ग्रेटर नोएडा में अवैध पीजी और हॉस्टल का जाल, प्रशासन की अनदेखी से मंडरा रहा बड़े हादसे का खतरा उत्तर प्रदेश एक घंटा पहले 3
दिल्ली के सत्य निकेतन जैसी घटनाओं से बेखबर ग्रेटर नोएडा प्रशासन की लापरवाही के कारण पुस्ता रोड के डूब क्षेत्र में हजारों छात्र जान जोखिम में डाल रहे हैं।

नियमों को ठेंगा दिखा चल रहा अवैध कारोबार

दिल्ली के सत्य निकेतन में हुए दर्दनाक हादसे के बाद भी उत्तर प्रदेश का प्रशासन किसी भी तरह की सीख लेता हुआ दिखाई नहीं दे रहा है। ग्रेटर नोएडा के पुस्ता रोड इलाके में नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए अवैध हॉस्टल और पीजी का संचालन धड़ल्ले से जारी है। यहां बनी अवैध इमारतों में न केवल आवासीय, बल्कि व्यावसायिक गतिविधियां भी पूरी तरह से अवैध तरीके से चल रही हैं, जिस पर रोक लगाने में स्थानीय प्रशासन पूरी तरह नाकाम साबित हुआ है।

छात्रों की जिंदगी के साथ खिलवाड़

कम किराए का प्रलोभन देकर इन अवैध इमारतों में हजारों छात्रों को फंसाया जा रहा है। ये छात्र अपनी पढ़ाई के लिए मजबूरन इन खतरनाक इमारतों में रहने को विवश हैं। इन इमारतों का निर्माण सुरक्षा मानकों को दरकिनार कर किया गया है, जिसके चलते किसी भी समय बड़ी दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। प्रशासन की सुस्ती का खामियाजा उन मासूम छात्रों को भुगतना पड़ सकता है जो बेहतर भविष्य के सपने लेकर यहां आए हैं।

बाढ़ और जलभराव का बना रहता है खतरा

पुस्ता रोड का यह क्षेत्र डूब क्षेत्र यानी फ्लडप्लेन के अंतर्गत आता है। मानसून के दौरान यहां जलभराव और भारी बाढ़ की स्थिति उत्पन्न होना एक सामान्य बात है। इसके बावजूद, इन संवेदनशील इलाकों में अवैध निर्माण का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। जिम्मेदार अधिकारी इन सबके बावजूद गहरी नींद में सोए हुए हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि वे किसी बड़े हादसे के होने का इंतजार कर रहे हैं। इस प्रशासनिक उदासीनता के कारण इलाके के भविष्य पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा हो गया है।

चेतन तिवारी पाबना के उत्तर प्रदेश संवाददाता हैं और राज्य की राजनीति, प्रशासन तथा जमीनी मुद्दों को कवर करते हैं। लखनऊ में रहते हुए वे जिलों से लेकर विधानसभा तक की खबरें संतुलित रिपोर्टिंग के साथ पाठकों तक पहुंचाते हैं। आम लोगों के मुद्दों और स्थानीय घटनाओं पर उनका खास फोकस रहता है।

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