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एक दिन पहले
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बच्चों की सेहत के साथ न करें खिलवाड़
मौजूदा समय में मौसम में हो रहे लगातार बदलाव का सीधा असर बच्चों की सेहत पर पड़ रहा है। अस्पताल की ओपीडी में बुखार से पीड़ित बच्चों की संख्या में भारी उछाल देखा जा रहा है। इस स्थिति में कई अभिभावक घबराकर खुद ही डॉक्टर बनने की कोशिश करने लगते हैं और बिना किसी चिकित्सकीय परामर्श के बच्चों को बुखार कम करने वाली दवाएं बार-बार खिलाने लगते हैं। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. गुंजन पटेल ने इस व्यवहार को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है। उनका स्पष्ट कहना है कि बिना डॉक्टरी सलाह के बच्चों को बार-बार दवा देना उनके लीवर और किडनी को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है।
बुखार एक बीमारी नहीं, सुरक्षा तंत्र है
डॉ. गुंजन पटेल ने अभिभावकों को यह समझने की सलाह दी है कि बुखार स्वयं में कोई रोग नहीं है। यह असल में हमारे शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली यानी इम्यून सिस्टम का एक तरीका है, जिससे शरीर किसी संक्रमण के खिलाफ जंग लड़ता है। कई माता-पिता बच्चे का शरीर थोड़ा गर्म होते ही घबरा जाते हैं और हर 2 से 3 घंटे में दवा देना शुरू कर देते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार यह तरीका पूरी तरह गलत और असुरक्षित है। बार-बार दवा देने से बच्चे के शरीर में दवा की ओवरडोज हो जाती है, जो भविष्य में उनके अंगों की कार्यप्रणाली को बिगाड़ सकती है।
कब तुरंत अस्पताल जाना जरूरी है
बुखार के दौरान कुछ ऐसे लक्षण होते हैं जिन्हें नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। यदि आपका बच्चा बुखार के अलावा निम्नलिखित स्थितियों से गुजर रहा है, तो बिना देरी किए डॉक्टर से संपर्क करें:
- शरीर का तापमान बहुत अधिक बना रहना।
- बच्चा अत्यधिक सुस्त या बेहोश जैसा महसूस करना।
- सांस लेने में किसी भी प्रकार की कठिनाई महसूस होना।
- बार-बार उल्टी होना और तरल पदार्थ न पचा पाना।
- बच्चे को दौरे पड़ना या शरीर में झटके महसूस होना।
केवल बुखार के आंकड़े को कम करने के लिए दवा देना ही इलाज नहीं होता है। दवा की खुराक हमेशा बच्चे की उम्र और उसके शारीरिक वजन के आधार पर ही तय की जाती है। किसी भी प्रकार का अनुमान लगाकर दी गई दवा का असर बच्चे पर उल्टा हो सकता है।
बुखार में बच्चों की देखभाल कैसे करें
डॉ. पटेल ने घर पर बुखार के दौरान अपनाए जाने वाले सुरक्षात्मक तरीकों पर भी जोर दिया है। उनका कहना है कि सबसे पहले शरीर में पानी की कमी न होने दें। बच्चे को पर्याप्त मात्रा में पानी, ओआरएस, नारियल पानी या अन्य तरल पदार्थ पिलाते रहना चाहिए। इसके साथ ही:
- बच्चे को सूती और हल्के आरामदायक कपड़े पहनाएं।
- घर या कमरे का तापमान सामान्य बनाए रखने की कोशिश करें।
- यदि बुखार ज्यादा है, तो डॉक्टर के निर्देशानुसार गुनगुने पानी की पट्टियां माथे या शरीर पर रखें।
एंटीबायोटिक दवाओं से दूरी रखें
विशेषज्ञों ने विशेष रूप से चेतावनी दी है कि वायरल संक्रमण के समय अभिभावक खुद से एंटीबायोटिक दवाएं कभी न दें। एंटीबायोटिक का उपयोग केवल तब किया जाना चाहिए जब डॉक्टर इसकी सलाह दें, क्योंकि गलत एंटीबायोटिक का सेवन बच्चे के स्वास्थ्य के लिए भविष्य में कई जटिलताएं पैदा कर सकता है।
सतर्कता से ही मिलेगी राहत
अंत में डॉ. गुंजन पटेल का सुझाव है कि अभिभावकों की थोड़ी सी समझदारी और सतर्कता बच्चों को किसी बड़ी बीमारी या अस्पताल में भर्ती होने की नौबत से बचा सकती है। यदि बुखार 2 से 3 दिन तक लगातार बना रहता है या बच्चे की तबीयत में कोई सुधार नहीं दिखाई दे रहा है, तो समय गंवाए बिना किसी अनुभवी बाल रोग विशेषज्ञ को दिखाएं। समय पर किया गया सही इलाज ही बच्चों को स्वस्थ रखने का सबसे कारगर और सुरक्षित तरीका है।
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