अच्छी डाइट लेने के बाद भी होती है क्रेविंग? जानें किस विटामिन या मिनरल की हो सकती है कमी जीवनशैली एक घंटा पहले 3
संतुलित खानपान के बावजूद बार-बार मीठा, नमकीन या तीखा खाने की इच्छा होना सिर्फ स्वाद की चाह नहीं, बल्कि पोषक तत्वों की कमी, तनाव या डिहाइड्रेशन जैसे संकेत भी हो सकते हैं। जानिए इसके पीछे की असली वजहें।

क्या आपके साथ भी ऐसा होता है कि रोज़ संतुलित भोजन लेने, फल-सब्जियां खाने और डाइट का पूरा ध्यान रखने के बावजूद अचानक कुछ मीठा, नमकीन या तीखा खाने का मन करने लगता है? इसे ही फूड क्रेविंग कहा जाता है। ज़्यादातर लोग इसे केवल स्वाद की चाह मान लेते हैं, लेकिन कई बार यह शरीर में पोषक तत्वों की कमी या किसी अन्य स्वास्थ्य संकेत की ओर भी इशारा कर सकती है।

मीठा खाने की इच्छा क्यों होती है

अगर बार-बार मीठा खाने का मन करता है तो इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं। कई बार शरीर को तुरंत ऊर्जा की ज़रूरत होती है, ऐसे में दिमाग मीठी चीज़ों की मांग करने लगता है। पर्याप्त नींद न लेना, लगातार तनाव में रहना या लंबे समय तक खाली पेट रहना भी मीठे की चाह को बढ़ा सकता है। कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि मैग्नीशियम जैसे मिनरल की कमी का संबंध भी मीठा खाने की क्रेविंग से हो सकता है।

चॉकलेट की बार-बार तलब क्यों

अगर आपको बार-बार चॉकलेट खाने का मन करता है, तो यह सिर्फ़ स्वाद की वजह से नहीं हो सकता। चॉकलेट में मैग्नीशियम पाया जाता है, इसलिए कुछ लोगों में इसकी क्रेविंग शरीर में मैग्नीशियम की कमी का संकेत मानी जा सकती है। हालांकि यह बात हर व्यक्ति पर एक जैसी लागू नहीं होती।

नमकीन और चटपटा खाने का मन क्यों

नमकीन या चटपटी चीज़ें खाने की इच्छा के पीछे डिहाइड्रेशन या इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन भी एक वजह हो सकती है। जब शरीर को सोडियम की ज़रूरत होती है, तो कई लोगों को चिप्स, नमकीन या अन्य नमकीन चीज़ें खाने की चाह होने लगती है। गर्मियों में ज़्यादा पसीना निकलने पर भी इस तरह की क्रेविंग बढ़ सकती है।

तीखा भोजन खाने पर शरीर में क्या होता है

कुछ लोगों को बहुत तीखा खाना पसंद आने लगता है, लेकिन इसके पीछे हमेशा पोषक तत्वों की कमी नहीं होती। दरअसल तीखा भोजन खाने से एंडोर्फिन नामक हार्मोन रिलीज़ होते हैं, जो मूड को बेहतर महसूस कराते हैं। यही वजह है कि तनाव या बोरियत के समय कुछ लोग मसालेदार खाना अधिक पसंद करते हैं।

फूड क्रेविंग के लिए असल में जिम्मेदार कौन

फूड क्रेविंग को सिर्फ़ किसी एक पोषक तत्व की कमी का संकेत मान लेना सही नहीं है। इसके पीछे नींद की कमी, हार्मोनल बदलाव, तनाव, डिहाइड्रेशन और खानपान की आदतें भी ज़िम्मेदार हो सकती हैं। अगर क्रेविंग बहुत अधिक हो रही हो या लंबे समय तक बनी रहे, तो डॉक्टर या डाइटिशियन से सलाह लेना बेहतर रहता है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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