शानदार प्लेसमेंट पाने का मंत्र: डिग्री के साथ-साथ इन तकनीकी स्किल्स पर बनाएं पकड़ उत्तर प्रदेश एक घंटा पहले 2
कॉलेज के दौरान केवल पढ़ाई तक सीमित रहना पर्याप्त नहीं है। कंप्यूटर साइंस के छात्रों को बेहतर करियर और बड़े पैकेज के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और प्रोग्रामिंग जैसी आधुनिक स्किल्स में निपुण होना आवश्यक है।

कॉलेज कैंपस से ही करें करियर की तैयारी

आज के समय में कॉलेज में दाखिला लेते ही छात्रों के दिमाग में सबसे बड़ी चिंता प्लेसमेंट की होती है। अक्सर चर्चाओं का केंद्र यही होता है कि किस कंपनी का पैकेज सबसे बड़ा है या किस छात्र को सबसे आकर्षक ऑफर मिला है। हालांकि, इस दौड़ में कई छात्र यह बुनियादी बात भूल जाते हैं कि एक मोटी सैलरी पैकेज की असली बुनियाद केवल कॉलेज की डिग्री नहीं, बल्कि छात्र की व्यक्तिगत स्किल्स और उसका तकनीकी ज्ञान होता है। विशेष रूप से कंप्यूटर साइंस के क्षेत्र में काम करने वाले युवाओं के लिए यह अनिवार्य है कि वे खुद को बदलती टेक्नोलॉजी के साथ अपडेट रखें। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लेकर साइबर सिक्योरिटी जैसे विषय आज के दौर में करियर के बड़े रास्ते खोल रहे हैं, जहां युवाओं के लिए भविष्य में अपार संभावनाएं मौजूद हैं।

इंडस्ट्री की जरूरतों को समझें

शारदा यूनिवर्सिटी के कंप्यूटर साइंस एंड एप्लीकेशन विभाग के प्रमुख रजनीश सिंह का मानना है कि वर्तमान पीढ़ी के छात्रों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वे अपना फोकस किन विषयों पर रखें। उन्होंने बताया कि केवल भारी-भरकम पैकेज का सपना देखने के बजाय छात्रों को इंडस्ट्री की जमीनी हकीकत और जरूरतों को समझना चाहिए। आज की बड़ी कंपनियां केवल उसी छात्र को प्राथमिकता दे रही हैं जो केवल किताबी ज्ञान न रखता हो, बल्कि तकनीकी सिद्धांतों को वास्तविक समस्याओं के समाधान में लागू करने की क्षमता भी रखता हो। डिग्री केवल एक प्रवेश द्वार है, लेकिन सफलता का रास्ता आपकी व्यावहारिक समझ से होकर गुजरता है।

नई तकनीकों और AI का महत्व

रजनीश सिंह के अनुसार, मौजूदा समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI छात्रों के सीखने के लिए सबसे महत्वपूर्ण विषयों में से एक है। इसके अलावा रोबोटिक्स, इंटरनेट ऑफ थिंग्स यानी IoT, और साइबर सिक्योरिटी जैसे क्षेत्रों में तेजी से विकास हो रहा है। छात्रों को न केवल इन तकनीकों की बुनियादी समझ विकसित करनी चाहिए, बल्कि इनके प्रैक्टिकल उपयोग पर भी जोर देना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि AI के क्षेत्र में अब सामान्य जानकारी काफी नहीं है। अब छात्रों को एडवांस्ड कॉन्सेप्ट्स जैसे एजेंटिक AI, एक्सप्लेनेबल AI और रिस्पॉन्सिबल AI पर ध्यान देना होगा। रिस्पॉन्सिबल AI का विषय आज के समय में इसलिए अत्यंत जरूरी है क्योंकि तकनीक का दायरा जैसे-जैसे बढ़ रहा है, इसके सुरक्षित और नैतिक उपयोग के बारे में जानकारी रखना अनिवार्य हो गया है।

अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर तकनीकी मंथन

हाल ही में यूनिवर्सिटी में आयोजित एक अंतर्राष्ट्रीय कांफ्रेंस के माध्यम से इन तकनीकी पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई थी। इस आयोजन में करीब 10 अलग-अलग देशों से विशेषज्ञ और डेलीगेट्स शामिल हुए। विभिन्न क्षेत्रों से आए प्रतिभागियों ने AI, रोबोटिक्स और साइबर सिक्योरिटी जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार रखे। इस कांफ्रेंस में इंडस्ट्री के अनुभवी जानकारों के साथ पैनल चर्चा का भी आयोजन हुआ। इसमें इस बात पर मुख्य रूप से मंथन किया गया कि तकनीकी दुनिया में हो रहे बदलावों के अनुरूप छात्रों को भविष्य की नौकरियों के लिए किस प्रकार तैयार किया जाए और उन्हें किन नए कौशलों से लैस किया जाए।

थ्योरी से आगे बढ़कर प्रोजेक्ट्स पर करें काम

रजनीश सिंह ने छात्रों को सलाह दी कि वे अपने ज्ञान को केवल किताबों और थ्योरी तक सीमित न रखें। जो कुछ भी आप पढ़ रहे हैं, उसे एक प्रोजेक्ट के जरिए क्रियान्वित करने का प्रयास करें। जब छात्र रियल टाइम एप्लीकेशन तैयार करते हैं, तो उनकी सीखने की क्षमता में कई गुना इजाफा होता है। इसके अलावा, जब कोई कंपनी कैंपस प्लेसमेंट के लिए आती है, तो छात्र अपनी बात को बेहतर तरीके से साबित कर सकते हैं। इंटरव्यू के दौरान केवल यह बताना काफी नहीं होता कि आपने विषय पढ़ा है, बल्कि अगर आप यह दिखा सकें कि आपने उस तकनीक का उपयोग करके किसी वास्तविक समस्या का समाधान ढूंढा है, तो कंपनी पर इसका गहरा प्रभाव पड़ता है।

प्रोग्रामिंग और डेटा स्ट्रक्चर पर मजबूत पकड़

कंप्यूटर साइंस के छात्रों के लिए प्रोग्रामिंग की मजबूत नींव रखना अत्यंत आवश्यक है। विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी छात्र को कम से कम दो से तीन प्रोग्रामिंग भाषाओं में खुद को इतना सक्षम बनाना चाहिए कि वे खुद को 10 में से 8 या 9 अंक देने का आत्मविश्वास रख सकें। इसमें Python के बुनियादी सिद्धांत, डेटा स्ट्रक्चर एंड एल्गोरिदम यानी DSA और डेटाबेस मैनेजमेंट सिस्टम यानी DBMS का ज्ञान होना अनिवार्य है। यदि छात्र इन विषयों को रटने के बजाय अपने प्रोजेक्ट्स में लागू करते हैं, तो उनकी यह स्किल और अधिक परिष्कृत हो जाती है।

बचपन से ही विकसित करें प्रॉब्लम सॉल्विंग क्षमता

12वीं कक्षा पास करने वाले नए छात्रों के लिए सलाह देते हुए रजनीश सिंह ने कहा कि तैयारी की शुरुआत पहले दिन से ही होनी चाहिए। एप्टीट्यूड के अलावा, समस्या को हल करने की क्षमता यानी प्रॉब्लम सॉल्विंग स्किल पर सबसे अधिक काम करने की जरूरत है। कंप्यूटर साइंस में एक समस्या को हल करने के लिए कई रास्ते हो सकते हैं, लेकिन बुद्धिमानी इसी में है कि छात्र अलग-अलग विकल्पों पर विचार करें और सबसे प्रभावी समाधान चुनें। आपका थॉट प्रोसेस जितना स्पष्ट और तार्किक होगा, आप उतनी ही आसानी से जटिल तकनीकी चुनौतियों का सामना कर पाएंगे। अंत में उन्होंने दोहराया कि केवल बड़े पैकेज के पीछे भागने के बजाय अपनी स्किल्स को तराशने पर ध्यान देना ही बेहतर भविष्य और एक उत्कृष्ट करियर की शुरुआत है।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

आपकी प्रतिक्रिया?

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!

फेसबुक वार्तालाप