PSA टेस्ट में बढ़ा हुआ एंटीजन मतलब क्या प्रोस्टेट कैंसर है? डॉक्टर राजीव सूद ने दी महत्वपूर्ण सलाह जीवनशैली 2 घंटे पहले 3
प्रोस्टेट कैंसर को लेकर फैली गलतफहमियों के बीच डॉक्टर राजीव सूद ने साफ किया है कि PSA टेस्ट में बढ़ा हुआ एंटीजन स्तर हमेशा कैंसर की पुष्टि नहीं करता है। उन्होंने पुरुषों को सलाह दी है कि वे घबराने के बजाय सही समय पर विशेषज्ञ से परामर्श लें।

प्रोस्टेट कैंसर और PSA जांच का सच

आजकल पुरुषों के स्वास्थ्य में प्रोस्टेट संबंधित समस्याओं और कैंसर को लेकर चिंता काफी बढ़ गई है। सबसे बड़ी चुनौती यह है कि बहुत से लोग बीमारी से ज्यादा इसके डर से जूझ रहे हैं। कई मरीज खुद ही लक्षण देखकर PSA यानी प्रोस्टेट स्पेसिफिक एंटीजन की जांच करवा लेते हैं और रिपोर्ट में एंटीजन का स्तर बढ़ा देखकर उसे सीधे कैंसर मान लेते हैं। डॉक्टर राजीव सूद का कहना है कि यह धारणा पूरी तरह सही नहीं है और रिपोर्ट में बढ़ा हुआ एंटीजन केवल कैंसर का ही संकेत नहीं होता।

जागरूकता की कमी है मुख्य समस्या

पैसिफिक वन हेल्थ अस्पताल के यूरोलॉजी साइंस एंड एंड्रोलॉजी विभाग के प्रिंसिपल डायरेक्टर डॉ. राजीव सूद के अनुसार, प्रोस्टेट कैंसर के प्रति समाज में जागरूकता का अभाव है। कुछ पुरुष पेशाब से जुड़ी तकलीफों को महज उम्र बढ़ने का सामान्य लक्षण मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, जो भविष्य में घातक साबित हो सकता है। वहीं, दूसरी ओर ऐसे पुरुषों की भी कमी नहीं है जो थोड़ा सा भी लक्षण महसूस होते ही उसे सीधे कैंसर से जोड़कर घबराहट के शिकार हो जाते हैं। डॉक्टर सूद जोर देते हैं कि न तो लक्षणों को वर्षों तक इग्नोर करना चाहिए और न ही हर छोटी समस्या पर कैंसर का डर मन में बैठाना चाहिए।

हर यूरिनरी समस्या कैंसर नहीं

डॉक्टर सूद स्पष्ट करते हैं कि पेशाब से जुड़ी हर परेशानी प्रोस्टेट कैंसर नहीं होती। उम्र बढ़ने के साथ पुरुषों में BPH यानी प्रोस्टेट ग्लैंड का सामान्य आकार बढ़ना एक बेहद आम स्थिति है। इसके कारण पेशाब की धार कमजोर होना, शुरुआत करने में समय लगना, रात में बार-बार पेशाब आना या ब्लैडर पूरी तरह खाली न होने का अहसास होना सामान्य बात है। इसके अलावा, यूरिनरी इन्फेक्शन, ओवरएक्टिव ब्लैडर, प्रोस्टेटाइटिस और मधुमेह जैसी बीमारियां भी इसी तरह के लक्षण पैदा कर सकती हैं। इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर किसी नतीजे पर पहुंचना गलत है।

कब होना चाहिए सतर्क?

प्रोस्टेट कैंसर की एक बड़ी चुनौती यह है कि शुरुआती दौर में अक्सर कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। यदि आपको निम्न समस्याएं लंबे समय से बनी हुई हैं, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है:

  • पेशाब करने में लगातार कठिनाई होना।
  • पेशाब की धार का बहुत कमजोर होना।
  • अचानक या बहुत बार पेशाब की हाजत महसूस होना।
  • पेशाब या सीमेन में रक्त आना।
  • लगातार कमर के निचले हिस्से, कूल्हों या पेल्विक क्षेत्र में दर्द का अनुभव होना।

ध्यान रहे कि ये लक्षण अन्य स्थितियों में भी हो सकते हैं, लेकिन इनकी अनदेखी करना जोखिम भरा हो सकता है।

पारिवारिक इतिहास का महत्व

डॉक्टर सूद सलाह देते हैं कि पुरुषों को अपनी उम्र और पारिवारिक इतिहास को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यदि परिवार में पहले किसी को प्रोस्टेट कैंसर रहा है, तो स्क्रीनिंग को लेकर अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता होती है। घबराने के बजाय सही समय पर सटीक जांच और यूरोलॉजिस्ट की सलाह ही प्रोस्टेट स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने का एकमात्र तरीका है। लगातार बने रहने वाले किसी भी बदलाव को गंभीरता से लें और विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में उचित उपचार सुनिश्चित करें।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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