने प्रभाव का उपयोग करे और हूतियों को सऊदी अरब पर किसी भी प्रकार की सैन्य कार्रवाई करने से रोके।

पाकिस्तान का स्टैंड और रक्षा समझौता

पाकिस्तान का ईरान को चेतावनी देने के पीछे मुख्य कारण सऊदी अरब के साथ उसका रणनीतिक रक्षा समझौता है। पाकिस्तान का कहना है कि सऊदी अरब की संप्रभुता पर किसी भी तरह का खतरा उत्पन्न होने पर उनका रक्षा समझौता सक्रिय हो सकता है। पाकिस्तान का संकेत बिल्कुल सीधा है कि यदि हूती विद्रोही सऊदी अरब को निशाना बनाना जारी रखते हैं, तो क्षेत्रीय स्थिति बेहद विस्फोटक हो सकती है। यही कारण है कि पाकिस्तान चाहता है कि ईरान हूतियों के ऊपर अपना दबदबा कायम रखे।

मोचा शहर का रणनीतिक महत्व

इसी तनावपूर्ण माहौल के बीच खबर आई है कि हूती विद्रोहियों ने यमन के मोचा शहर पर अपना कब्जा जमा लिया है। मोचा शहर लाल सागर के किनारे स्थित होने के कारण भौगोलिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। जानकारों का मानना है कि इस शहर पर कब्जे के बाद हूतियों की ताकत बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य तक और अधिक बढ़ गई है। यह समुद्री गलियारा लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ने का एक प्रमुख माध्यम है। सऊदी अरब पर लगातार हो रहे हमलों के कारण अब अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों के बीच यह चर्चा भी तेज हो गई है कि क्या पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच मौजूद रक्षा सुरक्षा समीकरणों की प्रासंगिकता अब कमजोर पड़ रही है।

समुद्री व्यापार पर संकट के बादल

बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए एक जीवन रेखा के समान है। इस क्षेत्र में अस्थिरता का सीधा असर वैश्विक समुद्री व्यापार और मालवाहक जहाजों की आवाजाही पर पड़ सकता है। मोचा पर हूतियों का अधिकार केवल एक क्षेत्रीय घटना नहीं है, बल्कि यह पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय है। लाल सागर में उनकी मौजूदगी क्षेत्र की सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बनती जा रही है।

ईरान पर टिकी दुनिया की नजरें

हूती विद्रोहियों को ईरान का प्रत्यक्ष या परोक्ष समर्थन प्राप्त होने के आरोप लंबे समय से लगते रहे हैं। यही कारण है कि पाकिस्तान ने अपनी कूटनीति के तहत सीधे ईरान से सवाल किया है। एक ओर पाकिस्तान रक्षा समझौते की दुहाई दे रहा है, तो दूसरी ओर सऊदी अरब ने यमन में सैन्य कार्रवाई तेज कर दी है। इन घटनाक्रमों ने पाकिस्तान, ईरान, सऊदी अरब और हूतियों के बीच तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है। अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि पाकिस्तान की चेतावनी के बाद ईरान क्या कदम उठाता है और हूती विद्रोही अपनी अगली चाल क्या चलेंगे।

साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

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