मेनोपॉज के दौरान क्यों परेशान करती हैं घबराहट और ब्लोटिंग जैसी समस्याएं? डॉक्टर से जानें बचाव के आसान तरीके जीवनशैली 7 घंटे पहले 3
महिलाओं के जीवन में मेनोपॉज एक महत्वपूर्ण और स्वाभाविक पड़ाव है, जो 45 से 55 वर्ष की उम्र के बीच होता है। इस दौरान होने वाले शारीरिक व मानसिक बदलावों और उनसे बचाव के उपायों पर अंबाला की होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. रजिता ने अहम जानकारी दी है।

मेनोपॉज और महिलाओं की सेहत पर इसका प्रभाव

पीरियड्स की तरह ही मेनोपॉज भी महिलाओं की जिंदगी का एक बेहद अहम और स्वाभाविक चरण होता है। सामान्य तौर पर यह स्थिति 45 से 55 वर्ष की आयु के बीच देखने को मिलती है। मेनोपॉज होने का मतलब सिर्फ मासिक धर्म का स्थायी रूप से बंद होना ही नहीं है, बल्कि इसका असर महिला के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों पर स्पष्ट रूप से पड़ता है।

इस दौरान सामने आने वाले मुख्य लक्षण

अंबाला की होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. रजिता के अनुसार, इस पड़ाव में प्रवेश करते ही महिलाओं को कई तरह की शारीरिक व मानसिक दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। इनमें मुख्य रूप से ये परेशानियां शामिल हैं:

  • घबराहट और चिड़चिड़ापन: मानसिक तनाव और मन में बेचैनी की भावना बढ़ना।
  • पेट में भारीपन: पाचन क्रिया प्रभावित होने से पेट भारी महसूस होना।
  • ब्लोटिंग और एसिडिटी: पेट में गैस बनना, पेट फूलना और जलन होना।

खानपान और जीवनशैली में सुधार है जरूरी

इन स्वास्थ्य समस्याओं के प्रभाव को कम करने के लिए डॉ. रजिता ने सही खानपान और बेहतर जीवनशैली अपनाने पर विशेष जोर दिया है। उनके अनुसार, इस समय शरीर में तरल पदार्थों का संतुलन बनाए रखना बेहद आवश्यक होता है।

राहत पाने के व्यावहारिक उपाय

मेनोपॉज के दौरान होने वाली परेशानियों से बचने के लिए शरीर को पर्याप्त रूप से हाइड्रेटेड रखें। इसके लिए अपनी दिनचर्या में निम्नलिखित पेय पदार्थों को शामिल किया जा सकता है:

  • पर्याप्त पानी: दिन भर नियमित रूप से साफ और पर्याप्त पानी पीएं।
  • नारियल पानी: शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का स्तर बनाए रखने के लिए नारियल पानी का सेवन करें।
  • नींबू पानी: पाचन तंत्र को बेहतर रखने के लिए नींबू पानी मददगार है।
  • लस्सी: पेट को ठंडा रखने और ब्लोटिंग से राहत पाने के लिए लस्सी को अपनी डाइट में शामिल करें।
अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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