धर्म
37 मिनट पहले
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साइकिल पर सवार शिवभक्तों की अद्भुत यात्रा
सावन के पवित्र महीने में भगवान शिव के प्रति अटूट आस्था की कई तस्वीरें देखने को मिलती हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले के तिलहर से निकले 14 कांवड़ियों के दल की कहानी बेहद खास है। ये श्रद्धालु साइकिल के जरिए हरिद्वार से बाबा बैद्यनाथ धाम देवघर तक की लंबी दूरी तय कर रहे हैं। इस कठिन सफर की कुल लंबाई 1300 किलोमीटर है। श्रद्धालु अपने साथ 31 लीटर पवित्र गंगाजल लेकर चल रहे हैं। भगवा वस्त्र पहने ये कांवड़िये अपनी साइकिलों को धार्मिक ध्वजों और कांवड़ सामग्री से सुसज्जित कर पूरे रास्ते शिव के जयकारे लगाते हुए आगे बढ़ रहे हैं।
श्रद्धालुओं का संकल्प और सफर
इस दल में महंत सुनील चोटी वाला, उपमहंत ब्रजेश भोले और कोषाध्यक्ष राजा भोले जैसे समर्पित श्रद्धालु शामिल हैं। इन कांवड़ियों का कहना है कि बाबा भोलेनाथ के प्रति उनकी गहरी आस्था ही उन्हें इतनी लंबी और चुनौतीपूर्ण यात्रा करने की ताकत देती है। हरिद्वार से गंगाजल भरकर उसे देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग पर अर्पित करना उनके लिए सिर्फ एक धार्मिक यात्रा नहीं है, बल्कि यह वर्षों से चला आ रहा उनका संकल्प है। उनका मानना है कि रास्ते में मिलने वाला लोगों का सहयोग और सेवा भाव ही उनकी थकान को मिटा देता है और उन्हें लगातार आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। कठिन रास्तों और लंबी दूरी के बावजूद, महादेव के प्रति उनका समर्पण कम नहीं हुआ है।
झुमरी तिलैया में भव्य स्वागत
अपनी यात्रा के दौरान यह दल जब झुमरी तिलैया के बाईपास रोड स्थित बाबा निवास शिव वाटिका पहुंचा, तो वहां उनका गर्मजोशी के साथ स्वागत किया गया। शिव वाटिका के सेवकों ने श्रद्धालुओं के आराम और भोजन की व्यवस्था की। देवघर की ओर आगे बढ़ने से पहले, कांवड़ियों ने विधि-विधान से अपनी साइकिल और कांवड़ की आरती उतारी। इस अवसर पर प्रसाद भी वितरित किया गया। हल्का नाश्ता और चाय-पानी करने के बाद, यह दल पूरी ऊर्जा के साथ अपने गंतव्य बाबा बैद्यनाथ धाम की ओर रवाना हो गया।
14 वर्षों से जारी सेवा का सिलसिला
बाबा निवास शिव वाटिका के संचालक सुजीत लोहानी ने बताया कि वे कांवड़ियों में साक्षात भगवान शिव का स्वरूप देखते हैं। यही कारण है कि वे पिछले 14 वर्षों से इस मार्ग से गुजरने वाले शिवभक्तों की निरंतर सेवा कर रहे हैं। शिव वाटिका में कांवरियों के लिए निःशुल्क चाय, भोजन, जलपान और रात में ठहरने की पूरी व्यवस्था उपलब्ध रहती है। इसके साथ ही, यदि किसी श्रद्धालु को आवश्यकता हो, तो उन्हें दवाइयां भी उपलब्ध कराई जाती हैं। सुजीत लोहानी का उद्देश्य यही है कि लंबी और कष्टदायक यात्रा पर निकले कांवड़ियों को कुछ देर का विश्राम और सेवा मिल सके, ताकि उनकी यात्रा बिना किसी बाधा के पूरी हो सके।
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