हरतालिका तीज 2026: इस बार बनेगा दुर्लभ संयोग, शिव-पार्वती के साथ होगी गणपति की आराधना धर्म 4 घंटे पहले 2
साल 2026 में हरतालिका तीज का पर्व बेहद खास रहने वाला है क्योंकि इस बार इसी दिन गणेश चतुर्थी भी मनाई जाएगी। सुहागिन महिलाओं के लिए शिव परिवार और भगवान गणेश की एक साथ पूजा करने का यह अनूठा अवसर होगा।

हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी का अद्भुत मेल

सुहागिन महिलाओं की आस्था का महापर्व हरतालिका तीज इस बार बेहद विशेष होने वाला है। हिंदू पंचांग के अनुसार, यह पावन पर्व इस वर्ष 14 अगस्त 2026 को मनाया जाएगा। इस वर्ष की सबसे खास बात यह है कि हरतालिका तीज के दिन ही गणेश चतुर्थी का पर्व भी पड़ रहा है। एक ही दिन पर शिव परिवार और प्रथम पूज्य भगवान गणेश की आराधना का यह दुर्लभ संयोग भक्तों के लिए धार्मिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। श्रद्धालु इस दिन भगवान शिव, माता पार्वती और विघ्नहर्ता गणेश जी की संयुक्त पूजा कर उनका आशीर्वाद प्राप्त कर सकेंगे।

हरतालिका तीज व्रत का महत्व

हरतालिका तीज का व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए अखंड सौभाग्य, पति की दीर्घायु और सुखद वैवाहिक जीवन की प्राप्ति का साधन माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह व्रत सबसे कठिन व्रतों की श्रेणी में आता है क्योंकि इसमें महिलाएं करीब 24 घंटे तक बिना अन्न और जल ग्रहण किए निराहार और निर्जला रहती हैं। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को आने वाला यह पर्व महिलाओं के अटूट विश्वास और भक्ति का प्रतीक है। इस दिन महिलाएं सोलह श्रृंगार करती हैं और पूरे विधि-विधान के साथ भगवान शिव एवं माता पार्वती की पूजा-अर्चना करती हैं।

पौराणिक कथा और पूजा की परंपरा

धार्मिक ग्रंथों में उल्लेख है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को अपने पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या का मार्ग अपनाया था। मान्यता है कि माता पार्वती ने बालू और शुद्ध मिट्टी से शिवलिंग का निर्माण कर भगवान भोलेनाथ की आराधना की थी। उनकी इसी सच्ची तपस्या और अविचल श्रद्धा से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया था। इसी परंपरा का पालन करते हुए आज भी महिलाएं हरतालिका तीज पर मिट्टी या बालू से शिव-पार्वती की प्रतिमा अथवा शिवलिंग बनाकर उनकी विशेष पूजा करती हैं। माना जाता है कि जो भी महिला इस दिन पूरी निष्ठा और शुद्ध मन से व्रत रखती है, उसे वैवाहिक जीवन में खुशहाली और पारिवारिक शांति का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

ज्योतिषाचार्य का क्या है मत

देवघर के पागल बाबा आश्रम स्थित मुदगल ज्योतिष केंद्र के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित नंद किशोर मुदगल के अनुसार, साल 2026 में 14 अगस्त को हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी का एक साथ आना बहुत ही शुभ संकेत है। पंडित मुदगल ने बताया कि इस बार का तीज व्रत आम वर्षों की तुलना में अधिक फलदायी होगा क्योंकि भक्त एक ही दिन में शिव परिवार के साथ-साथ भगवान गणेश की भी कृपा के पात्र बनेंगे। यह विशेष अवसर श्रद्धालुओं के लिए आस्था और भक्ति का एक बड़ा संयोग लेकर आया है।

पूजा के शुभ मुहूर्त

ज्योतिषाचार्य ने पूजा के लिए कुछ विशिष्ट समय निर्धारित किए हैं, जिनका पालन करना शुभ माना जाएगा:

  • सुबह की पूजा के लिए शुभ समय: सुबह 6 बजकर 05 मिनट से 7 बजकर 06 मिनट तक।
  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4 बजकर 32 मिनट से 5 बजकर 19 मिनट तक।
  • अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11 बजकर 52 मिनट से दोपहर 12 बजकर 41 मिनट तक।

इन निर्धारित समय सारणी के अनुसार पूजा करना महिलाओं के लिए अत्यंत शुभ रहेगा। श्रद्धालु इन मुहूर्तों के दौरान अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार शिव-पार्वती और भगवान गणेश की प्रतिमाओं के समक्ष विधि-विधान से पूजा संपन्न कर सकते हैं। कुल मिलाकर, यह दिन सुहागिन महिलाओं के लिए व्रत और उत्सव दोनों का संगम बनकर आ रहा है, जो उनके पारिवारिक जीवन में नई ऊर्जा और खुशहाली लेकर आएगा।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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