गुरुग्राम में सड़क पर नाव चलाने का मामला: कंपनी ने मांगी माफी, 50,000 रुपये के चालान की सच्चाई आई सामने हरियाणा एक घंटा पहले 6
गुरुग्राम में बाढ़ जैसी स्थिति के दौरान सड़क पर नाव चलाने वाली कंपनी कार्स24 ने अपने मार्केटिंग कैंपेन को लेकर माफी मांगी है। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि सोशल मीडिया पर वायरल हुआ 50,000 रुपये का चालान पूरी तरह से झूठ था।

मामले ने पकड़ा नया मोड़

हरियाणा के गुरुग्राम में हाल ही में सड़क पर नाव चलाने के एक अजीबोगरीब वाकये ने सोशल मीडिया पर खूब हलचल मचाई थी। अब इस पूरे प्रकरण में एक नया और महत्वपूर्ण मोड़ आ गया है। इस मामले से जुड़ी निजी कंपनी कार्स24 ने एक आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी किया है और पूरे घटनाक्रम पर बिना शर्त माफी मांगी है। दरअसल, शहर में बारिश के बाद हुए जलभराव के दौरान सड़क पर नाव उतारने का वीडियो इंटरनेट पर तेजी से वायरल हुआ था। इसके बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर यह दावा किया गया था कि गुरुग्राम पुलिस ने कंपनी का 50,000 रुपये का चालान काट दिया है। अब कंपनी ने इस दावे को पूरी तरह गलत बताया है।

क्या था वायरल हुआ दावा

गुरुग्राम में जलभराव के बीच नाव चलाने वाली निजी कंपनी कार्स24 ने अपनी सफाई में कहा है कि सोशल मीडिया पर जिस 50,000 रुपये की रकम का जिक्र किया गया था, वह कोई सरकारी ट्रैफिक चालान नहीं था। कंपनी के अनुसार, यह राशि पूरी तरह से एक मार्केटिंग गतिविधि के दौरान हुए खर्चों से संबंधित थी। इससे पहले गुरुग्राम पुलिस ने भी आधिकारिक रूप से इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया था। पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया था कि नाव चलाने या सड़क पर इस तरह की गतिविधि को लेकर किसी भी प्रकार का कोई चालान नहीं काटा गया है।

कंपनी ने स्वीकार की गलती

कार्स24 ने अपने बयान में माना है कि बारिश और जलभराव की स्थिति में सार्वजनिक सड़कों पर नाव चलाना न तो सुरक्षित था और न ही इसे बढ़ावा दिया जाना चाहिए। कंपनी ने माना कि उनका यह मार्केटिंग कैंपेन गैर-जिम्मेदाराना था, जिससे जनता और पुलिस प्रशासन के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हुई। कंपनी के प्रतिनिधियों ने गुरुग्राम पुलिस, जिला प्रशासन और तमाम संबंधित अधिकारियों से माफी मांगते हुए कहा कि जिस तरह से इस कैंपेन को पेश किया गया, वह बेहद गलत था। इससे ऐसी गलतफहमी हुई कि पुलिस ने कोई दंडात्मक कार्रवाई करते हुए 50,000 रुपये का चालान काटा है, जबकि सच्चाई यह है कि ऐसी कोई भी कानूनी कार्रवाई नहीं हुई थी।

भविष्य के लिए लिया सबक

कंपनी ने कहा है कि वे इस चूक की पूर्ण जिम्मेदारी लेते हैं। उन्होंने खेद व्यक्त करते हुए कहा कि उनके इस कैंपेन के कारण अधिकारियों को अनावश्यक आलोचना का सामना करना पड़ा और जनता के बीच भ्रम फैला, जिसके लिए वे माफी मांगते हैं। कंपनी के अनुसार, उनका उद्देश्य केवल जलभराव जैसी मुश्किल परिस्थितियों के बीच लोगों के लिए एक हल्का-फुल्का माहौल तैयार करना था। उनका इरादा किसी भी सरकारी संस्थान, पुलिस या प्रशासन का अपमान करना बिल्कुल नहीं था।

कंपनी ने यह भी जानकारी दी है कि इस पूरे मामले को लेकर उनके भीतर आंतरिक स्तर पर कार्रवाई की गई है। भविष्य में इस तरह की गलतियां दोबारा न दोहराई जाएं, इसके लिए कंपनी ने अपनी आंतरिक मंजूरी प्रक्रिया और बाहरी संचार नीतियों में जरूरी बदलाव किए हैं। कंपनी ने सभी मीडिया संस्थानों से भी अपील की है कि वे इस ताजा स्पष्टीकरण के आधार पर अपने द्वारा प्रसारित की गई पिछली कवरेज को अपडेट करें। यह पूरा वाकया एक मार्केटिंग कैंपेन के रूप में शुरू हुआ था, लेकिन गलत सूचना और प्रचार के चलते यह विवाद का विषय बन गया था, जिस पर अब कंपनी ने विराम लगा दिया है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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