HDFC बैंक का ग्राहकों को बड़ा तोहफा, MCLR दरों में 15 बेसिस पॉइंट तक की कटौती फायदे की खबर 3 घंटे पहले 4
भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा रेपो रेट बढ़ाने के निर्णय के बीच HDFC बैंक ने अपनी मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स आधारित लेंडिंग रेट (MCLR) में कटौती कर कर्जदारों को बड़ी राहत दी है।

MCLR दरों में कटौती का ऐलान

भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI की ओर से रेपो रेट में वृद्धि किए जाने के विपरीत रुख अपनाते हुए निजी क्षेत्र के दिग्गज बैंक HDFC बैंक ने अपने ग्राहकों के लिए खुशखबरी साझा की है। बैंक ने अपनी मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स आधारित लेंडिंग रेट यानी MCLR में 5 से 15 बेसिस पॉइंट तक की कटौती करने का फैसला लिया है। नई संशोधित दरें 7 अक्टूबर 2026 से प्रभाव में आ चुकी हैं। इस कदम से MCLR से जुड़े फ्लोटिंग रेट लोन लेने वाले ग्राहकों की EMI में कमी आने की संभावना है, हालांकि इसका लाभ सभी ग्राहकों को तुरंत नहीं मिलेगा।

विभिन्न अवधियों के लिए बदली दरें

बैंक ने अपनी नई ब्याज दरों का विवरण जारी करते हुए बताया है कि सबसे अधिक राहत 1 महीने की अवधि के लोन पर दी गई है। इस अवधि के लिए MCLR में 15 बेसिस पॉइंट की कटौती की गई है, जिसके बाद नई दर 7.75 फीसदी हो गई है। इसके अलावा ओवरनाइट और 3 महीने की अवधि के लिए MCLR में 10-10 बेसिस पॉइंट की कटौती की गई है। अन्य सभी अवधियों के लिए दरों में 5 बेसिस पॉइंट की कमी की गई है।

सितंबर की तुलना में वर्तमान स्थिति

अगर हम सितंबर महीने की दरों पर नजर डालें, तो HDFC बैंक की MCLR 7.90 फीसदी से 8.60 फीसदी के दायरे में थी। ताजा कटौती के बाद इन दरों में स्पष्ट कमी देखी गई है। उदाहरण के लिए, 1 साल की MCLR अब 8.35 फीसदी से घटकर 8.30 फीसदी हो गई है। इसी प्रकार 2 साल की अवधि के लिए दर 8.45 फीसदी से घटकर 8.40 फीसदी और 3 साल की अवधि के लिए दर 8.60 फीसदी से गिरकर 8.55 फीसदी पर आ गई है।

EMI पर क्या होगा असर

यह स्पष्ट करना जरूरी है कि MCLR में बदलाव का अर्थ यह नहीं है कि सभी होम लोन लेने वालों की मासिक किस्त यानी EMI तुरंत कम हो जाएगी। इस राहत का लाभ मुख्य रूप से उन ऋणधारकों को मिलेगा जिनके लोन MCLR से जुड़े हैं और जिनकी रीसेट डेट निकट है। यदि किसी ग्राहक का लोन रेपो रेट आधारित किसी अन्य बेंचमार्क से लिंक है, तो उन पर इस कटौती का सीधा प्रभाव नहीं पड़ेगा। बैंक ने ग्राहकों को सलाह दी है कि वे अपने लोन एग्रीमेंट की जांच करें और यह देखें कि उनका लोन किस बेंचमार्क से जुड़ा है।

क्या है MCLR की प्रक्रिया

MCLR वह न्यूनतम ब्याज दर होती है जिस पर बैंक अपने ग्राहकों को कर्ज देने की सुविधा देता है। इस प्रणाली को साल 2016 में RBI द्वारा पेश किया गया था। चूंकि MCLR में उतार-चढ़ाव सीधे तौर पर फ्लोटिंग रेट लोन की ब्याज दरों को प्रभावित करते हैं, इसलिए बैंक समय-समय पर इसमें बदलाव करते हैं ताकि वे बाजार की स्थितियों के अनुकूल बने रह सकें।

मनीष अग्रवाल पाबना के मार्केट्स संवाददाता हैं और शेयर बाजार, आईपीओ तथा निवेश के रुझानों पर रिपोर्टिंग करते हैं। सेंसेक्स-निफ्टी की चाल, कंपनियों के नतीजों और निवेशकों के लिए जरूरी जानकारी को वे सहज भाषा में समझाते हैं। उनकी कोशिश रहती है कि छोटे निवेशक भी बाजार को बेहतर समझ सकें।

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