पापुआ न्यू गिनी से दिल्ली आए दो मासूमों को मिली नई जिंदगी, पीठ पर तरबूज जैसी गांठ लेकर जीने को थे मजबूर जीवनशैली एक घंटा पहले 2
पापुआ न्यू गिनी से आए दो चचेरे भाई-बहन जटिल स्पाइनल बीमारी से जूझ रहे थे, जिनकी सफल सर्जरी दिल्ली के मैक्स स्मार्ट सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में डॉक्टरों ने की है।

दिल्ली में विदेशी बच्चों का सफल इलाज

भारत की चिकित्सा व्यवस्था की वैश्विक स्तर पर बड़ी पहचान है। यही कारण है कि दुनिया भर से मरीज जटिल बीमारियों के इलाज के लिए भारतीय अस्पतालों का रुख कर रहे हैं। हाल ही में दिल्ली के मैक्स स्मार्ट सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, साकेत में एक ऐसी ही प्रेरणादायक घटना सामने आई है, जहाँ पापुआ न्यू गिनी से आए दो बच्चों को डॉक्टरों की टीम ने नई जिंदगी दी है। ये दोनों बच्चे बचपन से ही गंभीर कॉम्प्लेक्स न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट (एनटीडी) जैसी घातक स्थिति से जूझ रहे थे। उनकी पीठ पर तरबूज के आकार की सूजन थी, जिसके कारण उनका जीवन नारकीय हो गया था।

मरीजों की जटिल शारीरिक स्थिति

पीड़ितों में पांच साल की बच्ची मिस हेन्सली और सात साल का उसका चचेरा भाई मास्टर फ्रांसिस्को शामिल थे। दोनों ही बच्चों में जन्म से ही कई गंभीर समस्याएं थीं। पांच वर्षीय हेन्सली की पीठ के निचले हिस्से में 10*12 सेमी की एक बड़ी सूजन थी, जो तरबूज के समान दिखती थी। इस गांठ के कारण वह कभी भी पीठ के बल लेट नहीं पाती थी और उसे हर समय करवट लेकर सोना पड़ता था। चिकित्सा जांच में उसे स्कोलियोसिस होने और शरीर के निचले हिस्से में संवेदनहीनता की पुष्टि हुई थी। वहीं, सात वर्षीय फ्रांसिस्को की स्थिति और भी विकट थी। उसे रीढ़ की हड्डी में गंभीर टेढ़ापन, दोनों पैरों में क्लबफुट और बाईं तरफ इंग्वाइनल हर्निया की समस्या थी। वह अपने ब्लैडर पर भी कोई नियंत्रण नहीं रख पा रहा था। इससे पहले उसे एक अन्य देश में सर्जरी करानी पड़ी थी, जिसके बाद उसके पैरों की हरकत पूरी तरह खत्म हो गई थी। साल 2018 में उसके मस्तिष्क में वेंट्रिकुलोपेरिटोनियल यानी वीपी शंट भी डाला गया था, ताकि दिमाग के दबाव को कम करने के लिए अतिरिक्त तरल पदार्थ को पेट तक निकाला जा सके।

न्यूरोसर्जरी टीम की चुनौती

अपने देश में पर्याप्त चिकित्सा सुविधाओं के अभाव में परिवार ने भारत आकर इलाज कराने का निर्णय लिया। दिल्ली के साकेत स्थित मैक्स स्मार्ट सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में न्यूरोसर्जरी टीम ने इन बच्चों का केस संभाला। इस उपचार का नेतृत्व न्यूरोसर्जरी विभाग के वाइस चेयरमैन और हेड, डॉ. दलजीत सिंह तथा न्यूरोसर्जरी कंसल्टेंट डॉ. सिमरनजीत सिंह ने किया। डॉक्टरों ने बारीकी से जांच करने के बाद दोनों बच्चों की सर्जरी एक ही दिन करने का चुनौतीपूर्ण फैसला लिया।

सर्जरी का विवरण

सात वर्षीय फ्रांसिस्को के मामले में डॉक्टरों ने माइक्रोस्कोपिक तकनीक का इस्तेमाल करते हुए खराब हिस्से को सावधानीपूर्वक हटाया और उसे रिपेयर किया। इसके बाद स्किन डिफेक्ट को ठीक करने के लिए फ्लैप रोटेशन सर्जरी की गई। वहीं, छोटी बच्ची हेन्सली के मामले में उसकी रीढ़ की हड्डी में मौजूद गांठ को हटाकर उसे व्यवस्थित किया गया। ऑपरेशन के दौरान सबसे बड़ी चुनौती सैक यानी थैली से अत्यधिक सेरेब्रोस्पाइनल फ्लूइड के रिसाव को नियंत्रित करना था।

डॉक्टरों का क्या कहना है?

डॉ. दलजीत सिंह ने बताया कि ये दोनों मामले न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट की जटिलता को दर्शाते हैं। उन्होंने कहा, इन बच्चों में लकवा और ब्लैडर से जुड़ी समस्याएं समान थीं, लेकिन उनके पीछे की एंब्रायोलॉजिकल वजह पूरी तरह से अलग थी। ऐसे मामलों में सफलता के लिए एडवांस माइक्रो-सर्जिकल तकनीकों और सर्जरी के बाद व्यापक रिहैबिलिटेशन की बेहद आवश्यकता होती है। डॉ. सिंह ने जोर देते हुए कहा कि समय पर निदान और उचित उपचार से मरीजों के जीवन की गुणवत्ता में काफी सुधार आ सकता है।

सफलता और भविष्य की सतर्कता

सर्जरी के बाद दोनों बच्चों को गहन देखभाल और फिजियोथेरेपी की प्रक्रिया से गुजरना पड़ा। यह डॉक्टरों की मेहनत का ही परिणाम था कि सर्जरी के बाद हेन्सली पहली बार अपने जीवन में पीठ के बल लेट पाने में सक्षम हुई। वहीं, फ्रांसिस्को को भी फ्लैप साइट की अतिरिक्त देखभाल के बाद रिकवरी में मदद मिली। मास्टर फ्रांसिस्को को अस्पताल से 10वें दिन और मिस हेन्सली को 8वें दिन छुट्टी दे दी गई।

फोलिक एसिड का महत्व

डॉ. सिंह ने इस बात पर चिंता जताई कि गर्भावस्था से पहले और दौरान जागरूकता की कमी के कारण ऐसी स्थितियां पैदा होती हैं। उन्होंने बताया कि इन दोनों बच्चों की माताओं को गर्भावस्था के दौरान फोलिक एसिड सप्लीमेंट नहीं मिला था, और अल्ट्रासाउंड में भी इन कमियों का सही समय पर पता नहीं चल पाया था। उन्होंने सलाह दी कि प्रेग्नेंसी से पहले काउंसिलिंग और शुरुआती जांच के जरिए इन जन्मजात विकारों के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है। यह सफल इलाज मैक्स अस्पताल की एनेस्थीसिया, न्यूरोसर्जरी और नर्सिंग टीम के आपसी समन्वय का एक बेहतरीन उदाहरण है।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

आपकी प्रतिक्रिया?


आपको यह भी पसंद आ सकता हैं

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!