होर्मुज में बढ़ता टकराव: ओमान तट पर अमेरिकी कार्रवाई में तीन भारतीयों की मौत, भारत-अमेरिका रिश्तों पर मंडराया नया खतरा राष्ट्रीय राजनीति 3 घंटे पहले 4
ओमान तट के पास एक तेल टैंकर पर अमेरिकी सैन्य कार्रवाई में तीन भारतीय नाविकों की जान चली गई, जिस पर भारत ने कड़ा विरोध जताया है। होर्मुज जलडमरूमध्य का संकट गहराने के साथ ही दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव बढ़ता दिख रहा है।

पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच टकराव लगातार गहरा रहा है और इसी बीच ओमान तट के पास एक तेल टैंकर पर हुई अमेरिकी सैन्य कार्रवाई ने भारत और अमेरिका के रिश्तों के सामने एक नई चुनौती खड़ी कर दी है। इस कार्रवाई में तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई, जिसने दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव को और बढ़ा दिया है। विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर ऐसी घटनाएं बार-बार होती हैं तो इसका असर भारत-अमेरिका की रणनीतिक साझेदारी पर भी पड़ सकता है।

क्या हुआ ओमान तट पर

पलाऊ के झंडे वाले तेल टैंकर एमटी सेटेबेलो पर अमेरिकी सेना ने ओमान तट के नजदीक कार्रवाई की। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) का दावा है कि इस जहाज ने अमेरिकी बलों के निर्देशों का पालन नहीं किया और वह ईरानी तेल लेकर जा रहा था। अमेरिकी विमान ने टैंकर के इंजन रूम को निशाना बनाते हुए प्रिसिजन स्ट्राइक की।

जहाज पर सवार 24 भारतीय नाविकों में से 21 को सुरक्षित बचा लिया गया, जबकि तीन नाविकों को शुरू में लापता बताया गया था। बाद में केंद्रीय जहाजरानी मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने उनकी मौत की पुष्टि कर दी।

भारत ने तलब किया अमेरिकी डिप्लोमेट

इस घटना के बाद भारत सरकार ने नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास के उप प्रमुख जेसन मीक्स को तलब कर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट कहा कि क्षेत्र में वाणिज्यिक जहाजों और नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने का सिलसिला तत्काल बंद होना चाहिए। माना जा रहा है कि भारत का यह बयान महज एक राजनयिक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि अमेरिकी कार्रवाई पर गहरी असहमति का संकेत है।

चिंता इसलिए भी और बढ़ गई है क्योंकि इसी सप्ताह अमेरिकी बलों ने भारतीय चालक दल वाले एक अन्य टैंकर मैरीवेक्स पर भी कार्रवाई की थी। हालांकि उस घटना में सभी नाविक सुरक्षित बच गए थे, लेकिन लगातार दो घटनाओं ने भारतीय समुद्री समुदाय और सरकार दोनों की चिंता बढ़ा दी है।

होर्मुज संकट की असल जड़

इस पूरे विवाद की बुनियाद ईरान के खिलाफ अमेरिका की नौसैनिक नाकेबंदी है। अप्रैल में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर दबाव बनाने के मकसद से समुद्री नाकेबंदी का आदेश दिया था। अमेरिका का आरोप है कि युद्ध के बावजूद ईरान अपना तेल निर्यात जारी रखे हुए है। वहीं दूसरी ओर ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में आवाजाही को प्रभावित कर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बढ़ा दिया है। दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल और गैस का कारोबार इसी रास्ते से होता है।

भारत के लिए क्यों संवेदनशील है यह स्थिति

भारत के लिए यह हालात खासतौर पर नाजुक हैं। एक ओर अमेरिका उसका प्रमुख रणनीतिक और रक्षा साझेदार है, तो दूसरी ओर भारत की ऊर्जा सुरक्षा और व्यापारिक हित पश्चिम एशिया की स्थिरता से सीधे जुड़े हुए हैं। भारत के तेल आयात का बड़ा हिस्सा होर्मुज मार्ग से होकर गुजरता है। ऐसे में इस क्षेत्र में बढ़ता सैन्य तनाव नई दिल्ली के लिए दोहरी चुनौती बन गया है।

संयुक्त राष्ट्र की अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) ने भी इस घटना की निंदा की है। संगठन के महासचिव आर्सेनियो डोमिंगुएज ने कहा कि किसी भी पक्ष की ऐसी कोई कार्रवाई, जिससे नाविकों की जान खतरे में पड़े, स्वीकार्य नहीं है।

क्या इतने कमजोर हैं भारत-अमेरिका रिश्ते

अब सवाल यह उठता है कि क्या भारत और अमेरिका के संबंध इतने कमजोर हैं कि किसी एक घटना से उनमें दरार पड़ जाएगी? विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों के रिश्ते किसी इकलौती घटना से टूटने वाले नहीं हैं, लेकिन भारतीय नागरिकों की मौत का मुद्दा राजनीतिक और कूटनीतिक स्तर पर लंबे समय तक गूंज सकता है। खासकर तब, जब भारत अपने नागरिकों और समुद्री कर्मियों की सुरक्षा को लेकर पहले से कहीं अधिक मुखर रुख अपना रहा है।

फिलहाल भारत की प्राथमिकता क्या

इस समय नई दिल्ली की पहली प्राथमिकता मृत नाविकों के शवों को स्वदेश लाना और घटना से जुड़ी पूरी जानकारी हासिल करना है। लेकिन बड़ा सवाल यही है कि क्या होर्मुज में बढ़ता टकराव और अमेरिकी सैन्य कार्रवाई भारत-अमेरिका संबंधों पर स्थायी असर डालेगी। आने वाले दिनों में वॉशिंगटन की प्रतिक्रिया और दोनों देशों के बीच होने वाली कूटनीतिक बातचीत ही इस सवाल का जवाब तय करेगी।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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