बारिश में सांप के काटने पर घबराएं नहीं, अपनाएं ये जरूरी कदम और बचाएं किसी की जान जीवनशैली 2 घंटे पहले 2
बरसात के मौसम में सांप काटने की घटनाएं बढ़ जाती हैं, जिसे देखते हुए डॉक्टर ने मरीज को तुरंत अस्पताल पहुंचाने और अंधविश्वास से दूर रहने की सलाह दी है।

बरसात का मौसम और सांप के काटने का खतरा

बरसात की फुहारें गर्मी से तो राहत देती हैं, लेकिन अपने साथ कई तरह के स्वास्थ्य जोखिम भी लाती हैं। इनमें से सबसे गंभीर समस्या है सांप के काटने की घटनाएं। भारी बारिश के कारण सांप अपने बिलों से बाहर निकल आते हैं और अक्सर झाड़ियों, खेतों, लकड़ी के ढेर और पानी से भरी जगहों पर छिप जाते हैं। खंडवा जैसे इलाकों में बरसात के दिनों में स्नेक बाइट के मामले अक्सर सामने आते हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी और विशेषज्ञ डॉक्टर लगातार लोगों को सतर्क रहने की अपील करते हैं ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति में सही निर्णय लेकर जान बचाई जा सके।

सांप काटने पर शुरुआती प्रतिक्रिया

अगर आपके सामने किसी व्यक्ति को सांप काट ले, तो घबराहट होना स्वाभाविक है, लेकिन डॉक्टरों के अनुसार यही वह समय होता है जब सबसे ज्यादा संयम की जरूरत होती है। विशेषज्ञ इस बात पर जोर देते हैं कि मरीज और वहां मौजूद लोगों को शांत रहना चाहिए। मरीज को बिल्कुल भी चलने-फिरने न दें और उसे आराम की स्थिति में रखें। शरीर की कोई भी अनावश्यक हलचल जहर को रक्तप्रवाह में तेजी से फैलाने का काम करती है, जो मरीज की स्थिति को और गंभीर बना सकता है। इसके अलावा, सांप को मारने या उसे पकड़ने की कोशिश में कीमती समय बर्बाद न करें और न ही उसकी प्रजाति की पहचान करने में अपना दिमाग लगाएं, क्योंकि इलाज का पूरा दारोमदार अस्पताल में मरीज के लक्षणों और जरूरी मेडिकल जांच पर होता है।

समय का महत्व और इलाज की प्रक्रिया

खंडवा के जाने-माने डॉक्टर योगेश शर्मा के मुताबिक, सांप के काटने के बाद का हर मिनट बेहद कीमती होता है। कुछ सांपों का जहर शरीर पर बहुत तेज असर करता है, इसलिए बिना किसी देरी के मरीज को फौरन नजदीकी अस्पताल ले जाना चाहिए। सांप के काटने की जगह पर अक्सर तेज दर्द, जलन, सूजन और लालिमा जैसे संकेत मिलते हैं। कुछ मामलों में व्यक्ति को सिरदर्द, मितली, उल्टी, मांसपेशियों में कमजोरी और सांस लेने में भारीपन जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। हालांकि, यह जरूरी नहीं है कि हर सांप के काटने पर शरीर में एक जैसे ही लक्षण दिखाई दें, इसलिए लक्षणों के आधार पर घर पर इलाज करने की कोशिश कतई न करें।

तुरंत उठाए जाने वाले आवश्यक कदम

  • सबसे पहले खुद को और मरीज को पूरी तरह शांत रखें।
  • मरीज को पैदल चलने या भागने न दें, उसे स्थिर रखें।
  • काटे हुए स्थान को बिल्कुल न रगड़ें और उसे साफ कपड़े से ढका रहने दें।
  • सांप को ढूंढने या पकड़ने के चक्कर में बिल्कुल न पड़ें।
  • जल्द से जल्द ऐसे अस्पताल पहुंचें जहां सांप के काटने का इलाज और विषरोधी दवाएं उपलब्ध हों।
  • यदि मरीज को उल्टी हो या वह बेहोश हो जाए, तो उसे करवट दिलाकर रखें ताकि सांस लेने में दिक्कत न हो।

ये गलतियां कभी न दोहराएं

अक्सर लोग डर और अज्ञानता में ऐसी गलतियां कर बैठते हैं जो मरीज के लिए घातक साबित हो सकती हैं। डॉक्टर स्पष्ट चेतावनी देते हैं कि सांप के काटे हुए स्थान पर ब्लेड या चाकू से चीरा कभी न लगाएं और न ही मुंह से जहर चूसने की कोशिश करें। घाव पर किसी भी प्रकार की मिट्टी, गोबर, जड़ी-बूटी, तेल या कोई भी घरेलू नुस्खा न लगाएं। इसके अलावा, खून के बहाव को रोकने के लिए घाव के ऊपर बहुत जोर से रस्सी या कपड़ा न बांधें। झाड़-फूंक और तांत्रिक क्रियाओं के चक्कर में अस्पताल जाने में देरी करना जानलेवा साबित हो सकता है। सांप की फोटो लेने या उसे दोबारा देखने के लिए घटनास्थल पर वापस बिल्कुल न जाएं।

अस्पताल में उपचार की प्रक्रिया

डॉक्टर योगेश शर्मा बताते हैं कि अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टर मरीज की स्थिति का आकलन करते हैं। यदि जरूरत पड़ी, तो उन्हें एंटी-स्नेक वेनम यानी विषरोधी दवा दी जाती है, जो सांप के जहर के असर को बेअसर करने का सबसे वैज्ञानिक तरीका है। कभी-कभी हर सांप जहरीला नहीं होता और हर काटने वाली घटना में जहर शरीर में नहीं फैलता, लेकिन इसे घर पर पहचानना नामुमकिन है। इसलिए जोखिम लेने के बजाय अस्पताल जाना ही सबसे समझदारी भरा और सुरक्षित कदम है।

सावधानी ही बचाव का एकमात्र रास्ता

डॉक्टरों की सबसे महत्वपूर्ण सलाह यही है कि तांत्रिक क्रियाओं या घरेलू इलाज पर भरोसा करने के बजाय अस्पताल पर पूरा भरोसा रखें। बरसात के दौरान खेत, अंधेरी जगहों, झाड़ियों या लकड़ी के ढेरों के पास जाते समय सतर्क रहें। रात के समय बाहर निकलते समय टॉर्च का प्रयोग जरूर करें और हमेशा जूते पहनकर ही बाहर जाएं। याद रखें, सांप का काटना एक गंभीर स्थिति जरूर है, लेकिन समय रहते सही चिकित्सा और उचित अस्पताल पहुंचने से जान बचाना पूरी तरह संभव है। इसलिए डरें नहीं, सही कदम उठाएं और जीवन की रक्षा करें।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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