उत्तराखंड में कनेक्टिविटी की नई लहर: हरिद्वार-लक्सर फोरलेन से अल्मोड़ा टनल तक, इन बड़ी परियोजनाओं को मिली मंजूरी उत्तराखंड 2 महीने पहले 80
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के साथ हुई बैठक में उत्तराखंड के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए कई बड़े सड़क प्रोजेक्ट्स पर मुहर लगी है। इन नई सड़कों और टनल से चारधाम यात्रा और पर्यटन को नई गति मिलेगी।

सड़क नेटवर्क का होगा विस्तार

उत्तराखंड के पहाड़ी और मैदानी इलाकों में जल्द ही कनेक्टिविटी का एक नया और मजबूत नेटवर्क देखने को मिलेगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने हालिया दिल्ली दौरे के दौरान केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से मुलाकात की, जिसमें राज्य की कई महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं पर गहन चर्चा हुई। केंद्र सरकार से मिली मंजूरी के बाद अब उत्तराखंड में परिवहन की दिशा में एक बड़ी छलांग लगाने की तैयारी है। ये परियोजनाएं न केवल चारधाम यात्रा को सुगम बनाएंगी, बल्कि सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा और आपदा प्रबंधन के लिहाज से भी काफी कारगर साबित होंगी।

हरिद्वार से लेकर पिथौरागढ़ तक बदलेगी तस्वीर

राज्य के अलग-अलग हिस्सों में यातायात के दबाव को कम करने के लिए सरकार ने एक व्यापक कार्ययोजना तैयार की है। मुख्यमंत्री के अनुसार, हरिद्वार-लक्सर-पुरकाजी मार्ग को फोरलेन किया जाएगा, जिससे मेलों और त्यौहारों के दौरान लगने वाले भारी जाम से बड़ी राहत मिलेगी। इसके अलावा पिथौरागढ़ बाईपास, खटीमा-मझोला फोरलेन और रामनगर-शंकरपुर-मरचूला मार्ग को अपग्रेड करने जैसी बड़ी योजनाओं को भी हरी झंडी दे दी गई है। हरिद्वार और कोटद्वार में भी नए बाईपास का निर्माण राज्य की यातायात व्यवस्था को और अधिक आधुनिक बनाएगा।

एक्सप्रेसवे और टनल से कम होगा सफर का समय

उत्तराखंड के बुनियादी ढांचे को जोड़ने की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण कदम दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे से हरिद्वार को जोड़ना है। इसके विस्तार के अंतर्गत लगभग 160 किलोमीटर का एक नया हिस्सा तैयार किया जाएगा, जिसका मुख्य लक्ष्य अर्धकुंभ के आयोजन से पहले काम शुरू करना है। साथ ही, अल्मोड़ा में सिकुड़ा बैंड से एनटीडी तक लगभग एक किलोमीटर लंबी टनल का निर्माण किया जाएगा। इस सुरंग के बनने से यात्रियों की लगभग 10 किलोमीटर की दूरी कम हो जाएगी, जिससे आवाजाही में काफी समय की बचत होगी। राष्ट्रीय राजमार्गों को बेहतर बनाने के लिए लगभग 3,000 करोड़ रुपये की कनेक्टिंग सड़कों को भी सैद्धांतिक स्वीकृति मिल गई है।

आपदा प्रबंधन और जोशीमठ पर विशेष ध्यान

पहाड़ों में हर साल भूस्खलन और बादल फटने जैसी प्राकृतिक आपदाओं की चुनौती को देखते हुए सरकार अब अधिक सतर्क है। संवेदनशील इलाकों में वैज्ञानिक तरीके से सुधार और प्रबंधन के लिए उत्तराखंड लैंडस्लाइड मिटिगेशन एंड मैनेजमेंट सेंटर के गठन को मंजूरी दी गई है। इसके लिए केंद्र सरकार के साथ एक समझौता ज्ञापन (MOU) पर सहमति बनी है। इसके अतिरिक्त, बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन यानी BRO को जोशीमठ बाईपास और एनएच-34 के अटके हुए निर्माण कार्यों में तेजी लाने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसी भी आपदा की स्थिति में सड़कें तुरंत बहाल हो सकें।

कैंची धाम के लिए फोरलेन का प्रस्ताव

धार्मिक पर्यटन के बढ़ते महत्व को देखते हुए कैंची धाम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को संभालने के लिए सरकार ने वहां फोरलेन सड़क बनाने का प्रस्ताव रखा है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि हालांकि राज्य सरकार पहले ही वहां बाईपास बना चुकी है, लेकिन लगातार बढ़ते ट्रैफिक को देखते हुए सड़क को चौड़ा करना अनिवार्य हो गया है। इस प्रस्ताव पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने सकारात्मक आश्वासन दिया है। अपने संबोधन में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राजनीतिक रिकॉर्ड्स के सवालों पर भी जवाब देते हुए कहा कि उनका मुख्य ध्यान प्रदेश के विकास पर है, रिकॉर्ड्स तो बनते और टूटते रहते हैं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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