मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड में पहली बार हिंदू सदस्यों की एंट्री, दिग्विजय सिंह के गढ़ के अनिमेष भार्गव की अनोखी कहानी मध्य प्रदेश एक घंटा पहले 3
मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड में पहली बार गैर-मुस्लिम सदस्यों को जगह मिली है, जिसमें राघौगढ़ के अनिमेष भार्गव और इंदौर के मनोज मालपानी का नाम प्रमुख है। राघौगढ़ के अनिमेष भार्गव का परिवार कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह के बेहद करीब माना जाता है, बावजूद इसके उन्होंने भाजपा की राष्ट्रवादी विचारधारा को चुना।

मध्य प्रदेश ने रचा इतिहास

मध्य प्रदेश की शिवराज सरकार ने एक क्रांतिकारी निर्णय लेते हुए राज्य के वक्फ बोर्ड में पहली बार दो गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल किया है। यह निर्णय पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है। वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 के कड़े प्रावधानों को लागू करने वाला मध्य प्रदेश देश का पहला राज्य बन गया है। अब तक वक्फ अधिनियम 1995 के पुराने नियमों के अनुसार, बोर्ड में केवल मुस्लिम समुदाय के लोग ही सदस्य बन सकते थे, लेकिन केंद्र सरकार द्वारा किए गए नए संशोधनों ने बोर्ड के ढांचे में आमूलचूल परिवर्तन कर दिया है।

अनिमेष भार्गव की राष्ट्रवादी राह

इस नियुक्ति में सबसे अधिक चर्चा गुना जिले के राघौगढ़ निवासी अनिमेष भार्गव की हो रही है। अनिमेष का ताल्लुक ऐसे परिवार से है, जो दशकों से कांग्रेस के कद्दावर नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का बेहद करीबी माना जाता है। उनके पिता अशोक भार्गव एक मशहूर वकील हैं और वर्ष 1975 से ही दिग्विजय सिंह के साथ उनकी गहरी मित्रता है। हालांकि, पारिवारिक राजनीतिक पृष्ठभूमि से अलग हटकर अनिमेष ने राष्ट्रवाद और भारतीय जनता पार्टी की विचारधारा को अपनाना बेहतर समझा।

अनिमेष के जीवन में बड़ा बदलाव करीब एक दशक पहले आया, जब उन्होंने एचडीएफसी बैंक में मैनेजर की अपनी प्रतिष्ठित नौकरी को पूरी तरह छोड़ दिया। वे अपनी पत्नी के साथ भोपाल आ गए और बिना किसी व्यक्तिगत स्वार्थ के भाजपा प्रदेश कार्यालय में एक समर्पित पूर्णकालिक कार्यकर्ता के रूप में काम करने लगे। सुबह से देर रात तक पार्टी कार्यालय की व्यवस्थाएं संभालना उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन गया।

कॉरपोरेट अनुभव से संगठन की सेवा तक

एमबीए (फाइनेंस) की डिग्री हासिल करने वाले अनिमेष भार्गव को फाइनेंस और कॉरपोरेट जगत का लगभग 18 वर्षों का लंबा अनुभव है। राजनीतिक सक्रियता की बात करें तो करीब दस साल पहले राघौगढ़ नगर पालिका चुनाव के दौरान उन्होंने भाजपा से अध्यक्ष पद का टिकट पाने के लिए दावेदारी पेश की थी। उस समय राजनीतिक समीकरण उनके पक्ष में नहीं रहे और उन्हें टिकट नहीं मिला, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। निराश होने के बजाय वे और अधिक सक्रियता से संगठन के कार्यों में जुट गए। वर्तमान में वे मध्य प्रदेश भाजपा के मीडिया पैनलिस्ट के रूप में पार्टी का मजबूती से पक्ष रखते हैं। उनके इसी लंबे संघर्ष और पार्टी के प्रति निष्ठा का फल उन्हें वक्फ बोर्ड के सदस्य के रूप में मिली इस जिम्मेदारी के रूप में मिला है।

वक्फ बोर्ड की नई टीम का स्वरूप

मध्य प्रदेश राजपत्र में 4 जुलाई 2026 को जारी आधिकारिक अधिसूचना के तहत नई 10 सदस्यीय वक्फ बोर्ड टीम का गठन किया गया है। इसमें इंदौर के सनवर पटेल को बोर्ड का अध्यक्ष बनाया गया है। नई टीम का विवरण इस प्रकार है:

  • सनवर पटेल (इंदौर): अध्यक्ष
  • अनिमेष भार्गव (राघौगढ़, गुना): सदस्य (गैर-मुस्लिम)
  • मनोज मालपानी (इंदौर): सदस्य (गैर-मुस्लिम)
  • डॉ. नजमा हेपतुल्ला (नई दिल्ली): सदस्य (कार्यकाल अप्रैल 2028 तक)
  • आतिफ अकील (विधायक, भोपाल उत्तर): सदस्य
  • फैजान खान (उज्जैन): सदस्य
  • फातेमा चौधरी (इंदौर): सदस्य
  • शाइस्ता सुल्तान (पार्षद, बैरसिया, भोपाल): सदस्य
  • शबाना खान (पार्षद, रतलाम): सदस्य
  • आयुक्त (पिछड़ा वर्ग तथा अल्पसंख्यक कल्याण विभाग): पदेन सदस्य

इस नियुक्ति ने न केवल मध्य प्रदेश की राजनीति में एक नई लकीर खींची है, बल्कि यह भी संकेत दिया है कि भविष्य में वक्फ बोर्ड की कार्यप्रणाली में बदलाव देखने को मिलेंगे। वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 के तहत अब प्रत्येक राज्य के लिए यह अनिवार्य हो गया है कि वे बोर्ड में कम से कम दो गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल करें, जिसे मध्य प्रदेश ने सबसे पहले अमल में लाकर एक नजीर पेश की है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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