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8 घंटे पहले
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विचारों
उत्तराखंड की राजनीति में गर्माया हल्द्वानी का मुद्दा
उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की जनसभा के उपरांत मंच के तथाकथित 'शुद्धिकरण' का मामला अब एक बड़े राजनीतिक विवाद में तब्दील हो चुका है। इस प्रकरण को लेकर कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच तनातनी लगातार बढ़ती जा रही है। कांग्रेस ने अब इस मुद्दे को लेकर आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है और पार्टी सड़क पर उतरकर अपना विरोध दर्ज कराने की तैयारी में है। जानकारी के अनुसार, मंगलवार को पार्टी इस मामले में फिर से प्रदर्शन करेगी। कांग्रेस का मुख्य विरोध राहुल गांधी के विरुद्ध दर्ज कराई गई FIR को लेकर है। इसके साथ ही, पार्टी ने आगामी सितंबर के प्रथम सप्ताह में राजधानी देहरादून में एक विशाल प्रदर्शन की रणनीति बनाई है, जिसमें कार्यकर्ता सचिवालय का घेराव करेंगे।
पूरे देश में कांग्रेस की विरोध की रणनीति
कांग्रेस सांसद सैयद नसीर हुसैन ने सोमवार को सोशल मीडिया मंच X के माध्यम से स्पष्ट किया कि राहुल गांधी पर दर्ज की गई FIR के खिलाफ कांग्रेस देशभर में राज्य स्तर पर विरोध मार्च आयोजित करेगी। कांग्रेस की मांग है कि हल्द्वानी में जिस तरह का 'जातिवादी शुद्धिकरण' किए जाने का दावा किया जा रहा है, उस घटना को अंजाम देने वाले बीजेपी कार्यकर्ताओं पर भी कठोर FIR दर्ज की जानी चाहिए। सैयद नसीर हुसैन ने बीजेपी सरकारों पर तीखे हमले करते हुए उन्हें 'दलित विरोधी, अल्पसंख्यक विरोधी और संविधान विरोधी एजेंडा' चलाने वाला बताया। उन्होंने जोर देकर कहा कि कांग्रेस ऐसे किसी भी विभाजनकारी एजेंडे के खिलाफ मजबूती से खड़ी रहेगी। हुसैन ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि उनकी विचारधारा छुआछूत और जातिगत भेदभाव को बढ़ावा देने वाली है।
राहुल गांधी पर FIR का आधार क्या है
हल्द्वानी सिटी कोतवाली पुलिस ने एक शिकायत मिलने के बाद राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज की है। यह शिकायत जवाहर नगर कॉलोनी, हल्द्वानी के निवासी 26 साल के अमित कुमार ने दर्ज कराई है। अमित कुमार स्वयं वाल्मीकि समाज से ताल्लुक रखते हैं और श्री राम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास के पदाधिकारी के रूप में पहचाने जाते हैं। शिकायतकर्ता का तर्क है कि 'शुद्धिकरण' को लेकर राहुल गांधी की हालिया टिप्पणी से अनुसूचित जाति समुदाय की भावनाओं को गहरी चोट पहुंची है। पुलिस ने इस FIR में SC/ST एक्ट, 1989 की धारा 3(1)(r) और 3(1)(u) का प्रावधान जोड़ा है। इसके अलावा, भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 196 और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 199 का भी उल्लेख किया गया है।
देहरादून में बड़े प्रदर्शन की तैयारी
इस विवाद के गहराते ही कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व भी सक्रिय हो गया है। सितंबर के शुरुआती सप्ताह में देहरादून में प्रस्तावित बड़े विरोध प्रदर्शन की रूपरेखा तैयार की जा रही है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की अगुवाई में होने वाले इस कार्यक्रम में सचिवालय को घेरने की योजना है। इस आंदोलन में कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और उत्तराखंड की प्रभारी कुमारी सैलजा की भागीदारी भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। कांग्रेस स्पष्ट कर चुकी है कि उनका यह विरोध केवल हल्द्वानी में कथित शुद्धिकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि राहुल गांधी पर हुई कार्रवाई के खिलाफ भी है।
मुख्यमंत्री धामी का राहुल गांधी पर प्रहार
इस बीच, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राहुल गांधी पर सीधा और तीखा हमला किया है। खटीमा के दौरे के दौरान मुख्यमंत्री ने एक स्थानीय दुकान पर आम लोगों के साथ बैठकर चाय की चुस्कियां लीं। इस दौरान डिस्पोजेबल कप में चाय पीते हुए उन्होंने राहुल गांधी के जाति संबंधी दावों को आड़े हाथों लिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्थानीय नागरिकों के बीच बैठकर चाय पीना एक सुखद अनुभव था, जिसमें चाय का स्वाद तो था ही, साथ ही लोगों का अपनापन भी था, लेकिन कहीं कोई जातिगत भेदभाव देखने को नहीं मिला। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा, 'कप डिस्पोजेबल हो सकता है, लेकिन सोच इतनी डिस्पोजेबल नहीं होनी चाहिए कि चाय में भी जाति और राजनीति ढूंढी जाए।'
युवराज को सबूत देने चाहिए- धामी
बनबसा में भी मुख्यमंत्री धामी ने इसी मुद्दे को उठाते हुए राहुल गांधी को घेरा। उन्होंने कहा, 'कांग्रेस के सर्वोच्च नेता, जिन्हें युवराज कहा जाता है, उन्हें अपने दावों के पक्ष में सबूत प्रस्तुत करने चाहिए। उनके पास किसी प्रकार का कोई ठोस प्रमाण नहीं है। उन्हें संभवतः गलत सूचनाएं दी जाती हैं, जिनकी न तो वे जांच करते हैं और न ही तथ्यों को परखते हैं, केवल वोट बैंक की राजनीति के लिए बयानबाजी कर देते हैं।' मुख्यमंत्री ने कहा कि देवभूमि की संस्कृति अत्यंत पवित्र है, जहां समाज के सभी वर्गों के लोग आपसी स्नेह और भाईचारे के साथ जीवन व्यतीत करते हैं। यहाँ कोई मतभेद नहीं है, सब एक हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी सनातन धर्म को नुकसान पहुंचाने और हिंदू समाज को कमजोर करने की मंशा रखते हैं, जिसके कारण वे लगातार ऐसे भ्रामक बयान देते रहते हैं।
निष्कर्षतः, हल्द्वानी में हुई सभा के बाद उपजे शुद्धिकरण विवाद ने अब एक व्यापक राजनीतिक मोड़ ले लिया है। मामला अब FIR और जातिगत राजनीति के इर्द-गिर्द घूम रहा है। मंगलवार के घोषित प्रदर्शन और देहरादून में प्रस्तावित सचिवालय घेराव से यह संकेत मिल रहा है कि उत्तराखंड में यह सियासी टकराव आने वाले दिनों में और अधिक तीव्र हो सकता है।
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